अध्यात्ममध्य प्रदेश

श्रावण में बाबा महाकाल के दर्शन का नया सिस्टम, चार गेट-अलग लाइन, कावड़ियों के लिए खास दिन

धर्मधानी उज्जैन में 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाले श्रावण मास में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान महाकाल दर्शन के दर्शन करने पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की संभावित संख्या को देखते हुए शासन, प्रशासन और मंदिर समितियों ने दर्शन व्यवस्था को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं को चार प्रवेश द्वारों से प्रवेश दिया जाएगा।

सामान्य दर्शन प्रवेश व्यवस्था
सामान्य दर्शन व्यवस्था श्रावण-भादौ मास में त्रिवेणी संग्रहालय के समीप से नन्दी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेन्टर-1, टनल मन्दिर परिसर, कार्तिक मण्डपम, गणेश मण्डपम से भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन दर्शनार्थी करेंगे। साथ ही नीलकंठ प्रवेश द्वार की ओर से आने वाले श्रद्धालु मानसरोवर भवन में प्रवेश कर फेसिलिटी सेन्टर-1 एवं टनल मन्दिर परिसर, कार्तिक मण्डपम, गणेश मण्डपम से दर्शन उपरांत (निर्माल्य द्वार) अथवा नवीन आपातकालीन निर्गम द्वार से सीधे बाहर के लिए प्रस्थान करेंगे। श्रद्धालुओं हेतु जल अर्पण की व्यवस्था श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप व कार्तिकेय मंडपम में जलपात्र के माध्यम से रहेगी।
शीघ्र दर्शन प्रवेश व्यवस्था गेट नंबर 1 एवं 5 से रहेगी
शीघ्र दर्शन व्यवस्था 1 – हरसिद्धि चौराहा से बैरिकेड के रास्ते – द्वार नंबर 5 – विश्रामधाम – सभा मण्डपम् – गणेश मण्डपम् से भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन करने के उपरांत निर्गम द्वार से सीधे बाहर की ओर प्रस्थान करेंगे। शीघ्र दर्शन व्यवस्था 2 – द्वार नंबर 01 विश्रामधाम – सभा मण्डपम् – गणेश मण्डपम् से भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन करने के उपरांत निर्गम द्वार से सीधे बाहर की ओर प्रस्थान करेंगे।कावड़ यात्रियों की व्यवस्था
श्रावण-भादौ मास के दौरान अत्यधिक संख्या में कावड़ यात्रियों का आगमन होना निर्धारित रहता है। उक्त आगंतुक कावड़ यात्रियों की जल अर्पण की व्यवस्था के लिए सप्ताह में 04 दिवस मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार की गई है। कावड़ यात्री दल को द्वार नंबर 01 एवं हरसिद्धि – चौराहा स्थित विशेष दर्शन मार्ग से प्रवेश दिया जाएगा। शनिवार, रविवार तथा सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या अत्यधिक होने के फलस्वरूप किसी भी कावड़ दल को अनुमति जारी नहीं की जाएगी।

दर्शनार्थियों के जूता स्टैंड की व्यवस्था
• त्रिवेणी संग्रहालय के बाहर जूता स्टैंड
• श्री महाकाल महालोक प्लाजा के पास जूता स्टैंड
• विक्रम टीला के समीप जूता स्टैंड
• द्वार नंबर 01 पर जूता स्टैंड
• हरसिद्धि चौराहा के सम्मुख जूता स्टैंड
• मानसरोवर भवन के सम्मुख जूता स्टैंड
• नीलकण्ठ प्रेवश द्वार जूता स्टैंड

पार्किंग की व्यवस्था
• श्री महाकालेश्वर अन्नक्षैत्र के समीप वाला रिक्त स्थान
• मेघदूत वन पार्किंग
• निलकंठ पार्किंग
• चारधाम पार्किंग
• कर्कराज पार्किंग
• कार्तिक मेला ग्राउण्ड पार्किंग

कालभैरव में रहेगी यह व्यवस्था
महाकाल के साथ कालभैरव में भी विशेष व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी, ताकि श्रद्धालुओं को कम समय में सहज दर्शन का लाभ मिल सके। याद रहे कि ज्योतिर्लिंग महाकाल के बाद कालभैरव मंदिर में भक्तों की सबसे अधिक संख्या रहती है। नई व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए कालभैरव मंदिर की प्रशासक संध्या मार्कण्डेय ने बताया कि मंदिर में द्वारों की संख्या सीमित होने के कारण सुगम दर्शन व्यवस्था व भीड़ नियंत्रण में भी खासी परेशानी आती है। बारिश से बचाव के लिए शेड आदि का इंतजाम भी नहीं है। भीड़ को डायवर्ट करने के लिए सामान्य, सशुल्क तथा प्रोटोकाल के तहत आने वाले वीआईपी भक्तों के लिए अलग-अलग कतार में प्रवेश की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। अत्यधिक भीड़ होने पर प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था को भी परिवर्तन शील किया जा सकता है।

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