नई फसल की आवक से पहले दालों में तेजी बरकरार
तुअर चार रुपए तक महंगी, चना दाल में भी पांच रुपए की तेजी

भोपाल। त्योहारी और शादी-विवाह के सीजन के बीच दालों के बाजार में तेजी का दौर लगातार बना हुआ है। वर्तमान में नई फसल की आवक शुरू नहीं हुई है और नई फसल बाजार में आने में अभी समय है। ऐसे में उपलब्ध माल की सीमित सप्लाई के बीच दालों के भाव में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
तुअर दाल में चार रुपए की तेजी
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में तुअर दाल के भाव में करीब चार रुपए प्रति किलो की तेजी आई है। तुअर दाल पहले 128 से 130 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, जो अब बढ़कर 132 से 134 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
चना दाल पांच रुपए महंगी
चना दाल के भाव में भी तेजी का असर दिखाई दे रहा है। एक सप्ताह पहले चना दाल 79 रुपए प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 84 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
उड़द मोगर और मूंग मोगर में भी तेजी
उड़द मोगर के भाव 102 से 111 रुपए से बढ़कर 110 से 121 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं मूंग मोगर भी 92 से बढ़कर 98 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
नई फसल की आवक में अभी समय
विवेक साहू ने बताया कि दालों में तेजी के पीछे नई फसल की आवक में अभी समय होना, वर्तमान सप्लाई की सीमित उपलब्धता, त्योहारी मांग और आगामी शादी-विवाह सीजन की बढ़ती खरीदारी प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा आयातित दालों की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, आयात की गति और मंडियों में स्टॉक की स्थिति का भी बाजार पर असर पड़ता है।
सरकार की निगरानी जरूरी
विवेक साहू ने कहा कि सरकार की सक्रिय निगरानी और समय पर हस्तक्षेप से दालों के भाव को नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है। हाल ही में शक्कर के भाव करीब 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने के बाद सरकार के हस्तक्षेप और बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों से कीमतों में कमी आई तथा करीब एक सप्ताह के भीतर शक्कर के भाव लगभग 55 रुपए प्रति किलो के स्तर तक आ गए थे।
दालों पर भी सरकार समय रहते उठाए कदम
विवेक साहू ने कहा कि इसी तरह दालों के मामले में भी सरकार को समय रहते स्टॉक, आयात और उपलब्धता पर निगरानी रखते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि कृत्रिम कमी या अनावश्यक तेजी की स्थिति न बने और त्योहारी एवं शादी-विवाह के सीजन में आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार नहीं पड़े।
नई फसल आने पर राहत की उम्मीद
उन्होंने कहा कि नई फसल की नियमित आवक शुरू होने के बाद बाजार में उपलब्धता बढ़ने से दालों के भाव में स्थिरता आने की उम्मीद है। फिलहाल नई फसल आने तक सरकार की निगरानी और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है।




