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सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने ज्ञानेश कुमार के विरोध के लिए विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट का सबूत होने का दावा, करेंगे केस

नई दिल्ली: सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और पूर्व राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने स्पष्ट तौर पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया है और जल्द ही कोर्ट में सबूत के साथ जाने की भी बात कही है। उनके मुताबिक विदेशी ताकतों के भारतीय एजेंट उनके इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों को अंजाम दे रहे हैं। महेश जेठमलानी देश की प्रसिद्ध क्रिमिनिल लॉयर दिवंगत राम जेठमलानी के बेटे हैं राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं। महेश जेठमलानी ने देश में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बनाए गए माहौल को लेकर एक्स पर एक पोस्ट किया है और यह बताने की कोशिश की है कि इसके पीछे कौन सी ताकतें हैं, जो भारत में बवाल कराने के पीछे पड़े हैं। उन्होंने लिखा है,’कोई गलती मत कीजिए। इन प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों से पैसे मिल रहे हैं। उनके स्थानीय समर्थक इसे अंजाम देने में लगे हुए हैं।

पहले भी उठे हैं फंडिंग को लेकर सवाल

  • जंतर-मंतर पर पहले तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन और अभी सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे लोगों की फंडिंग पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।
  • जंतर-मंतर पर जिस तरह से पिछली बार खाने-पीने की चीजें मुहैया करवाई गईं और प्रदर्शन में शामिल हुए कुछ लोगों ने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर दावे किए, उसको लेकर भी प्रश्नचिन्ह हैं।

 

मानसून सत्र में एफसीआरए बिल नहीं हुआ पास

  • जहां तक फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट (एफसीआरए) बिल, 2026 की बात है तो सरकार इसे संसद के मानसून सत्र में ही पास करवाना चाहती थी।
  • लेकिन, विपक्षी दलों के भारी विरोध की वजह से यह मुमकिन नहीं हुई और आखिरकार इसे अगस्त में 30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजना पड़ा।
  • इस कानून में बदलाव का सबसे ज्यादा ईसाई और मुस्लिम संगठन विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें इस तरह के ज्यादा विदेशी फंड मिलते हैं, जिसे वह अपनी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर खर्च करने का दावा करते हैं।
  • एफसीआरए क्या है और कैसे काम करता है

    आसान शब्दों में कहें तो एफसीआरए तीन काम करता है-

  • एफसीआरए ये तय करता है कि विदेशों से योगदान कौन ले सकता है और उनकी क्या शर्तें होंगी।
  • इससे यह तय होगा कि विदेशी पैसे कैसे लिया जाएगा, हिसाब-किताब कैसे रखना होगा और सरकार को उसकी रिपोर्ट देनी पड़ेगी।
  • एफसीआरए विदेशी फंडिंग से जुड़ी ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाता है, जिससे भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या जन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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