

इस्लामाबाद: पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अल-बद्र से जुड़े हमजा बुरहान की पीओके में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसकी हत्या अज्ञात हमलावरों ने की, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। पिछले 3-4 साल में हमजा बुरहान के जैसे दर्जनों शीर्ष आतंकवादी ऐसे ही अज्ञात हमलावरों की गोलियों के शिकार बन चुके हैं। हमजा बुरहान ने पुलवामा आतंकी हमले के दौरान ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) के रूप में भी काम किया था। बाद में वह पाकिस्तान भाग गया और वहां शीर्ष आतंकवादियों के संपर्क में रहने लगा। ऐसे में जानें कि हमजा बुरहान का मारा जाना भारत के लिए कितनी बड़ी सफलता है।
हमजा बुरहान का काम क्या था?
हमजा बुरहान की हत्या को जम्मू और कश्मीर में सक्रिय अल बद्र आतंकी समूह के प्रचार, भर्ती और कट्टरपंथी नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण झटका बताया जा रहा है। वह अल-बद्र में स्थानीय युवाओं की भर्ती करने और कश्मीर में भारत विरोधी प्रचार फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पोस्टर, वीडियो और ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री को बनाने और उसे सर्कुलेट करने में बड़ी भूमिका निभाता था। ऐसे में हमजा बुरहान की मौत के बाद जम्मू और कश्मीर में अल बद्र को अपना नया सरगना ढूंढना पड़ेगा, जो उसकी जगह ले सके।
कश्मीरी युवाओं की भर्ती करता था हमजा बुरहान
रिपोर्ट में बताया गया है कि हमजा बुरहान जम्मू और कश्मीर के युवाओं की भर्ती करने और कथित तौर पर उन्हें हथियार उठाने और नशीली दवाओं से संबंधित गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। वह आतंकवाद का महिमंडन करने के लिए युवाओं को धार्मिक जेहाद के नाम पर भड़काता था। इससे भी बात न बनने पर वह नशीले पदार्थों की तस्करी से पैसे कमाने का लालच भी देता था।
हमजा बुरहान की हत्या से कमजोर पड़ा अल बद्र
माना जा रहा है कि हमजा बुरहान की हत्या पीओके में अल-बद्र आतंकी संगठन में जारी आंतरिक संघर्ष के कारण हुई है। यह संघर्ष आतंकी संगठन के भीतर पैसों की बंदरबांट से जुड़ा है, जिसे अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी से कमाया गया है। माना जा रहा है कि हमजा बुरहान की हत्या से अल-बद्र की युवाओं की भर्ती करने, आतंकवाद को महिमामंडित करने और जम्मू-कश्मीर में भारत विरोधी प्रचार फैलाने की क्षमता सीधे तौर पर कमजोर हो जाएगी।



