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सीएपीएफ रेगुलेशन बिल, 2026 पर उठे सवाल

राष्ट्रीय सुरक्षा व बलों के मनोबल पर असर की आशंका

नई दिल्ली, 20 मार्च। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में ऑल एक्स-पैरा मिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन (AAPWA) ने प्रस्तावित CAPF Regulation Bill, 2026 को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त कीं। जयेंद्र सिंह राणा राष्ट्रीय अध्यक्ष (COEPFMWA) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहां कि इस अवसर पर  एच.आर. सिंह (एडीजी, सेवानिवृत्त, CRPF)  एस के सूद (एडीजी सेवा निवृत्त), एम.एस. मल्ही (आईजी, सेवानिवृत्त, BSF),  एस.के. चौधरी (एडीजी, सेवानिवृत्त, ITBP),  विकास चंद्रा (आईजी, सेवानिवृत्त, BSF),  बिनोद नायक (आईजी, सेवानिवृत्त, SSB),  के.के. शर्मा (आईजी, सेवानिवृत्त, CRPF) एवं  पी.के. गुप्ता (आईजी, सेवानिवृत्त, SSB) तथा  सर्वेश त्रिपाठी पूर्व सहायक कमांडेंट सीआरपीएफ ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (BSF, CRPF, ITBP, CISF, SSB) के लगभग 12,500 अधिकारियों और उनके अधीन कार्यरत करीब 10 लाख कार्मिकों की नेतृत्व संरचना, सेवा शर्तों और मनोबल को प्रभावित कर सकता है।

प्रेस वार्ता में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि CAPFs देश की सीमा सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और आपदा प्रबंधन में अग्रिम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनके नेतृत्व ढांचे में किसी भी प्रकार का असंतुलन सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। वक्ताओं ने संसदीय समितियों और वेतन आयोगों की पूर्व टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि CAPFs में पदोन्नति में देरी, सीमित नेतृत्व अवसर और संरचनात्मक असमानताएँ पहले से ही चिंता का विषय रही हैं।
वर्ष 2019 में CAPF अधिकारियों को संगठित ग्रुप ‘A’ सेवा (OGAS) का दर्जा दिया गया था, जिसे 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी मान्यता दी सबसे अधिक दुःख इस बात पर व्यक्त किया गया कि जब 3 जुलाई 2019 को कैबिनेट ने इसे अनुमोदित कर दिया, तब 07 वर्ष बाद इसके कार्यान्वयन में देरी का क्या तुक है।

इसके बावजूद, इन निर्णयों का पूर्ण क्रियान्वयन अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में आशंका जताई गई कि प्रस्तावित विधेयक न्यायालय के निर्देशों के प्रभाव को कम कर सकता है और मौजूदा असंतुलन को और बढ़ा सकता है।प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि बलों की ऑपरेशनल क्षमता, निर्णय-प्रक्रिया और ज़मीनी स्तर पर कार्यकुशलता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे दीर्घकालिक रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अंत में मांग की गई कि CAPF Regulation Bill, 2026 को संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति को भेजा जाए, ताकि सभी हितधारकों को सुनकर इस पर व्यापक, पारदर्शी और संतुलित विचार-विमर्श किया जा सके।

श्री एच.आर. सिंह (एडीजी, सेवानिवृत्त, CRPF)
अध्यक्ष : एक्स-पैरा मिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन (AAPWA)

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