
क्रेडाई भोपाल ने नए रेरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह को सौंपा 6-बिंदु प्रतिवेदन; समयबद्ध और व्यावहारिक समाधान का मिला भरोसा
क्रेडाई भोपाल के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को अध्यक्ष मनोज मीक के नेतृत्व में मध्यप्रदेश रेरा के चेयरमैन शैलेंद्र सिंह से भेंट कर उन्हें पदभार ग्रहण करने पर शुभकामनाएं दीं। प्रतिनिधिमंडल ने रेरा कम्प्लायंस से जुड़ी वर्षों पुरानी व्यावहारिक कठिनाइयों और प्रक्रियागत विसंगतियों पर विस्तृत प्रतिवेदन भी सौंपा।
‘कमाल का भोपाल’ नागरिक अभियान के अंतर्गत रेरा चेयरमैन को भोपाल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विशिष्टताओं पर आधारित पुस्तकें, विद्वान राजा भोज द्वारा रचित नगर नियोजन एवं के महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ तथा राजा भोज की प्रतिमा भेंट की गई। चेयरमैन ने राजधानी संबंधित इस बौद्धिक संपदा की सराहना की।
प्रतिवेदन में 6 प्रमुख रिफॉर्म प्रस्ताव रखे गए। इनमें प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन की वैलिडिटी को बिल्डिंग परमिशन की अवधि के बजाय प्रमोटर द्वारा घोषित प्रोजेक्ट कम्प्लीशन की अवधि के अनुरूप करना; सेपरेट बैंक अकाउंट से राशि निकालने वाले सीए सर्टिफिकेट की त्रुटिपूर्ण गणना को रेरा एक्ट और अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था के अनुरूप बनाना तथा प्रोजेक्ट कॉस्ट में फाइनेंस पर ब्याज, बैंक चार्जेस, ऑन-साइट खर्च, डेवलपमेंट वर्क्स, सेवाओं और अन्य प्रत्यक्ष निर्माण लागत को शामिल करना प्रमुख है।
क्रेडाई ने एनफोर्समेंट ऑफिसर की शक्तियों को एक्ट और नियमों में निर्धारित सीमा तक स्पष्ट करने का विषय भी उठाया। प्रतिवेदन में कहा गया कि शिकायतों की सुनवाई और निर्णय से जुड़े अधिकार स्पष्ट न होने से प्रभावित पक्षों के अपील के अधिकार में व्यावहारिक कठिनाई उत्पन्न होती है।
संस्था ने कहा कि रेरा एक्ट में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के आवेदन पर 30 दिनों में निर्णय की व्यवस्था है, लेकिन अनेक मामलों में बार-बार कम्प्लायंस मांगे जाने से प्रक्रिया कई महीनों तक लंबित रहती है। इसके समाधान के लिए स्पष्ट चेकलिस्ट, समयबद्ध ऑनलाइन स्क्रूटनी और पारदर्शी डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम बनाया जाना चाहिए।
पूरी हो चुकी परियोजनाओं के संबंध में राजस्थान की तरह ऐसी व्यवस्था का सुझाव दिया गया, जिसमें बिक्री, मार्केटिंग या बुकिंग शुरू होने से पहले सक्षम अथॉरिटी से कम्प्लीशन अथवा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त प्रोजेक्ट्स को निर्धारित डिक्लेरेशन और जांच के बाद रेरा रजिस्ट्रेशन से छूट मिल सके।
सक्षम अधिकारी से प्राप्त डेवलपमेंट कम्प्लीशन पोर्टल पर अपलोड करने के बाद भी क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने की बाध्यता का विषय भी उठाया गया। क्रेडाई ने मांग की कि कम्प्लीशन अप्रूवल की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और समयसीमा स्पष्ट की जाए तथा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद अनिश्चित अवधि तक तिमाही प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बाध्यता समाप्त हो।
मनोज मीक ने कहा, “रेरा का मूल उद्देश्य प्रापर्टी बायर्स के हितों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। जटिल, अस्पष्ट या विलंबित कम्प्लायंस से डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स की गति और निवेश प्रभावित होता है तथा अंततः होम बायर्स को भी देरी और बढ़ी हुई लागत का सामना करना पड़ता है। हमारी मांग नियमों में ढील की नहीं, बल्कि एक्ट के अनुरूप स्पष्ट, समयबद्ध और समान सरल व्यवस्था की है।”
रेरा चेयरमैन शैलेंद्र सिंह ने सभी बिंदुओं को गंभीरतापूर्वक सुना और बताया कि प्राधिकरण ने अनेक रिफॉर्म्स पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कुछ विषयों पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि परीक्षण और समाधान की प्रक्रिया तेज की जा सके। उन्होंने कानून-सम्मत और व्यावहारिक कठिनाइयों के त्वरित समाधान का भरोसा दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने रेरा के तकनीकी सदस्य संजय गुप्ता से भी भेंट कर प्रतिवेदन के प्रमुख बिंदुओं से अवगत कराया। उन्होंने भी सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ व्यावहारिक समाधान का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में विपिन गोयल, सुनील गुप्ता, अजय शर्मा, समीर सबरवाल, दिनेश गोयल, जयंत भंडारी, आकाश क्षिंगन तथा क्रेडाई ग्वालियर के अध्यक्ष सुदर्शन झंवर उपस्थित रहे।


