राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के विद्यार्थियों ने वरिष्ठ रंगकर्मी , एक्टर, लेखक श्री विनोद जयवंत से सीखे रंगमंच और सिनेमा के व्यावहारिक आयाम।

भोपाल, 28 जुलाई 2026। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए आयोजित आठ दिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला का चौथा दिन अत्यंत प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक रहा। कार्यशाला में भारत के विभिन्न राज्यों—मणिपुर, त्रिपुरा, असम, मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य भागों से आए विद्यार्थियों के साथ-साथ नेपाल एवं बांग्लादेश से आए कुल 32 विद्यार्थी सहभागिता कर रहे हैं। यह विद्यार्थी भारत के विभिन्न प्रांतो से मणिपुर असम छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश त्रिपुरा एवं साथी पड़ोसी राज्य नेपाल एवं बांग्लादेश के बच्चे भी इसमें शामिल है यह कार्यशाला विद्यार्थियों को भारतीय लोक, जनजातीय एवं ग्रामीण संस्कृति के विविध आयामों से जोड़ने के साथ-साथ रंगमंच की व्यावहारिक समझ विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रही है।
कार्यशाला के चौथे दिन प्रख्यात रंगकर्मी, लेखक एवं अनेक चर्चित फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय से पहचान बनाने वाले श्री विनोद जयवंत ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने रंगमंच और सिनेमा के संबंधों, अभिनय की बारीकियों, कलाकार के व्यक्तित्व निर्माण तथा व्यावहारिक जीवन में थिएटर की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।
श्री जयवंत ने अपने लंबे रंगमंचीय एवं फिल्मी अनुभवों को विद्यार्थियों के साथ साझा करते हुए बताया कि एक सशक्त अभिनेता बनने के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन, संवेदनशीलता और जीवन के विविध अनुभवों को आत्मसात करना आवश्यक है। उन्होंने थिएटर और फिल्मों के बीच के अंतर तथा दोनों माध्यमों में अभिनय की तकनीकों को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। साथ ही फिल्म जगत में संघर्ष, धैर्य, समर्पण और सतत सीखने की आवश्यकता पर भी उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला।
व्याख्यान के उपरांत विद्यार्थियों ने अभिनय, चरित्र निर्माण, मंच अनुशासन, पटकथा की समझ, कैमरे के सामने अभिनय, ऑडिशन प्रक्रिया तथा रंगमंच से फिल्मों तक की यात्रा से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। श्री विनोद जयवंत ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का आत्मीयता एवं विस्तार से उत्तर देते हुए उन्हें अपने अनुभवों से सीखने और निरंतर अभ्यास करते रहने के लिए प्रेरित किया। यह संवादात्मक सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह आठ दिवसीय कार्यशाला विद्यार्थियों को संग्रहालय की मुक्ताकाश एवं स्थायी प्रदर्शनियों, विभिन्न पारंपरिक आवास प्रतिरूपों, जनजातीय एवं लोक सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ विषय विशेषज्ञों, वरिष्ठ रंगकर्मियों एवं कला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों के व्याख्यानों से समृद्ध कर रही है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी भीमबेटका, साँची, भोपाल के प्रमुख संग्रहालयों तथा सांस्कृतिक संस्थानों का भ्रमण कर भारतीय कला, संस्कृति और रंगपरंपरा को निकट से समझने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं।
संग्रहालय के जन सम्पर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया -कार्यशाला का उद्देश्य युवा रंगकर्मियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत, लोक एवं जनजातीय जीवन-दर्शन तथा रंगमंच की विविध परंपराओं से जोड़ते हुए उनके रचनात्मक दृष्टिकोण का विस्तार करना है, ताकि वे भविष्य में भारतीय रंगमंच, सिनेमा जगत में अपनी पहचान बना सकें






