केव टू कोड: भोपाल की प्राचीन प्रतिभा को मिल सकता है एआई का नया पता: क्रेडाई बीएचईएल की जमीन पर लिखी जा सकती है भोपाल के नए भविष्य की कहानी: मनोज मीक 1100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में प्रगति का स्वागत;
कमाल का भोपाल’ अभियान ने एआई लाइटहाउस, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्मार्ट इंडस्ट्रीज को जोड़ने की मांग दोहराई
जिस राजधानी क्षेत्र की गुफाओं में आदि मानवों ने प्रकृति के अद्भुत रगों से रॉक पेंटिंग्स उकेरीं, जहाँ साँची ने ज्ञान बोध की परंपरा सँजोई और राजा भोज ने नगर निर्माण को जल प्रबंधन से जोड़ा, जो शहर दुनिया की भीषणतम औद्योगिक त्रासदी से गुज़रकर अपनी जीवटता के साथ खड़ा हो रहा है, वहाँ अब एआई युग की नई औद्योगिक कहानी लिखने का अवसर है। भेल की लगभग 1100 एकड़ भूमि मध्य प्रदेश को उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ती प्रक्रिया राजधानी के लिए इस संभावना का नया आधार बन सकती है।
‘कमाल का भोपाल’ अभियान ने इस प्रगति का स्वागत करते हुए आग्रह किया है कि भूमि की विकास योजना में क्वांटम कंप्यूटिंग, एआई लाइटहाउस, स्मार्ट इंडस्ट्रीज, रिसर्च और उच्च कौशल रोजगार को प्राथमिकता मिले। अभियान के फाउंडर और क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक के अनुसार, राजधानी की वैज्ञानिक प्रतिभा और औद्योगिक क्षमताओं को साथ लाने पर इसका लाभ पूरे क्षेत्र को मिल सकता है।
वर्षों की पैरवी ने नागरिक अभियान को दिया नया आधार:
मीक ने बताया कि जीआईएस–2025 से पहले मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत ‘कमाल का भोपाल’ अभियान की रिपोर्ट में भेल की अतिरिक्त भूमि के पुनर्पयोग, आधुनिक उद्योगों, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट का आधार रखा गया था। क्रेडाई के अभ्यावेदनों में लगातार लगभग 2200 एकड़ भूमि पर एआई लाइटहाउस और स्मार्ट इंडस्ट्रीज की विस्तृत परिकल्पना प्रस्तुत की गई है।
उन्होंने कहा कि भौंरी में प्रस्तावित नॉलेज एंड एआई सिटी ‘इकाई’ की पहल के बाद भेल भूमि के विषय में प्रगति ‘कमाल का भोपाल’ अभियान की निरंतर पैरवी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार, उच्चस्तरीय शासन–प्रशासन, भेल प्रबंधन और सहयोगी जनप्रतिनिधियों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।
एआई की दुनिया को भोपाल की इंजीनियरिंग की जरूरत पड़ सकती है:
एआई के पीछे सर्वर, बिजली, कूलिंग और उपकरणों की विशाल व्यवस्था काम करती है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार, दुनिया के डेटा सेंटरों की बिजली खपत 2025 के लगभग 485 टेरावॉट-घंटे से बढ़कर 2030 में लगभग 950 टेरावॉट-घंटे हो सकती है। यह बढ़ती जरूरत पावर सिस्टम और ऊर्जा दक्ष उपकरणों के लिए भी अवसर पैदा करती है।
भोपाल के पास इस क्षेत्र का औद्योगिक अनुभव है। भेल की ट्रांसफॉर्मर, मोटर, स्विचगियर और कंट्रोल सिस्टम संबंधी इंजीनियरिंग तथा परीक्षण क्षमताओं को नए उत्पादों और उद्यमों से जोड़ने की संभावना है। मीक के अनुसार, राजधानी एआई सॉफ्टवेयर के साथ उसे चलाने वाले औद्योगिक उपकरणों की अर्थव्यवस्था में भी अपनी भूमिका तलाश सकती है।
लैब से बाजार तक पहुँचने का आधार मौजूद:
राजधानी में सीएसआईआर–एम्प्री में उद्योगों के लिए मेटल 3डी प्रिंटिंग और परीक्षण की शुल्क आधारित सुविधाएँ हैं। सिपेट भोपाल में डिजाइन, टूलिंग और उत्पाद परीक्षण का आधार है। आईसर भोपाल में माइक्रोफैब्रिकेशन और मेडिकल इमेजिंग में एआई पर शोध हो रहा है; उसका इनक्यूबेशन केंद्र बाहरी उद्यमियों को भी अवसर देता है।
अचारपुरा का आईआरईएल रेयर अर्थ मेटल एंड टाइटेनियम थीम पार्क इस तस्वीर में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। बार्क की तकनीकों पर आधारित पायलट और मिनी प्लांट उद्यमियों को तकनीक समझने और उसके व्यावसायिक उपयोग की तैयारी में सहायता देने के लिए हैं।
इन क्षमताओं का महत्व तब बढ़ेगा जब नया उद्यमी अपना विचार लेकर आए और उसे डिजाइन, प्रोटोटाइप, परीक्षण तथा उद्योग में उपयोग तक पहुँचने का स्पष्ट रास्ता मिले।
भौंरी से मोहासा–बाबई तक जुड़े विकास के अवसर:
मीक ने भौंरी की प्रस्तावित ‘इकाई’, भेल की इंजीनियरिंग, अचारपुरा की मटेरियल टेक्नोलॉजी, गोविंदपुरा–मंडीदीप के उद्योग और मोहासा–बाबई के पावर एवं रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण को साझा रिसर्च और स्किलिंग से जोड़ने का सुझाव दिया।
उपकरण बनाने वाली इकाइयाँ स्थानीय एआई उद्यमों की ग्राहक भी बन सकती हैं। मशीन खराब होने से पहले संकेत पहचानना, कैमरे से उत्पाद की गुणवत्ता जाँचना और उत्पादन में ऊर्जा की बर्बादी घटाना ऐसे उपयोग हैं जिन पर उद्योगों के साथ पायलट शुरू किए जा सकते हैं।
स्पेन की सबमर को राज्य की ओर से भविष्य में 1 गीगावॉट तक एआई अनुकूल डेटा सेंटर क्षमता के उद्देश्य से दिया गया आशय-पत्र भी निवेश संवाद का महत्वपूर्ण संदर्भ है।
राजधानी होने का लाभ नवाचार को मिले:
राजधानी में सरकारी विभागों की उपस्थिति एआई उद्यमों के लिए उपयोग के अवसर पैदा कर सकती है। राज्य की घोषणाओं में भोपाल का एआई एक्सेलरेटर, गवर्नेंस सैंडबॉक्स और राज्य डेटा सेंटर के डिजिटल ट्विन का समझौता शामिल हैं।
शहरी सेवाओं, स्वास्थ्य, जल प्रबंधन और पर्यटन की वास्तविक समस्याओं पर सीमित, मापनीय पायलट स्थानीय प्रतिभा को काम दे सकते हैं। सफल समाधान आगे दूसरे शहरों के लिए भी उपयोगी बन सकते हैं।
ऊर्जा, पानी और रहने योग्य शहर की साझा ताकत:
कर्क रेखा पर स्थित राजधानी के सौर संसाधन को रिन्यूएबल पावर, स्टोरेज और भरोसेमंद ग्रिड की योजना से जोड़ना होगा। नर्मदा–बेतवा की क्षेत्रीय निकटता दीर्घकालीन जल योजना का महत्वपूर्ण संदर्भ है। उद्योगों और डेटा सेंटरों के लिए उपलब्ध मात्रा, आपूर्ति व्यवस्था, पुनः उपयोग और दक्ष कूलिंग का आकलन साथ होना चाहिए।
विशाल झीलें, वन विहार नेशनल पार्क और रातापानी टायगर रिजर्व का परिवेश देश के दिल में स्थित शहर की जीवन-गुणवत्ता को विशिष्ट बनाता है। ग्रीन कवर स्थानीय तापमान को संतुलित करने में सहायक होता है। इस प्राकृतिक संपदा के साथ अच्छे कार्यस्थल, आवास और आवागमन की सुविधा सुकून के शहर भोपाल में प्रतिभा को आकर्षित करने और बनाए रखने का आधार बन सकती है।
युवाओं के विचार शहर में ही उद्यम बनें:
भोपाल में इतवार को आयोजित एंथ्रोपिक क्लॉड बिल्ड डे संबंधी विमर्श ने स्थानीय युवाओं की संभावनाओं की ओर ध्यान खींचा है। अभियान का आग्रह है कि ऐसे आयोजनों के उपयोगी विचारों को मेंटर, साझा कंप्यूट, लैब और शुरुआती ग्राहक मिलें। रोजगार की योजना में सॉफ्टवेयर के साथ इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस, कूलिंग, नेटवर्क, साइबर सिक्योरिटी और मशीन संचालन की स्किल भी शामिल हों।
मीक ने कहा, “केव-टू-कोड भोपाल की सृजनशीलता को नए समय से जोड़ने का विचार है। भीमबेटका की अभिव्यक्ति, साँची का बोध, विद्वान राजा भोज की नगर दृष्टि और भेल की इंजीनियरिंग से प्रेरणा लेकर हम ऐसा राजधानी क्षेत्र बना सकते हैं जहाँ युवा अपने सपनों के लिए घर छोड़ने को मजबूर न हों।”
उन्होंने भूमि और सुविधाओं का संयुक्त आकलन, चरणबद्ध विश्वस्तरीय मास्टर प्लान तथा संस्थानों और उद्योगों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया। परियोजना की प्रगति में निवेश के साथ चालू उद्यम, स्थानीय खरीद, अप्रेंटिसशिप और वास्तविक रोजगार भी मापे जाएँ।
“भोपाल की अगली सकारात्मक पहचान यहाँ तैयार होने वाले विचारों, उत्पादों और अवसरों से बने, भेल की भूमि इस भविष्य को आकार देने का महत्वपूर्ण अवसर है।”
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मीक ने कहा, “केव-टू-कोड भोपाल की सृजनशीलता को नए समय से जोड़ने का विचार है। भीमबेटका की अभिव्यक्ति, साँची का बोध, विद्वान राजा भोज की नगर दृष्टि और भेल की इंजीनियरिंग से प्रेरणा लेकर हम ऐसा राजधानी क्षेत्र बना सकते हैं जहाँ युवा अपने सपनों के लिए घर छोड़ने को मजबूर न हों।”
उन्होंने भूमि और सुविधाओं का संयुक्त आकलन, चरणबद्ध विश्वस्तरीय मास्टर प्लान तथा संस्थानों और उद्योगों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया। परियोजना की प्रगति में निवेश के साथ चालू उद्यम, स्थानीय खरीद, अप्रेंटिसशिप और वास्तविक रोजगार भी मापे जाएँ।
“भोपाल की अगली सकारात्मक पहचान यहाँ तैयार होने वाले विचारों, उत्पादों और अवसरों से बने, भेल की भूमि इस भविष्य को आकार देने का महत्वपूर्ण अवसर है।”



