ब्रह्मा कुमारीज़ मूल्य उपवन अचारपुरा से बेहतर कल को समर्पित दो अभियानों का तीन चरण में शुभारंभ”
सार्वभौमिक जीवन मूल्य जागृति अभियान 👉उठो जगत के वास्ते युवा जागृति अभियान 🔆 युवा संसद 🔆 अभियान का शुभारंभ 🔆 पेनल डिस्कशन प्रथम चरण: युवा संसद मेरा युवा भारत की प्रतिनिधि संजना पाल ने जीता प्रथम विजेता का पुरस्कार मूल्यनिष्ठ युवा के निर्माण के लिए आध्यात्मिक "युवा संसद" का आयोजन एक सार्थक पहल - अवधेश प्रताप सिंह, अध्यक्ष मानव अधिकार आयोग

युवाओं द्वारा वृद्धों की उपेक्षा का देखा हुआ हाल साझा करते हुए मानव अधिकार आयोग मध्य प्रदेश के अध्यक्ष, अवधेश प्रताप सिंह जी ने कहा कि इस तरह की युवा संसद एक सार्थक संवाद द्वारा कारगर उपाय तलाशने का अनुकरणीय माध्यम बन सकती है। आपने ब्रह्मा कुमारीज मूल उपवन अचारपुरा भोपाल द्वारा ‘आज के युवा की समस्याएं व समाधान विषय पर आयोजित आध्यात्मिक युवा संसद में मुख्य अतिथि व जज के रूप में अपने विचार व्यक्त किये । उन्होंने युवा संसद के प्रतिभागियों को संसद संचालन की सही कार्य विधि का मार्गदर्शन भी दिया । युवा संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विजेताओं को पदक भी वितरित किए गए। डॉ विद्या राकेश, निदेशक राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान मध्य प्रदेश ने विजेताओं को विशिष्ट अतिथि और जज के रूप में युवा संसद के विजेता प्रतिभागियों की घोषणा की और भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन की शुभकामनाएं दी । युवा संसद में युवाओं ने 20 मंत्रालयों जैसे खेल एवं युवा मंत्रालय महिला एवं बाल विकास सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत आदि के सामने अपनी अपनी समस्याएं रखी, संबंधित मंत्रियों ने उत्तर दिए। इस संसदीय चर्चा की विशेषता यह रही की सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि बाहरी सुधर ही काफी नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक सशक्तिकरण की उससे भी अधिक आवश्यकता है । लोकसभा अध्यक्ष ने विवाद से संवाद को रुख करती संसदीय चर्चा की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि आगे भी यदि हम इस परंपरा को जारी रखते हैं तो निश्चित ही हम सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में कदम रख सकेंगे। प्रधानमंत्री ने पक्ष विपक्ष के सभी सदस्यों को गंभीरता पूर्ण और समाधान कारक चर्चा के लिए धन्यवाद दिया। युवा संसद के सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किया गया । उल्लेखनीय है कि यह युवा संसद युवाओं में वैचारिक उत्कर्ष , समस्याओं के विश्लेषण और संश्लेषण की क्षमता का विकास समस्याओं के बाहरी दृश्य कारण के अतिरिक्त आंतरिक अदृश्य कारकों को भी समझ कर समस्याओं के समूल उन्मूलन के कारगर उपायों को तलाशना था । सभी ने स्वीकार किया कि अपराध, अन्याय अत्याचार ,भ्रष्टाचार आदि आदि, का उन्मूलन केवल कानून बनाने से संभव नहीं , बल्कि व्यक्ति के दृष्टिकोण में सुधार लाने से संभव होगा।
माय युवा भारत की प्रतिनिधि संजना पाल ने युवा संसद में प्रथम स्थान, जवाहरलाल नेहरू पब्लिक स्कूल कोलार के ग्यारहवीं के छात्र रौनक अरक ने द्वितीय स्थान और भोपाल अकादमी हायर सेकेंडरी स्कूल की 12 वीं की छात्रा चहल तिवारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। युवा संसद में भोपाल अकादमी हायर सेकेंडरी स्कूल, जवाहरलाल नेहरू पब्लिक स्कूल कोलार, मेरा युवा भारत के प्रतिनिधि, मिम्स कॉलेज नयापुरा, कैन्यन स्कूल के छात्रों ने भाग लिया। ग्वालियर से पधारे युवा प्रभाग के सक्रिय सदस्य बी. के. प्रहलाद ने संसद सत्र का मंच संचालन किया।
द्वितीय चरण : अभियानों का शुभारंभ
जनशक्ति और युवा शक्ति को सही दिशा देंगे यह दोनों जागृति अभियान- अवधेश प्रताप सिंह अध्यक्ष मानव अधिकार आयोग मध्यप्रदेश
मूल्यों के अधोपतन का क्या परिणाम होता है, वर्तमान वैश्विक परिदृश्य खुद ही इशारा कर रहा है। आज जितनी सुविधाएं हैं कदाचित पहले नहीं थी फिर भी जीवन में एक अजीब सा खालीपन है लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि यह खालीपन क्यों है और इसे कैसे भरें। इंसान दिगभ्रमित सा है। जीवन में मूल्य और उत्साह का संचार करने वाले यह समसामयिक अध्यात्म उन्मुख अभियान निश्चित ही अपना उद्देश्य पूरा करने में सफल होंगे। यह विचार मानव अधिकार आयोग मध्य प्रदेश के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह जी ने सार्वभौमिक मूल्य जागृति अभियान एवं उठो जगत के वास्ते युवा जागृति अभियान के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए । अभियानों का शुभारंभ अभियान दलों के सदस्यों को कलश व शिवध्वज देकर तथा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
शिक्षा प्रभाग की रीजनल कोऑर्डिनेटर एवं मूल्य उपवन की निदेशक बीके किरण ने सार्वभौमिक जीवन मूल्य जागृति अभियान का उद्देश्य बताते हुए कहा कि जन मन में सद्गुणों को अपनाने से होने वाले लाभों से अवगत कराकर उन्हें आत्मसात करने की सशक्त प्रेरणा का संचार करना है। इसके लिए चतुर आयामी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे
वे चार आयाम हैं – अवधारणा ,(कॉन्सेप्ट) आवश्यकता (Necessity) , अनुशीलन (Inculcation) और अनुप्रयोग (Aapplication ) । यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल शैक्षणिक या प्रशिक्षण केंद्रों तक सीमित न रहकर किसी भी इच्छुक संगठन, संस्था, सरकारी गैर सरकारी कार्यालयों ,समाज सेवी संस्थाओं में भी संचालित किए जाएंगे। अभियान के शुभारंभ समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे राज्य आनंद संस्थान के निदेशक, प्रवीण गंगराड़े ने अभियान को समसामयिक पहल बताते हुए इसकी सफलता की शुभकामनाएं दी। साथ ही जॉइंट इनकम टैक्स कमिश्नर संजय अग्रवाल जी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शुभकामना देते हुए कहा कि हम सब भी अभियान के सहगामी बनकर उसे सफल बनाने का हर संभव प्रयास करेंगे । बाल कलाकारों ने प्रेरक नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया ।नर्मदापुरम से पधारी वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका बीके सुनीता ने मंच का संचालन किया।
तृतीय चरण: पैनल डिस्कशन
विषय: “सद्गुणों को जीवन में आत्मसात करने की सहज विधि”
पेनल डिस्कशन को फैसिलिटेट करते हुए शिक्षा प्रभाग मध्य प्रदेश की रीजनल कोऑर्डिनेटर बीके किरण ने कहा कि सद्गुणों को जीवन में आत्मसात करने की सहज विधि चर्चा का विषय इसलिए चुना गया क्योंकि कठिनाई से कतराने का मानव स्वभाव हो गया है । यदि किसी को लगता है कि ईमानदार रहना बहुत कठिन है तो ईमानदारी पर लाख भाषण सुनने के बाद भी ईमानदार होने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। यदि ईमानदारी के लाभों से बार-बार उसका परिणाम परिचय कराया जाए और ईमानदारी को धारण करने के सहज उपाय बताए जाएं तो उसके अंदर ईमानदार होने का साहस जग सकता है । ऐसा नहीं है कि ईमानदारी का महत्व हमें पता नहीं है, कौन ऐसा होगा जो ईमानदार नौकर न रखना चाहे, लेकिन खता यही है कि पता होते हुए भी ईमानदारी खुद के जीवन से लापता हो जाती है । आखिर क्या कारण है । कारण की जड़ तक पहुंचकर ही निवारण की इबादत लिखी जा सकती है । इस तरह से विषय प्रवेश के बाद बी के किरण ने सारी सभा की ओर से पहले पैनलिस्ट राज्य आनंद संस्थान के निदेशक प्रवीण गंगराड़े जी से पूछा कि आजकल लोग अच्छा बनने से इसलिए डरते हैं कि उन्हें अंदेशा रहता है कि उनकी अच्छाई का कोई गलत फायदा ना उठा ले। इस डर के कारण अच्छाई से दूर रहना कितना न्याय संगत है? गंगराड़े जी ने कहा की अच्छाई को अच्छाई इसलिए कहा जाता है क्योंकि उसका अंतिम परिणाम अच्छा ही होता है । यदि अच्छाई का किसी को अच्छा परिणाम नहीं मिल रहा है तो समझ जाइए कि उनकी अच्छाई बनावटी है सच्ची नहीं । बी के किरण ने उनसे दूसरा प्रश्न किया कि क्या सभी गुणों का महत्व समान है या उनके महत्व में सापेक्ष अंतर है। इस प्रश्न के जवाब में गंगराड़े जी ने कहा कि समय व परिस्थिति के अनुसार यहां तक की एक ही गुण के महत्व में अंतर आ जाता है तो भिन्न-भिन्न गुणों का भी निश्चित रूप से महत्व भिन्न होता है। तेज प्यास लगने पर पानी का जो महत्व होता है वही महत्व सामान्य प्यास में नहीं होता। सामाजिक संरचना के सभी घटकों व आयामों में समुचित तालमेल बैठाने के लिए सभी गुणों का अपना-अपना महत्व और उपयोगिता है । तत्पश्चात दूसरे पेनलिस्ट जॉइंट कमिश्नर इनकम टैक्स संजय अग्रवाल जी से बीके किरण ने पूछा कि प्रायः हर इंसान दूसरे से अपने प्रति सदव्यवहार की अपेक्षा करता है, इससे एक बात तो साफ है कि उसे सद व्यवहार पसंद है, लेकिन वह स्वयं अन्य सभी के साथ सदव्यवहार पूर्ण व्यवहार करने में कठिनाई या असमर्थता महसूस करता है। आखिर यह विसंगति क्यों है ?इसके जवाब में संजय अग्रवाल जी ने कहा कि इंसान का अहम् ही इस विसंगति का कारण है। फिर उनसे दूसरा प्रश्न पूछा गया कि इंसान वह कौन सा मूल मंत्र याद रखे कि जीवन में गुणों को धारण करने का आत्म बल प्रकट हो जाए। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यदि हमें हमेशा यह याद रहे कि “हम जैसा करेंगे वैसा ही भरेंगे” तो यह स्मृति सद्गुणों को अपनाने की शक्ति प्रदान करेगी। ज्ञात हो कि पेनलिस्ट गंगराड़े जी प्रख्यात किताब “गुब्बारे सी हल्की है जिंदगी” के लेखक हैं, इसी तरह पेनलिस्ट संजय अग्रवाल जी सरकारी अधिकारी होने के साथ-साथ एक चिंतक, मार्गदर्शक प्रेरक वक्ता और साहित्यकार भी हैं। आपके प्रतिदिन के विचारों का संकलन 365 डिग्री के नाम से प्रकाशित किताब बहु चर्चित है और लोगों को एक दूसरे के समीप आने की प्रेरणा देती है । सागर से पधारी वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका व शिव पुराण विशेषज्ञ बीके नीलम ने पैनल सत्र का संचालन किया तथा राजयोग प्रशिक्षक बी के आकृति ने कार्यक्रम के अंत में आकर आभार प्रदर्शन किया। इससे पूर्व साकेत नगर प्रभारी बीके अंजू ने गाइडेड मेडिटेशन कमेंट्री के माध्यम से चेतना के मूल गुणों का अनुभव कराया । लगभग 125 लोगों ने कार्यक्रम का लाभ लिया।


