गौ सम्मान आज के युग की आवश्यकता है।
राष्ट्रव्यापी गौ सम्मान अभियान के अंतर्गत पूरे देश के साथ गायत्री शक्तिपीठ एम पी नगर पर भी वह गौ संवर्धन, सम्मान समारोह आयोजित हुआ । जिसमें 10 गौ सेवकों के सम्मान के साथ गौ सम्मान के लिए किए जाने वाले उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।
वृंदावन गौशाला कोलार रोड की संचालिका श्रीमति मीता नायक दीदी ने उपस्थित स्कूली बच्चों को खाने पीने की वस्तु पाली पॉलिथीन में नहीं फेकना, जहां गाय हों वहां वाहन धीरे चलने, घर के सभी शुभ कार्यों में गौ माता को शामिल करने का संकल्प दिलाया।
गायत्री शक्तिपीठ भोपाल पर भोपाल उज्जैन के समन्वयक आर पी हाजरी ने ऋग्वेद के मंत्र का उदाहरण देते हुए गौ माता की महत्ता बताते हुए कहा कि-
*माता रुद्राणां दुहिता वसूनां
स्वसा आदित्यानाममृतस्य नाभिः*।
*प्र नु वोचं चिकितुषे जनाय
मा गामनागामदितिं वधिष्ट*॥
माता रुद्राणाम् — वह रुद्रों की माता है।
दुहिता वसूनाम् — वसुओं की पुत्री है।
स्वसा आदित्यानाम् — आदित्यों की बहन है।इस प्रकार सभी 33 कोटि देवता गाय में समाए हुए हैं।
अमृतस्य नाभिः — अमृत (अमरत्व) का केंद्र या आधार है।
प्र नु वोचं चिकितुषे जनाय — मैं इस ज्ञान को समझदार मनुष्यों के लिए कहता हूँ।
मा गाम् अनागाम् अदितिं वधिष्ट — इस निष्पाप गौरूपा अदिति (या गौ) का वध मत करो।
आपने बताया कि सभी धर्म सम्प्रदायों में गाय को सम्मान दिया गया है।
कुरान शरीफ में गोरक्षा के उपदेश – अकरमुल बकर फाइनाहा सैयदूल बहाइसा अर्थात गायक की इज्जत करो क्योंकि वह चौपायों का सरदार है। गाय का दूध ,घी और मक्खन शिफा (अमृत) है ।गोश्त बीमारियों का कारण है।
श्री हजारी जी ने बताया कि परम पूज्य गुरुदेव ने इस मंत्र की व्याख्या में गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि दिव्य मातृशक्ति का प्रतीक माना है।
उनके अनुसार—
“माता रुद्राणाम्” — गाय या मातृशक्ति वह है जिससे शक्ति, साहस और जीवन का पोषण होता है।
“दुहिता वसूनाम्” — वह प्रकृति के समस्त वैभव (वसु) से जुड़ी हुई है।
“स्वसा आदित्यानाम्” — वह प्रकाश, ज्ञान और दिव्यता की सहचरी है।
“अमृतस्य नाभिः” — वह अमृतमय जीवन और संस्कृति का केंद्र है।
देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव प्रचार प्रसार सेवक ने इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को गौ सम्मान के उपाय बताते हुए बताया कि गौशाला के उत्पाद मंजन ,साबुन ,शैंपू,फिनायल,गौ मूत्र अर्क आदि का दैनिक जीवन में उपयोग कर आप गौ संवर्धन का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
जिला समन्वयक श्री रमेश नागर ने कार्यक्रम में उपस्थिति और सफल बनाने के लिए सभी गणमान्य और परिजनों का आभार व्यक्त किया।

