

नई दिल्ली: दक्षिण भारत में फिल्मी सितारों का राजनीति में आना नई बात नहीं है। एमजी रामचंद्रन, एनटी रामा राव और जे जयललिता इसकी मिसाल हैं। फिर भी सी जोसेफ विजय की एंट्री और असर ने उत्तर भारत को चौंकाया है। वहीं, विजय की जीत ने तमिलनाडु के इस मिथक को तोड़ा कि राज्य में केवल दो प्रमुख द्रविड़ दल ही राज कर सकते हैं। अपनी फिल्मों और जमीनी स्तर पर युवाओं व महिलाओं को जोड़ने की रणनीति से उन्होंने भारी समर्थन हासिल किया।
उल्टा ट्रेंड। दक्षिण के उलट, हिंदी फिल्मी सितारों का राजनीति में सफर इतना सफल नहीं रहा है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, गोविंदा, सनी देओल, जया प्रदा, उर्मिला मातोंडकर जैसे कलाकार चुनाव तो जीते, लेकिन उनकी राजनीतिक पारी लंबी नहीं रही। बॉलिवुड के बड़े सितारों के भले करोड़ों प्रशंसक हों, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पार्टी का ही रुख करना पड़ता है। इसके बावजूद, जीत की गारंटी नहीं रहती।
प्रशंसकों से जुड़ाव। अक्सर पूछा जाता है कि दक्षिण में फिल्मी सितारों की इतनी जबरदस्त लोकप्रियता का राज क्या है? इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वहां सितारों की लोकप्रियता पर्दे तक नहीं सिमटी, उनका अपने फैंस के साथ भी गहरा जुड़ाव होता है। बॉलिवुड सितारों के मुकाबले दक्षिण के कलाकार अपने प्रशंसकों के बीच ज्यादा सक्रिय और उनके करीब रहते हैं। बॉलिवुड स्टार्स का आम फैंस से सीधा जुड़ाव कम देखने को मिलता है, इसलिए उनकी राजनीतिक पकड़ भी उतनी मजबूत नहीं बन पाती।
फिल्म और त्योहार। दक्षिण भारत के सितारे अपने फैंस क्लब के जरिये प्रशंसकों से जुड़े रहते हैं। वे सिर्फ फिल्मों का प्रमोशन ही नहीं करते, अपने फैंस के साथ अपनी फिल्में भी देखते हैं। कई कलाकार तो अपने फैंस क्लब के लिए टिकटें भी उपलब्ध कराते हैं। यही कारण है कि वहां किसी बड़े सितारे की फिल्म रिलीज फैंस के लिए त्योहार जैसी बन जाती है और पहले दिन सिनेमाघरों में जश्न का माहौल दिखता है।
फैंस क्लब। बॉलिवुड में शाहरुख खान को छोड़कर ज्यादातर सितारों के फैंस क्लब इतने सक्रिय नहीं। दक्षिण भारत में फैंस अपने पसंदीदा कलाकार को खास नाम या टाइटल देते हैं, जिन्हें कलाकार भी गर्व के साथ अपने नाम में जोड़ते हैं। इसलिए, चंद्रशेखरन जोसफ विजय ने भी अपने नाम के साथ थलपति जोड़ा। उनकी राजनीतिक सफलता में भी उनके फैंस क्लब विजय मक्कल इयक्कन (VMI) की भूमिका रही, जो लंबे समय से समाजसेवा और जनता से जुड़े काम करता है।
जनता से जुड़े किरदार। दक्षिण भारतीय फिल्मों के हीरो अक्सर अपनी फिल्मों में ऐसे किरदार निभाते हैं, जो आम लोगों की समस्याओं के खिलाफ लड़ता हो। MGR से शुरू हुई यह परंपरा विजय तक चली आ रही है। विजय की फिल्मों में जनहितैषी नेता की छवि बनी, जिसका राजनीतिक फायदा भी उन्हें मिला। बॉलिवुड में ऐसे किरदार कम देखने को मिलते हैं। साथ ही उनकी भाषा, पहनावा और सांस्कृतिक जुड़ाव भी लोगों को अपनेपन का अहसास कराता है, जिससे उन्हें राजनीति में मजबूत समर्थन मिलता है।


