क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, श्यामला हिल्स, भोपाल में दिनांक 30 सितंबर 2026 को हिंदी माह के समापन समारोह

हिंदी माह के समापन समारोह का आयोजन किया गया। जो मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र पारे जी, निदेशक (डायरेक्टर) जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, की गरिमामयी उपस्थिति के साथ प्राध्यापक शिवकुमार गुप्ता प्राचार्य क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भोपाल की अध्यक्षता में सभी विभागाध्यक्षों तथा समस्त संकाय सदस्यों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. अरूणाभ सौरभ ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन तथा सरस्वती वंदना से हुई। मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र पारे, प्राचार्य प्रोफेसर शिवकुमार गुप्ता तथा आदरणीय अतिथि प्रकाशचंद्र झा जी मंचासीन हुए ।प्राचार्य द्वारा मुख्य अतिथि का सम्मान शॉल और श्रीफल देकर किया गया तथा उन्हें एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया साथ ही प्रकाशचंद्र झा जी को भी प्रशस्ति पत्र, श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
धर्मेंद्र पारे जी ने अपने वक्तव्य में लोक बोली के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि भाषा विविध लोक बोलियों के मिश्रण से बनती है। अतः भाषा के सम्मान में लोक भाषाओं का सम्मान भी निहित होना चाहिए। भाषाओं का भी लोकतंत्र होना चाहिए । इस लोकतंत्र का तात्पर्य यह है कि सभी भाषाएं और बोलियां अपनी पहचान के साथ बची रहे और अपनी प्रतिष्ठा के साथ समाज में बोली व समझी जाती रहे। उसे एक दूसरे से किसी प्रकार के खतरे की आशंका न हो।
धर्मेंद्र जी ने भाषा की साझेदारी की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भाषा की साझेदारी अति आवश्यक है यह साझेदारी ही भाषा प्रसार और आयु को बढ़ाती है।
साथ ही उन्होंने लोकबोलीयों के होते ह्रास की ओर भी इंगित किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय लोग तो हिंदी सीख रहे हैं परंतु हिंदी भाषा लोक बोली तक नहीं पहुंच रही है।
धर्मेंद्र जी के वक्तव्य के पश्चात अंधा युग का नाटक मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन डॉक्टर अरुणाभ सौरभ ने किया। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल के छात्रों द्वारा अभिनीत नाटक की प्रस्तुति सराहनीय रही ।
अंत में प्राचार्य प्रोफेसर शिवकुमार गुप्ता जी द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन तथा डॉ. अरूणाभ सौरभ द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से समारोह का समापन हुआ।




