ई-फार्मेसी के विरोध में हड़ताल से ढाई हजार करोड़ का कारोबार ठप
दिल्ली में 90 फीसदी दुकानें रहीं बंद


दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री, बिना नुस्खे के होम डिलीवरी और भारी छूट के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के आह्वान पर बुधवार को देशभर में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल सफल रही। देशभर में 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों और ड्रगिस्टों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। वहीं, व्यापारिक संगठनों के अनुसार, इस बंद से पूरे देश में करीब ढाई हजार करोड़ रुपये का खुदरा कारोबार प्रभावित हुआ।दिल्ली में लगभग 20 हजार मेडिकल स्टोरों में से करीब 18 हजार यानी 90 फीसदी दुकानें बंद रहीं। सुबह से ही हरि नगर, सुभाष नगर, तिलक नगर, जनकपुरी, उत्तम नगर, पालम, महरौली, नजफगढ़, लक्ष्मी नगर, करोल बाग समेत कई इलाकों में दवा दुकानों के शटर बंद रहे। हालांकि एम्स, सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया जैसे बड़े अस्पतालों के आसपास की दुकानें खुली रहीं। सरकारी अस्पतालों की फार्मेसी, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र और कुछ बड़े रिटेल नेटवर्क भी चालू रहे। शाम चार बजे के बाद दिल्ली के कई इलाकों में दुकानें दोबारा खुलनी शुरू हो गई।
प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन, रखी मुख्य मांगें
एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि हड़ताल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन देशभर में जिला कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदारों के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। इसमें अवैध और अनियंत्रित ई-फार्मेसी (ऑनलाइन दवा बिक्री) पर सख्त रोक लगाने, बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवा बिक्री और होम डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध, ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों द्वारा शिकारी मूल्य निर्धारण और डीप डिस्काउंटिंग पर कार्रवाई जैसी मांगें की गई।


