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अंतर्राष्ट्रीय तबला वादक प्रोसेनजीत पोद्दार एवं पद्मश्री डॉ. तरुण भट्टाचार्य की संतूर-तबला जुगलबंदी ने समिट में बांधा समां

5 बेस्ट परफॉर्मर्स को जून में मलेशिया में मंच देगी सोसायटी, निःशुल्क जायेंगे मलेशिया

नेक्स्ट जेन टैलेंट समिट 2026’ में तकनीकी कौशल और परंपरा का अद्भुत समागम

भोपाल, 2 मई। हिंदुस्थान आर्ट एंड म्यूजिक सोसायटी द्वारा मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग एवं मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के विशेष सहयोग से आयोजित “नेक्स्ट जेन टैलेंट समिट 2026” शनिवार को कला और संस्कृति का भव्य उत्सव बनकर सामने आया। सुबह 9 बजे से दोपहर 4:30 बजे तक प्रतियोगिताओं और शाम को विविध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को उच्चस्तरीय सांगीतिक अनुभव दिया।

शाम के सत्र में अंतर्राष्ट्रीय तबला वादक प्रोसेनजीत पोद्दार एवं पद्मश्री डॉ. तरुण भट्टाचार्य की संतूर-तबला जुगलबंदी विशेष आकर्षण रही। किरवानी राग पर आधारित इस प्रस्तुति में छपताल की विलंबित लय से आरंभ कर तीनताल की मध्य लय में झाला तक की यात्रा ने श्रोताओं को बांधे रखा। सवाल-जवाब की शैली में संतूर की मींड, गमक और जाला तकनीक तथा तबले पर देते-देते, लयकारी, तिहाई और सम पर सटीक नियंत्रण का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ।

शास्त्रीय गायन में पं. कैवल्य कुमार गुरु ने राग मधुवंती में विलंबित एकताल, मध्य लय तीनताल और ताड़ाना प्रस्तुत कर स्वर विस्तार, सूक्ष्म मींड और तानों की स्पष्टता का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। उनकी गायकी में गायकी अंग की पारंपरिक गंभीरता और आधुनिक संवेदना का संतुलन देखने को मिला।

ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियों में ‘मानउद्धारण’ ने विशेष छाप छोड़ी। कविसम्राट उपेंद्र भंज रचित यह रचना राग पट्टदीप और ताल त्रिपुट पर आधारित है, जिसमें भगवान जगन्नाथ की कृपा—गजेंद्र मोक्ष और द्रौपदी चीरहरण प्रसंग—को अभिव्यक्त किया गया। गुरु डॉ. गजेंद्र कुमार पंडा के निर्देशन में प्रस्तुति में अभिनय, मुखाभिनय और हस्त-मुद्राओं की सूक्ष्मता ने कथानक को जीवंत कर दिया।

इसी क्रम में ‘अर्धनारीश्वर’ की प्रस्तुति में गुरु डॉ. गजेंद्र कुमार पंडा एवं विदुषी अतसी मिश्रा ने राग मालब कौशिक, ताल त्रिपुट व एकताल में शिव के तांडव और पार्वती के लास्य का संतुलित समन्वय प्रस्तुत किया। यह रचना तांडव की ऊर्जा और लास्य की कोमलता के माध्यम से ब्रह्मांडीय संतुलन का सशक्त प्रतीक बनी। संगीत संयोजन पं. लक्ष्मीकांत पलित का रहा, जबकि नृत्य संयोजन स्वयं गुरु पांडा द्वारा किया गया।

अन्य प्रस्तुतियों में भजन, शास्त्रीय गायन, तबला और हारमोनियम संगत तथा समूह भरतनाट्यम नृत्य शामिल रहे, जिनमें कलाकारों ने रागदारी, लयकारी, अंग-शुद्धि और मंच-व्यवस्था की उत्कृष्ट समझ का परिचय दिया।

रात 8 बजे आयोजित पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह में मंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा एवं विधायक भगवान दास सबनानी ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर कुल 120 प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही 5 उत्कृष्ट बेस्ट परफॉर्मर्स को सोसायटी द्वारा जून माह में मलेशिया में अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान किए जाने की घोषणा की गई। कार्यक्रम का संचालन संजय मधुप ने किया।

संस्थापक एवं सोसायटी सचिव प्रोसेनजीत पोद्दार ने कहा,
“यह समिट युवा कलाकारों को तकनीकी उत्कृष्टता और मंचीय अनुभव दोनों प्रदान करता है। इस बार कलाकारों ने जिस स्तर की लयकारी, राग विस्तार और प्रस्तुति कौशल दिखाया, वह अत्यंत सराहनीय है।”

कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अखिलेश खंडेलवाल ने कहा,
“प्रतिभागियों में तकनीकी परिपक्वता—चाहे वह स्वर नियंत्रण, ताल की समझ या नृत्य की संरचना हो—स्पष्ट रूप से दिखाई दी। यह आयोजन उन्हें राष्ट्रीय स्तर की तैयारी देता है।”

सह-समन्वयक डॉ. राजकुमार मालवीय ने कहा,
“इस मंच पर परंपरा और नवाचार का सुंदर संगम देखने को मिला। युवाओं की तकनीकी समझ और रचनात्मक अभिव्यक्ति भारतीय संस्कृति के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।”

 

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