कर्मकांड कथा वार्ता और यज्ञ बिना मुहूर्त के संभव नहीं
भोपाल में आयोजित ज्योतिष सम्मेलन में 12 अप्रैल को वक्तव्य देते हुए धर्माधिकारी, पंडित गंगा प्रसाद आचार्य


भोपाल में आयोजित ज्योतिष सम्मेलन में 12 अप्रैल 2026 रविवार को सम्मेलन सभा में वक्तव्य देते हुए धर्माधिकारी, पंडित गंगा प्रसाद आचार्य ने कहा कि जिस प्रकार ज्योतिष स्कंधत्रय, के बिना कर्मकांड, उपासना कांड ज्ञानकांड, का कार्य संभव नहीं हो सकता कर्मकांड कथा वार्ता यज्ञ,याज्ञादि, बिना मुहूर्त के संभव नहीं वास्तुदेव कर्मकांड एवं ज्योतिष दोनों में समाहित है। इस प्रकार ज्योतिष विज्ञान में रत्न,भी, समाविष्ट है। रत्न केबल, ग्रह कष्ट का ही निवारण नहीं करता अपितु जीवन को श्रेष्ठ बनाने में भी परम सहायक होते हैं। प्रकृति प्रदत्त कोई भी, वस्तु पदार्थ द्रव्य औषधि आदि,अकारण नहीं है। सब कुछ महत्वपूर्ण है, आवश्यकता ज्ञान की है, रत्नो से अनेक लाभ, संभव है परंतु, रत्नोँ की शुद्धता, एवं धारण विधि शास्त्रोंचित, परम आवश्यक है। रत्नोँ को धारण करने, से पूर्व शुद्धता का परीक्षण एवं प्राप्त करने का शुद्ध समय तथा मुहूर्त अनुसार, रत्न शुद्धिकरण, पूजन अर्चन जप हवन मार्जन तर्पण आदि समुचित रूप से किए बिना रत्नोँ से लाभ नहीं हो सकता, बिना ज्योतिषचार्य, एवं कर्मकांड विशेषज्ञ के परामर्श एवं सहायता के बिना धारण नहीं किया जाना चाहिए। सम्यक रूप से विधि विधान पूर्वक उपरोक्त अनुसार ही रत्नोँ को धारण करने, पर ही रत्नोँ से शुभ लाभ की प्राप्ति संभव होती है।



