एजुकेशनमध्य प्रदेश

आरएनटीयू में राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा, विद्यार्थियों ने इतिहास, पुरातत्व और भारतीय विरासत को जाना

रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा का आयोजन, संतोष चौबे ने कहा- हिंदी भाषा समझने के लिए ऐतिहासिक उपन्यासों का अध्ययन जरूरी

भोपाल। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा के अंतर्गत शनिवार को रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “ऐतिहासिक सिक्कों, पुरातात्विक वस्तुओं एवं डाक टिकटों की प्रदर्शनी” का आयोजन किया गया। इतिहास और पुरातत्व पर केंद्रित इस विशेष सत्र में देश के विभिन्न हिंदीतर भाषी राज्यों से आए विद्यार्थियों ने भारत की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत तथा पुरातात्विक महत्व से जुड़ी अनेक जानकारियां दी गईं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं विश्व रंग के निदेशक श्री संतोष चौबे ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आर.पी. दुबे और विशिष्ट अतिथि पद्मश्री नारायण व्यास विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक सिक्कों, पुरातात्विक अवशेषों तथा दुर्लभ डाक टिकटों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने प्रदर्शित सामग्री के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक महत्व की जानकारी दी। इसके साथ ही नर्मदा परियोजना पर आधारित एक विशेष फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे विद्यार्थियों को भारतीय विरासत और सांस्कृतिक संरक्षण के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर मिला।

कुलगुरु प्रो. आर.पी. दुबे ने हिंदीतर राज्यों से आए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा आयोजित इस अध्ययन यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय विश्व रंग, अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास कर रहा है।

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री नारायण व्यास ने इतिहास और पुरातत्व के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “पुरातत्व संस्कृति की नींव है। यदि पुरातत्व नहीं रहेगा तो इतिहास भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा।” उन्होंने पुरातत्व अनुसंधान की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कार्य अत्यंत धैर्य, समर्पण और कठिन परिश्रम की मांग करता है। अनेक कठिन परिस्थितियों में कार्य करने के बाद जब कोई ऐतिहासिक साक्ष्य प्राप्त होता है, तो वह समस्त कठिनाइयों को सार्थक बना देता है। उन्होंने मिट्टी और पुरातात्विक अवशेषों के महत्व को भी विस्तार से समझाया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री संतोष चौबे ने कहा कि इतिहास के निर्माण में पुरातत्व की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आज जिन प्राचीन सभ्यताओं, साम्राज्यों और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी हमें प्राप्त है, उसमें पुरातत्व का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने भोपाल की ऐतिहासिक विरासत, स्मारकों और बेगमों के योगदान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से इतिहास को पुस्तकों के साथ-साथ स्थलों और पुरातात्विक साक्ष्यों के माध्यम से समझने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा को समझने के लिए ऐतिहासिक उपन्यासों का अध्ययन अत्यंत उपयोगी है। विश्व रंग का उद्देश्य हिंदी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं और बोलियों को समान सम्मान देना है, क्योंकि हिंदी का विकास भारतीय भाषाओं के सामूहिक विकास से जुड़ा है।

उन्होंने विश्वविद्यालय में “भाषा मैत्री मंच” स्थापित करने की घोषणा करते हुए कहा कि इसमें विभिन्न भाषाएँ बोलने वाले विद्यार्थी एक-दूसरे की भाषा और संस्कृति को जानने-समझने का अवसर प्राप्त करेंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड तथा विश्व रंग की वैश्विक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कला और संस्कृति की कोई सीमाएँ नहीं होतीं तथा भाषाई समन्वय ही राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता की सबसे बड़ी शक्ति है।

केंद्रीय हिंदी निदेशालय, विश्व रंग फाउंडेशन, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय छात्र अध्ययन यात्रा के अंतर्गत आयोजित यह सत्र विद्यार्थियों के लिए इतिहास, पुरातत्व, भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो रहा है। अध्ययन यात्रा के आगामी सत्रों में भी प्रतिभागी हिंदी, भारतीय संस्कृति, साहित्य और विरासत से जुड़े विविध विषयों पर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सहभागिता करेंगे।

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