गायत्री साधना और यज्ञोपवीत संस्कार से महिलाओं के लिए भी खुला आत्मिक उन्नति का मार्ग 750 से अधिक साधकों ने 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में दी पूर्णाहुति, एक दर्जन महिलाओं ने कराया यज्ञोपवीत संस्कार

भोपाल। गायत्री शक्तिपीठ, एम.पी. नगर, भोपाल में दशहरा पर्व के अवसर पर नवरात्रि गायत्री महामंत्र अनुष्ठान की पूर्णाहुति 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर 750 से अधिक साधकों ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर लोकमंगल एवं आत्मकल्याण की कामना की। इस अवसर पर श्री सदानंद अंबेकर ने कहा कि साधना का तात्पर्य अनगढ़ जीवन को सुगढ़ बनाना है। साधना जीवन के बहिरंग और अंतरंग दोनों क्षेत्रों में सुसंस्कार एवं सुव्यवस्था उत्पन्न करने की प्रक्रिया है। वास्तव में सभी साधनाएं मन को साधने और व्यक्तित्व को परिष्कृत करने के लिए होती हैं। साधना से व्यक्ति के विचार, व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
गायत्री शक्तिपीठ भोपाल के व्यवस्थापक श्री राजेश पटेल ने साधकों से आग्रह किया कि वे साधना से प्राप्त पुण्यफल को लोकमंगल में लगाने के लिए आराधना का क्रम भी अपनाएं। उन्होंने कहा कि समाजसेवा के लिए प्रतिदिन दो घंटे का समयदान करने का संकल्प साधना की सार्थक पूर्णाहुति होगी।
महिलाओं का यज्ञोपवीत संस्कार विशेष आकर्षण रहा
कार्यक्रम में विशेष रूप से एक दर्जन महिलाओं का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया गया। इस अवसर पर प्रांतीय शिक्षण प्रभारी श्री रमेश अभिलाषी ने कहा कि गायत्री साधना और यज्ञोपवीत के माध्यम से आत्मिक उन्नति का मार्ग महिलाओं के लिए भी खुला है। प्राचीन वैदिक काल में गार्गी, मैत्रेयी, अपाला और लोपामुद्रा जैसी विदुषियों ने वैदिक ज्ञान एवं ऋचाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति को समृद्ध किया।
उन्होंने बताया कि यज्ञोपवीत केवल एक धागा नहीं, बल्कि गायत्री माता के प्रतीक के रूप में धारण किया जाने वाला पवित्र संस्कार है, जो जीवनभर सत्कर्म करने तथा अपने आचरण को पवित्र बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
महायज्ञ के साथ दीक्षा,पुंसवन, नामकरण, मुंडन एवं जन्मदिवस संस्कार भी संपन्न कराए गए। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन किया गया।
सायंकाल नशासुर दहन – इस दशहरे रावण नहीं, नशासुर का दहन करें!
सायंकाल आयोजित कार्यक्रम में व्यसन रूपी असुर के प्रतीक रावण के पुतले का दहन आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर मध्य प्रदेश युवा प्रकोष्ठ के प्रांतीय सह-समन्वयक डा दयानंद समेले ने कहा कि वर्तमान समय में व्यसन एक बड़े असुर के रूप में युवा पीढ़ी को घेरकर कमजोर बना रहे हैं। बाजार में नशे के नए-नए उत्पाद आकर्षक रूप में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए युवाओं को संस्कारवान बनाना आवश्यक है।
नवरात्रि में मां दुर्गा की नौ शक्तियों का प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि इस वर्ष 200 से अधिक साधकों ने शक्तिपीठ के साधना कक्ष में, देवात्मा हिमालय की प्रतिकृति में विशेष अनुष्ठान किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गायत्री परिजन, साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।




