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बिल्डिंग भारत संपर्क ने वाराणसी में सीज़न 2 की शुरुआत के साथ नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ाया भारत का सिविल इंजीनियरिंग आंदोलन

वाराणसी, उत्तर प्रदेश | 3 अक्टूबर 2026: दुनिया के सबसे पुराने शहर में – जहाँ भारत ने पहली बार पानी, पत्थर और बस्तियों को टिकाऊ रूप देने के लिए इंजीनियरिंग की समझ विकसित की—देश के युवा इंजीनियरिंग प्रतिभाएँ यह विचार करने के लिए एकत्रित हुईं कि भारत आगे क्या निर्माण करेगा। 1 से 3 अक्टूबर तक IIT (BHU), वाराणसी ने सिविल इंजीनियरिंग में बिल्डिंग भारत संपर्क इनोवेशन बूट कैंप इन सिविल इंजीनियरिंग के 2026-27 सीज़न की शुरुआत हुई। इसके साथ ही, देश का महत्वपूर्ण सिविल इंजीनियरिंग आंदोलन नए विस्तार और नए उत्साह के साथ अपने दूसरे सीज़न के लिए लौटा।

शुरुआत से ही उत्साह देखने को मिला। भारत भर के संस्थानों से 500 से ज़्यादा रजिस्ट्रेशन और 83 सिविलाथॉन एंट्री आईं। छात्रों ने उन चुनौतियों को सामने रखकर अपने विचार और समाधान प्रस्तुत किए, जो भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य को आकार देंगी।

सीज़न 2 उस यात्रा को आगे बढ़ाता है, जिसकी शुरुआत देश के कुछ प्रमुख संस्थानों के प्रतिभाशाली इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को एक मंच पर लाने से हुई थी। बिल्डिंग भारत संपर्क IIT गांधीनगर, IIT कानपुर और IIT मद्रास से होते हुए JSW विजयनगर में एक नेशनल स्टार्टअप कॉन्टेस्ट तक पहुँचा—जहां नेशनल चैंपियन चुने गए और भारत के इनोवेशन तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम में सिविल इंजीनियरिंग को प्रमुख स्थान मिला। जो एक बड़े प्रपोज़ल के तौर पर शुरू हुआ था। वह एक राष्ट्रीय संस्थान बन गया; नया सीज़न इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए पहले से अधिक व्यापक पहुँच और अधिक स्पष्ट उद्देश्य के साथ शुरू हुआ है।

वाराणसी को इस नए सीज़न के उद्घाटन के लिए चुनना एक सोचा-समझा निर्णय था। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंतर्गत 1919 में बनारस इंजीनियरिंग कॉलेज (BENCO) की स्थापना के साथ शुरू हुई इंजीनियरिंग विरासत वाले इस शहर में IIT (BHU) परंपरा और भविष्य के संगम के रूप में खड़ा है। इसका सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट 1949 से अपनी जड़ें जमाए हुए है, जो पीढ़ियों से विकसित हुई इंजीनियरिंग शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

“बिल्डिंग भारत संपर्क ठीक वैसी ही एकेडेमिया-इंडस्ट्री पार्टनरशिप का प्रतिनिधित्व करता है जिसकी भारत को इस समय ज़रूरत है, और IIT (BHU), वाराणसी में इसका नया सीज़न शुरू करना हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है। सिविल इंजीनियरिंग पर हमारे राष्ट्र के भौतिक स्वरूप को आकार देने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यह देखकर खुशी होती है कि एक ऐसा मंच हमारे विद्यार्थियों को अपने ज्ञान को भारत के निर्माण के वास्तविक कार्य से जोड़ने की चुनौती दे रहा है — और यहाँ हमने जो आइडिया देखे, वे इंजीनियरों की इस पीढ़ी की असाधारण प्रतिभा को दिखाते हैं।”

प्रो. अमित पात्रा, डायरेक्टर, IIT (BHU), वाराणसी इस मंच को अटल इनोवेशन मिशन (AIM), NITI आयोग; भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय; अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE); और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) के समर्थन से मजबूती मिल रही है। ये सभी संस्थान मिलकर इस मंच को विशेषज्ञता, मार्गदर्शन, नवाचार के अवसर और संस्थागत सहयोग उपलब्ध करा रहे हैं—जो विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में सिविल इंजीनियरिंग और युवा इनोवेटर्स की भूमिका को और सुदृढ़ करता है।

“अब सवाल यह नहीं है कि भारत के युवा सिविल इंजीनियरों के पास आइडिया हैं या नहीं। उनके पास आइडिया हैं, और यह बात स्पष्ट है। असली चुनौती यह है कि क्या हम ऐसे मंच, मार्गदर्शन और उद्योग से जुड़ने के अवसर तैयार कर सकते हैं, जो इन विचारों को किसी प्रतियोगिता कक्ष से बाहर भी आगे बढ़ने और वास्तविक रूप लेने का अवसर दें। IIT (BHU), वाराणसी में एक नया सीजन शुरू करना उसी विश्वास को फिर से साबित करता है। हम चाहते हैं कि युवा इंजीनियर समस्या पहचानने से लेकर समाधान निकालने तक, और आखिर में केवल भागीदार से इनोवेटर, फाउंडर और बिल्डर बनने तक आगे बढ़ें। यह सफर विकसित भारत 2047 से अलग नहीं है — बल्कि इसके लिए आवश्यक आधार है।”

डॉ. रजनीश दासगुप्ता, ट्रस्टी एवं डायरेक्टर, एसोसिएशन ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री (इंडिया) | नेशनल डायरेक्टर, बिल्डिंग भारत संपर्क “भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के सपने उतने ही मज़बूत होंगे जितने मज़बूत उन्हें बनाने वाले इंजीनियर होंगे। बिल्डिंग भारत संपर्क ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है जहाँ युवा दिमाग सिर्फ़ आइडिया नहीं देते, बल्कि वे फाउंडर और बिल्डर की तरह सोचना सीखते हैं। JSW को एक ऐसे आंदोलन का समर्थन करने पर गर्व है जो भारत के सिविल इंजीनियरिंग प्रतिभा को ऐसे इनोवेटर और एंटरप्रेन्योर में बदल रहा है जिनकी हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की यात्रा को ज़रूरत है – ऐसे लोग जो एक विकसित भारत बनाएंगे।”

जेएसडब्ल्यू ग्रुप तीन दिनों में, प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के नेतृत्व में आयोजित मास्टरक्लास, इंटेंसिव मेंटरशिप और सिविलाथॉन में हिस्सा लिया।सिविलाथॉन एक कठिन समस्या-समाधान क्षेत्र है जहाँ आइडियाज़ का परीक्षण न केवल तकनीकी योग्यता के लिए, बल्कि वास्तविक दुनिया की प्रासंगिकता और उनके बड़े पैमाने पर विस्तार (स्केल) की क्षमता के लिए भी किया जाता है। इस और आगामी संस्करणों के सबसे मज़बूत आइडिया बिल्डिंग भारत संपर्क की प्रक्रिया के अगले चरणों तक पहुँचेंगे और उस लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेंगे, जहाँ पिछले सीज़न के विजेता ने अपनी यात्रा पूरी की थी—यानी ऐसे समाधान, जिनका वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल किया जा सके और जो ठोस प्रभाव पैदा कर सकें।

2026–27 सीज़न की शुरुआत के साथ, बिल्डिंग भारत संपर्क ने सिविल इंजीनियरिंग में नवाचार के लिए भारत के एक प्रमुख मंच के रूप में अपनी भूमिका को फिर से रेखांकित किया है। जो अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार को एक साझा विश्वास के साथ जोड़ता है- कि विकसित भारत का निर्माण करने वाले इंजीनियर आज हमारे बीच हैं और वे अभी से निर्माण की इस यात्रा में योगदान दे रहे हैं।

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