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स्वास्थ्य शिक्षा के विस्तार के अनुरूप विश्वविद्यालय व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 विधानसभा से पारित

भोपाल, 22 जुलाई 2026मध्यप्रदेश विधानसभा में मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा में उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के अभूतपूर्व विस्तार को देखते हुए विश्वविद्यालय व्यवस्था को अधिक सक्षम, प्रभावी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में प्रदेश में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जो आज बढ़कर 33 हो गए हैं। इसी प्रकार एमबीबीएस सीटें 760 से बढ़कर 5,550 तथा स्नातकोत्तर (पीजी) सीटें 140 से बढ़कर 2,862 हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में एमबीबीएस सीटों की संख्या 10 हजार तथा पीजी सीटों की संख्या 5 हजार तक पहुँचाना है, ताकि प्रदेश में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

विश्वविद्यालय व्यवस्था होगी अधिक सक्षम

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा संस्थानों और विद्यार्थियों की संख्या में निरंतर वृद्धि के कारण विश्वविद्यालयों पर परीक्षा, मूल्यांकन, परिणाम, संबद्धता, शोध, नवाचार तथा गुणवत्ता सुनिश्चित करने का दायित्व भी लगातार बढ़ा है। संशोधन के माध्यम से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और समयानुकूल बनाया गया है, जिससे विद्यार्थियों को समयबद्ध एवं बेहतर शैक्षणिक सेवाएँ मिल सकेंगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा को सम्मान

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालयों में कुलपति एवं प्रतिकुलपति के स्थान पर कुलगुरु एवं प्रति-कुलगुरु जैसे भारतीय परंपरा आधारित पदनाम अपनाए गए हैं। यह भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

कुलगुरु चयन प्रक्रिया में सुधार

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि संशोधन के माध्यम से कुलगुरु के चयन की प्रक्रिया को और अधिक गुणवत्तापूर्ण बनाया गया है। अब स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले योग्य शिक्षाविद कुलगुरु पद के लिए पात्र होंगे। साथ ही केवल शासकीय संस्थानों तक सीमित पात्रता समाप्त कर राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट स्वास्थ्य शिक्षा विशेषज्ञों को भी अवसर उपलब्ध कराया गया है।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि सरकार केवल वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर नहीं, बल्कि आने वाले 20-25 वर्षों की स्वास्थ्य शिक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निर्णय ले रही है, ताकि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिल सके। चर्चा के उपरांत मध्यप्रदेश विधानसभा ने मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया।

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