बिखरे अक्स से आज की सामाजिक स्थिति को किया पेश
कीर्ति बैले और परफार्मिंग आर्ट्स की मार्मिक प्रस्तुति



भोपाल, कीर्ति बैले और परफार्मिंग आर्ट्स द्वारा आज की सामाजिक स्थिति को लेकर एक भावनात्मक नाटक का मंचन किया गया। नाटक में आज की सामाजिक स्थिति को पेश किया गया। पति की अचानक मृत्यु की खबर एक स्त्री की दुनिया को जैसे थाम देती है। शोक, स्मृतियों और अधूरे सवालों के बीच उसे एक ऐसा सच पता चलता है जो उसके वैवाहिक जीवन की पूरी तस्वीर बदल देता है—उसके पति के जीवन में किसी और स्त्री का होना।
उसी समय, उस पुरुष की प्रेमिका भी उसकी यादों से खिंची चली उसके घर तक आ पहुँचती है। वह उन स्मृतियों के सहारे उस व्यक्ति के करीब होना चाहती है, जिसे वह अपना प्रेम मानती रही। लेकिन उस घर की चौखट पर उसे एक ऐसा सच पता चलता है, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी—कि उस पुरुष की एक पत्नी भी है।
अचानक दो अनजान स्त्रियाँ आमने-सामने खड़ी होती हैं—एक पत्नी और एक प्रेमिका। दोनों के पास उस व्यक्ति की अपनी-अपनी यादें हैं, अपने-अपने सच हैं। बातचीत धीरे-धीरे खुलती है और सामने आने लगते हैं रिश्तों के **बिखरे अक्स**—टूटे हुए विश्वास, अधूरी उम्मीदें और एक ही आदमी की दो अलग-अलग कहानियाँ।
जैसे-जैसे संवाद आगे बढ़ता है, दोनों स्त्रियाँ अपने अनुभवों, स्मृतियों और भावनाओं के सहारे उस व्यक्ति को समझने की कोशिश करती हैं—और यह प्रश्न भी उनके भीतर गहराने लगता है कि अगर वह व्यक्ति आज जीवित होता, तो क्या सच में इन रिश्तों का सामना कर पाता? क्या वह इन दोनों जीवनों के बीच खड़े होकर कोई उत्तर दे पाता, या फिर उसके सच के सामने ये रिश्ते वैसे ही बिखर जाते?
बिखरे अक्स”उन भावनात्मक सच्चाइयों की यात्रा है, जहाँ एक ही व्यक्ति की स्मृतियाँ दो अलग-अलग जीवनों में अलग-अलग रूपों में बसती हैं—और उन्हीं स्मृतियों के बीच दिखाई देते हैं रिश्तों के बिखरे हुए अक्स।


