खबरमध्य प्रदेश

किताबें हमें विचारशील बनाती हैं–संतोष चौबे

अनकही', 'आसपास', 'सदगुरु कबीर और मानवता' पुस्तकें हुईं लोकार्पित

भोपाल। दिमाग को क्रियाशील बनाए रखने के लिए किताबें पढ़ना बहुत आवश्यक है। वर्तमान समय में बाजार ने टेक्नोलॉजी के माध्यम से हमारी एकाग्रता को पूरी तरह से भंग कर हमारे दिमाग को गुलाम बना लिया है। अब बाजार अपने तरीकों से हमें संचालित कर रहा है। आज हम एक बड़े ग्लोबल बाजार से घिरे हुए हैं। ऐसे में हमारे जीवन में किताबों का महत्व और अधिक हो जाता है। किताबें हमें गुलामी के विरुद्ध खड़े होने की समझ और संबल प्रदान करती हैं। हमें विचारशील बनाती हैं। हमारे संस्थान में आईटी का मतलब लोगों को इम्पावर करना हैं, जबकि बाजार में आईटी का मतलब लोगों को नियंत्रित करना है। टेक्नोलॉजी के पुरोधा एलन मस्क और बिल गेट्स ने भी अपने–अपने साक्षात्कारों में इस बात को रेखांकित किया है कि वे तमाम व्यस्तताओं के बावजूद माह में तीन–चार किताबें जरूर पढ़ते हैं।’

पुस्तकों के महत्व पर यह महत्वपूर्ण उद्गार  संतोष चौबे, वरिष्ठ कवि-कथाकार, निदेशक, विश्व रंग एवं कुलाधिपति, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा *श्री नरेश बाथम के ग़ज़ल संग्रह ‘अनकही’, श्रीमती मनोरमा पंत के लघुकथा संग्रह ‘आसपास’, एवं डॉ. मालती बसंत की शोध पुस्तक ‘सदगुरु कबीर और मानवता’ के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किए। आईसेक्ट पब्लिकेशन, वनमाली सृजन पीठ एवं स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल का यह प्रतिष्ठा आयोजन ‘शारदा सभागार’ स्कोप कैम्पस, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल में समारोह पूर्वक किया गया।

संतोष चौबे ने लोकार्पित पुस्तकों में सर्वप्रथम रचनाकार  नरेश बाथम के ग़ज़ल, नज़्म, गीत संग्रह ‘अनकही’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नरेश बाथम ने बहुत अच्छी ग़ज़लें लिखीं हैं। भोपाल ग़ज़लों का शहर हैं। भोपाल ने कई बड़े शायर दिये हैं, जिनका देश–विदेश में बड़ा नाम है। उन्होंने नरेश बाथम की छोटी बहर की ग़ज़ल का उम्दा पाठ भी किया–
खत पुराने पढ़ा करो
नये तराने गढ़ा करो

पर कटाए बैठे हो
ज्यादा मत उड़ा करो

छूट जाओगे पीछे देखो
हर जगह मत अड़ा करो

इस दुनिया में दर्द बहुत है
अपने दिल को कड़ा करो

चाहत है जो तुम्हें छाँव की
पैर बड़ों के पड़ा करो

संतोष चौबे ने मनोरमा पंत के लघुकथा संग्रह ‘आसपास’ पर अपने विचार रखते हुए कहा कि लघुकथा कविता के ज्यादा निकट होती है। वे संवेदात्मक काम करती हैं। लघुकथा का वितान जब बड़ा होता है तो वे कहानी के करीब होती हैं। मनोरमा जी अपने लेखन के माध्यम से नई चीजों की तलाश करतीं हैं। वे अपनी लघुकथाओं में अनुभूति का अन्वेषण करती दिखाई पड़ती हैं।उन्होंने मनोरमा पंत जी की लघुकथा ‘पिघलते सपनें’ का बहुत ही भावनात्मक पाठ भी किया।

संतोष चौबे ने डॉ. मालती बसंत की शोध पुस्तक ‘सद्गुरु कबीर और मानवता’ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक हमें पुर्नविचार की और ले जाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में आधुनिकता की पड़ताल भारत के आधुनिक चिंतकों के साथ ही होना चाहिए। कबीर इस श्रृंखला के महान विचारक-चिंतक रहे हैं। वर्तमान समय में उनके ‘ढाई आखर प्रेम’ के संदेश को संपूर्ण विश्व को आत्मसात करने की बहुत जरूरत है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  मुकेश वर्मा, प्रतिष्ठित कथाकार एवं अध्यक्ष, वनमली सृजन पीठ, भोपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आईसेक्ट पब्लिकेशन ने बहुत कम समय में प्रकाशन जगत में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। साहित्य की समस्त विधाओं के साथ–साथ विभिन्न विषयों पर उल्लेखनीय पुस्तकों का उत्कृष्ट प्रकाशन किया गया है। आपने विशेषकर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आपको ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ना चाहिए।

इस अवसर पर लेखक  नरेश बाथम ने अपनी पुस्तक ‘अनकही’ पर अपने विचार रखते हुए कहा कि इसमें सम्मिलित रचनाओं में मेरे जीवन का सार है। जीवन के विभिन्न पहलुओं को मैंने ग़ज़ल, नज़्म और गीतों के जरिये बयां करने की कोशिश की है। उन्होंने इस अवसर पर अपनी चुनिंदा ग़ज़लों का बेहतरीन पाठ भी किया।

वरिष्ठ साहित्यकार  घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ द्वारा अनकही पुस्तक पर अपने समीक्षात्मक उद्बोधन में कहा कि ग़ज़ल दिमाग से नहीं लिखी जाती वह तो दिल से कही जाती हैं। इस तरह दिल से कही गई मुकम्मल और नायाब ग़ज़लों का एक खूबसूरत तोहफा है ‘अनकही’। इन ग़ज़लों में भाव की गहरी संवेदना है, ग़ज़ल का खूबसूरत शिल्प विधान है, इन ग़ज़लों के शेर में जिंदगी के कितने ही रंग बिखरे पड़े हैं। इनमें प्यार– मोहब्बत, इज़हार–इंकार, मनुहार–तक़रार, उम्मीद–निराशा, मिलन–विछोह सबकुछ मौजूद हैं।

लेखिका ‘मनोरमा पंत’ ने अपनी पुस्तक ‘आसपास’ पर अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा की कोरोना काल के कठिन दौर से गुजरते हुए मैंने लघुकथा लेखन की शुरुआत करते हुए अपने विचारों को संजोया हैं। तेजी से बदलते समय में मैंने अपने आसपास जो कुछ देखा, परखा उसे अपने लघुकथा संग्रह में उकेरने का प्रयास किया है।

वरिष्ठ साहित्यकार  गोकुल सोनी ने आसपास पुस्तक पर अपने समीक्षात्मक उद्बोधन में कहा कि  मनोरमा पंत की लघु कथाओं में नवीनता है, वे ऐसे नए-नए विषय उठाती हैं जिनका समाज से सरोकार है। वास्तव में वही लेखन कालजयी होता है जो मानवीय मूल्यों के विकास को समृद्धि और समर्थन देता है। मनोरमा की लघुकथाएँ इस दृष्टि से सफल लघुकथाएँ कहीं जा सकती हैं। भाषा सहज और भावपूर्ण है। आचार्य कंटक के अनुसार वक्रोक्ति भाषा का सौंदर्य और रस बढाती है। इस दृष्टि से भी ये रसपूर्ण लघुकथाएँ हैं। बीच-बीच में अच्छे पंच आए हैं जिनसे लघुकथा का सौंदर्य बढ़ा है। सभी कथाएँ निर्धारित मानदंडों पर खरी उतरती है और इनमें समाज का सच मुखर होकर बोलता है।

लेखिका ‘डॉ. मालती बसंत’ ने अपनी शोध पुस्तक ‘सद्गुरु कबीर और मानवता’ पर अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब के दोहे बचपन से पाठ्य पुस्तकों में पढ़ें थे। मैं कबीर साहेब से बहुत प्रभावित रही हूँ। इसी कारण मानवता संबंधी विचार मेरे मन में हमेशा रहे हैं। आज मानव धर्म ही निभाने का समय है, जिससे आधुनिक समाज बच सकता है। मानव धर्म में ही प्रेम, करुणा, दया, ममता समाई है। कबीर की वाणी भी हमें यही संदेश देती हैं।

वरिष्ठ रचनाकार  कुमकुम गुप्ता ने ‘सदगुरु कबीर और मानवता’ पुस्तक पर अपने समीक्षात्मक उद्बोधन में कहा कि डॉ. मालती बसंत ने संत कबीर की वाणी के मर्म को समाज जीवन में जागरूकता लाने के लिए महत्वपूर्ण समझा और इतना उत्कृष्ट विषय चुना जो उनकी अध्ययनशीलता और मानवीय संवेदना को दर्शाता है।

पुस्तक लोकार्पण समारोह का सफल संचालन करते हुए श्री महीप निगम, वरिष्ठ प्रबंधक, आईसेक्ट पब्लिकेशन ने प्रकाशन की अबतक की यात्रा और उत्कृष्ट उपलब्धियों के विषय में बहुत ही संजीदगी के साथ अपने विचारों को भी साझा किया।
सर्व प्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ शारदा की मूर्ति पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। अतिथियों का स्वागत कवि संजय सिंह राठौर, युवा कवि डॉ. विशाखा राजुरकर राज, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय के मानविकी एवं उदार कला संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. श्रावणी द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन संजय सिंह राठौर द्वारा दिया गया। आभार वक्तव्य डॉ. विशाखा राजुरकर राज द्वारा व्यक्त किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल और आईसेक्ट इंडिया परिवार के सदस्यों ने रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई।

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