शनि की महादशा में नवग्रहों की अंतर्दशा का प्रभाव


शनि ग्रह की महादशा को ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही अहम चरण माना गया है। शनि की महादशा 19 वर्षों की होती है। इस दौरान मनुष्य को कुंडली में शनि की स्थिति और अपने कर्मों के अनुसार फल मिलते हैं क्योंकि, शनि देवता को न्याय का देवता कहा गया है। कहते हैं कि शनि महाराज राजा को रंक और रंक को भी राजा बना सकते हैं। शनि महादशा की अवधि के दौरान अलग-अलग ग्रहों की अंतर्दशा भी आती है। मान लीजिए कि शनि की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा चल रही हो तो जातक को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता होती है। वहीं, बुध की अंतर्दशा हो तो यह भाग्य में वृद्धि करता है। इसी प्रकार नवग्रहों की अंतर्दशा का फल अलग-अलग प्राप्त होता है और इनकी अवधि लगभग 11 महीने से लेकर 3 साल तक होती है।
अगर कुंडली में शनि की महादशा में शनि की अंतर्दशा चल रही हो, तो यह जातक के लिए सबसे अहम अवधि होती है। शनि की अंतर्दशा कुल तीन साल और तीन दिन तक चलती है। इस दौरान कई प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मान-सम्मान में कमी होने की आशंका रहती है। साथ ही, स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है। इन दो साल की अवधि में वात रोग, कफ, ज्वर आदि होने की संभावना रहती है। हालांकि, आपको किसी ऐसे व्यक्ति से लाभ मिल सकता है, जिसकी आपने उम्मीद भी न की हो।
उपाय : ‘महामृत्युंजय मंत्र’ नियमित रूप से विधिपूर्वक जाप करें।
शनि की महादशा में बुध की अंतर्दशा का प्रभाव
जब शनि की महादशा में बुध की अंतर्दशा चल रही हो तो यह जातक के भाग्य में भी वृद्धि कर सकती है। इसकी कुल अवधि दो साल, आठ महीने और नौ दिन तक होती है। इस दौरान मनुष्य के सुख-सौभाग्य और संपत्ति में वृद्धि होने के योग बने रहते हैं। साथ ही, समाज में मान-सम्मान बढ़ता है और कारोबार में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। इस अवधि में जातक को मित्रों से सहयोग भी मिलता है। लेकिन बुध की अंतर्दशा में जातक को अपने पुत्र, भाई या बहन के स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक होता है।
उपाय : श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
शनि की महादशा में केतु की अंतर्दशा का प्रभाव
अगर शनि की महादशा में केतु की अंतर्दशा चल रही हो, तो इस अवधि के दौरान जातक को धैर्य रखना आवश्यक होता है। केतु की अंतर्दशा कुल एक साल, एक महीना और एक दिन तक रहती है। माना जाता है कि इस दौरान घर-परिवार में पुत्र या पुत्री से विवाद होने की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में वाणी पर संयम रखना आवश्यक होता है। अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना और विरोधियों से सतर्क रहना भी जरूरी होता है। आर्थिक मामलों में बाधाएं या रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।
उपाय : सफेद-काले कुत्ते को रोटी खिलाएं या सफेद-काले कंबल का दान करें।
शनि की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा का प्रभाव
जब शनि की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा चल रही हो तो इस अवधि को अच्छा माना जाता है। यह कुल तीन साल और दो महीने तक चलती है। इस दौरान जातक को समृद्धि और मान-सम्मान प्राप्त हो सकता है। संतान की ओर से भी सुख मिलने के योग होते हैं। कृषि के क्षेत्र से जुड़े लोगों को उन्नति और व्यवसाय के क्षेत्र में प्रगति मिलने के योग बनने लगते हैं। जो जातक आयात निर्यात का व्यापार करते हैं उन्हें अधिक लाभ मिलने की संभावना होती है।
उपाय : दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
शनि की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा का प्रभाव
अगर शनि की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा चल रही हो तो इस अवधि मनुष्य को सजग रहना चाहिए। यह अवधि कुल ग्यारह महीने और 12 दिन की होती है। इस दौरान अनेक प्रकार की समस्याएं सामने आ सकती हैं। जातक को उदर विकार या नेत्र संबंधी परेशानी होने की आशंका रहती है। कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सतर्कता बरतनी चाहिए। मान-सम्मान में कमी और धन संबंधी परेशानी की संभावना बन सकती है। परिवार में जीवनसाथी और पुत्र के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है।
उपाय : आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
शनि की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा का प्रभाव
जातक को चंद्रमा की अंतर्दशा में सबसे अधिक सावधान रहना जरूरी होता है। शनि की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा कुल एक साल और सात महीने तक रहती है। इस अवधि के दौरान जीवनसाथी और अपने स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देना आवश्यक होता है। किसी भी छोटी सी परेशानी को नजरअंदाज न करें। चिकित्सक से परामर्श लेना फायदेमंद होता है। अन्यथा यह आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान मन को शांत रखना चाहिए और जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए। जल संबंधी कार्यों में भी सावधान रहना आवश्यक होता है।
उपाय : सफेद चीजों जैसे- चावल, चांदी, सफेद तिल आदि का दान करें।
शनि की महादशा में मंगल की अंतर्दशा का प्रभाव
ज्योतिषशास्त्र में शनि की महादशा में मंगल की अंतर्दशा को अनुकूल नहीं माना गया है। ऐसे में इस दौरान सतर्क रहना चाहिए। इसकी कुल अवधि एक साल, एक महीना और 9 दिन की होती है। इस दौरान परिवार में कोई भी बात सोच-समझकर करनी चाहिए और वाणी पर भी संयम रखना आवश्यक होता है। नौकरी के क्षेत्र में कोई भी फैसला जल्दबाजी में न करें और अग्नि संबंधी कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए। अन्यथा परेशानी बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
उपाय : हनुमान चालीसा का पाठ करें और लाल मसूर की दाल का दान करें।
शनि की महादशा में राहु की अंतर्दशा का प्रभाव
शास्त्रों के मुताबिक, शनि की महादशा में राहु की अंतर्दशा कुल दो साल, दस महीने और 6 दिन तक रहती है। इस अवधि के प्रभाव को अनुकूल नहीं माना जाता है। ऐसे में जातक को अपने स्वास्थ्य पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए। किसी छोटी सी समस्या या बीमारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बल्कि तुरंत अच्छे चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। यात्रा करते और वाहन चलाते समय अधिक सतर्क रहना चाहिए। जल्दबाजी में फैसले लेने से नुकसान हो सकता है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि शनि और राहु ग्रह के प्रभाव के समय सबसे ज्यादा सचेत रहना आवश्यक होता है।
उपाय : महामृत्युंजय जप करें। साथ ही, भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें।
शनि की महादशा में गुरु की अंतर्दशा का प्रभाव
अगर शनि की महादशा में गुरु की अंतर्दशा चल रही हो, तो जातक को पारिवारिक मामलों में धैर्य से कोई भी काम लेना चाहिए। गुरु की अंतर्दशा की कुल अवधि दो साल, 6 महीने और 12 दिन की होती है। इस दौरान परिवार के साथ बात या चर्चा करते समय अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। मधुर वाणी से माहौल सकारात्मक बना रह सकता है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और आर्थिक मामलों में जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचें।
उपाय : केसर का तिलक लगाएं। साथ ही, पीली वस्तुओं का दान करें।


