मानवाधिकार आयोग की फटकार के बाद जागा जिला प्रशासन अरेरा कॉलोनी की अवैध शराब दुकान की जांच करने पहुंचा प्रशासनिक अमला
शराब माफिया का पक्ष ले रहे आबकारी अधिकारियों से रहवासियों की हुई झड़प अरेरा कॉलोनी शराब दुकान मामले में नींद से जागा प्रशासन, एडीएम की अध्यक्षता में भारी भरकम जांच दल गठित


भोपाल – राजधानी भोपाल के 10 नंबर मार्केट अरेरा कॉलोनी में नियम विरुद्ध संचालित हो रही अवैध शराब दुकान मामले में जिला प्रशासन एकबार फिर हरकत में आया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो द्वारा किए गए निरीक्षण एवं कड़ी फटकार के बाद जिला प्रशासन,आबकारी विभाग समेत कई विभागों के अधिकारी जांच करने पहुंचे। इस दौरान रहवासियों और प्रशासनिक अमले के बीच हॉट टॉक भी हुई।
गौरतलब है कि स्थानीय रहवासी 10 नंबर मार्केट स्थित शराब दुकान को हटाने के लिए पिछले एक वर्ष से लगातार शिकायतें कर रहे हैं। रहवासियों द्वारा जिला प्रशासन, राज्य सरकार तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक कई बार लिखित शिकायतें की गईं, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। रहवासियों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों के बावजूद प्रशासन के लचर रवैए से जनसामान्य में रोष व्याप्त है।
मानवाधिकार आयोग द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद जिला कलेक्टर ने एडीएम पी सी शाक्य की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल गठित किया है,
जिसमे आबकारी अधिकारी वीरेंद्र धाकड़, विधि अधिकारी राजेंद्र उपाध्याय,पटवारी,आर आई नगर निगम के अधिकारी,राजस्व विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे। टीम गुरुवार को अरेरा कॉलोनी स्थित शराब दुकान की वैधानिकता की जांच करने पहुची। जांच के दौरान, शिकायतकर्ता, स्थानीय रहवासी एवं आर्य समाज मंदिर के व्यवस्थापक अपने-अपने दस्तावेज़ एवं साक्ष्यों के साथ उपस्थित रहें एवं शराब दुकान संचालक और जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी ज़ाहिर की।
फर्जी जांच रिपोर्ट से गुमराह करने का आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इससे पूर्व आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कर भोपाल कलेक्टर,राज्य सरकार एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को गुमराह किया गया था। पूर्व की जांच में प्रशासन द्वारा आर्य समाज मंदिर को मंदिर मानने से ही इंकार कर दिया गया था, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और तथ्यात्मक रूप से संदिग्ध कदम था।
रिपोर्ट में कई भ्रामक असत्य एव अधूरी जानकारियाँ दी गई जिससे सीधा लाभ शराब माफिया को मिले।
रहवासियों ने मांग की दुकान संचालक पर प्रकरण दर्ज कर जुर्माना लगाया जाए और निरस्त हो लाइसेंस
स्थानीय रहवासी विवेक त्रिपाठी ने मांग की है कि अरेरा कॉलोनी में नियम विरुद्ध संचालित शराब दुकान संचालक पर आर्थिक दंड लगाया जाए, संबंधित दुकान एवं उससे जुड़ी अन्य दुकानों के लाइसेंस नवीनीकरण के समय प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कराई जाए और जांच में दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निरस्तो की कार्यवाही की जाए। साथ ही स्थानीय रहवासियों के कथन एवं उनकी शिकायतों को विधिवत दर्ज कर जांच का हिस्सा बनाया जाए।
रहवासी लवनीश भाटी का कहना है कि आवासीय क्षेत्र में शराब दुकान का संचालन न केवल आबकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण को भी प्रभावित करता है।
प्रशासन की निष्पक्षता पर नजर
स्थानीय रहवासी पूर्णेंदु शुक्ला ने कहा है कि वे जांच प्रक्रिया पर पूर्णतः सतर्क होकर निगरानी रखेंगे ताकि पूर्व की तरह कोई भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत कर मामले को दबाया न जा सके। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध हो तथा दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
अब देखना यह है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की फटकार के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई क्या वास्तव में अवैध शराब दुकान पर निर्णायक कार्रवाई तक पहुंचती है या फिर मामला फिर से फाइलों में दबा दिया जाएगा।अगर ऐसा हुआ तो संरक्षण देने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों की शिकायत मय प्रमाण माननीय न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी।



