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अपहरण, दरिंदी और कत्ल: पहले ही बंद कर लिया फोन, रोंगटे खड़े करती साजिश, दर्द और दरिंदगी की 44 घंटे की कहानी
गोरखपुर जिला अस्पताल से अगवा मासूम के साथ दरिंदगी के बाद हुई हत्या की जांच अब उसके आखिरी 44 घंटों की पूरी कहानी सामने ला रही है। अस्पताल में पानी लेने निकली बच्ची की आरोपी सिपाही से पहली मुलाकात से लेकर शहर के सात चौराहों के सीसीटीवी फुटेज तक। मोबाइल की डिजिटल ट्रेल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक, पुलिस ने घटनाक्रम की ऐसी टाइमलाइन तैयार की है जिसमें हर पड़ाव वारदात की एक नई परत खोलता है।
यह दर्दनाक सफर जिला अस्पताल से शुरू होकर चिउटहा श्मशान घाट पर मासूम का शव मिलने और कुछ घंटों बाद उसके अंतिम संस्कार के साथ समाप्त हुआ। जांच के अनुसार, मंगलवार रात करीब 9:30 बजे बच्ची जिला अस्पताल परिसर में अपनी बहन के लिए पानी लेने गई थी
इसी दौरान उसकी मुलाकात आरोपी सिपाही से हुई। पुलिस का अनुमान है कि रात 10:02 बजे के आसपास अपहरण और वारदात की शुरुआत हुई। इसके बाद आरोपी बच्ची को बाइक पर बैठाकर अस्पताल से निकल गया। जांच में सबसे अहम भूमिका सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निभा रहे हैं।
सदर अस्पताल से लेकर शास्त्री चौक, कचहरी, टाउनहॉल, खूनीपुर, लालडिग्गी और डोमिनगढ़ महेशरापुर तक लगे कैमरों में आरोपी की बाइक लगातार कैद हुई। हर फुटेज में बच्ची आरोपी के पीछे बैठी दिखाई देती है। रात 11:07 बजे डोमिनगढ़ महेशरापुर पुल के पास वह आखिरी बार जीवित नजर आई।
इसके बाद उसकी कोई तस्वीर किसी कैमरे में दर्ज नहीं हुई। फुटेज से यह भी सामने आया है कि आरोपी अस्पताल से निकलने के बाद मोहरीपुर, बरगदवा, लच्छीपुर, 10 नंबर बोरिंग, गोरखनाथ ओवरब्रिज और धर्मशाला होते हुए पुलिस लाइंस स्थित आवास तक पहुंचा। जांच अधिकारियों के अनुसार, जाते समय वह पूरी तरह सामान्य दिखाई देता है जबकि लौटते समय उसकी बाइक की रफ्तार काफी तेज थी।
मासूम से दरिंदगी और हत्या ने शहर को झकझोरा
गोरखपुर में मासूम के अपहरण के बाद दुष्कर्म और निर्मम हत्या की वारदात ने पूरे शहर को झकझोर दिया। शुक्रवार को जिला अस्पताल से लेकर कचहरी और श्मशान घाट तक गम, गुस्सा और तनाव का माहौल बना रहा। हर चेहरे पर दर्द था तो हर जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर मासूम का कसूर क्या था। पुलिस के खिलाफ भी लोगों का आक्रोश साफ नजर आया। कई लोग यह कहते दिखे कि बच्ची ने सुरक्षा के लिए खाकी पर भरोसा किया था लेकिन बदले में उसे विश्वासघात मिला।जिला अस्पताल परिसर में सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी।
गोरखपुर में मासूम के अपहरण के बाद दुष्कर्म और निर्मम हत्या की वारदात ने पूरे शहर को झकझोर दिया। शुक्रवार को जिला अस्पताल से लेकर कचहरी और श्मशान घाट तक गम, गुस्सा और तनाव का माहौल बना रहा। हर चेहरे पर दर्द था तो हर जुबान पर एक ही सवाल था कि आखिर मासूम का कसूर क्या था। पुलिस के खिलाफ भी लोगों का आक्रोश साफ नजर आया। कई लोग यह कहते दिखे कि बच्ची ने सुरक्षा के लिए खाकी पर भरोसा किया था लेकिन बदले में उसे विश्वासघात मिला।जिला अस्पताल परिसर में सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी।
पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मौजूद महिलाओं की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कई मांएं अपने बच्चों को सीने से चिपकाए खड़ी थीं। उनका कहना था कि अब बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर लगने लगा है। हर मां के मन में यही चिंता थी कि कहीं उनके बच्चे भी किसी दरिंदे का शिकार न बन जाएं।जैसे ही आरोपी को पुलिस सुरक्षा में अस्पताल लाया गया, माहौल अचानक गर्म हो गया। अस्पताल कर्मी, स्थानीय लोग और सामाजिक संगठनों के सदस्य मुख्य गेट पर एकत्र हो गए।
लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। भीड़ आरोपी को अपने हवाले करने की मांग करने लगी। कई लोगों ने आरोपी को मृत्युदंड देने की मांग उठाई तो कुछ ने कहा कि ऐसे अपराधियों को सार्वजनिक रूप से कठोर सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी वारदात करने का साहस न कर सके। स्थिति बिगड़ती देख एसपी सिटी और सीओ कैंट ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाया। पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद काफी मशक्कत के बाद भीड़ शांत हुई।
इसके बावजूद पूरे परिसर में देर तक तनाव बना रहा। उधर, कचहरी परिसर में भी अधिवक्ताओं, व्यापारियों और आम लोगों के बीच घटना को लेकर गुस्सा दिखाई दिया। हर तरफ आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठती रही। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोगों में यही चर्चा रही कि मासूम को जल्द न्याय मिलना चाहिए।
अंतिम संस्कार के दौरान घरवालों का गुस्सा फूटा
पोस्टमार्टम के बाद शाम को बालिका का शव राजघाट स्थित राप्ती तट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचा। इस दौरान परिजन ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और हंगामा किया। अधिकारियों के समझाने के बाद अंतिम संस्कार कराया गया।
पोस्टमार्टम के बाद शाम को बालिका का शव राजघाट स्थित राप्ती तट पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचा। इस दौरान परिजन ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और हंगामा किया। अधिकारियों के समझाने के बाद अंतिम संस्कार कराया गया।
वारदात से पहले ही बंद कर दिया मोबाइल, जांच में मिली सोची-समझी साजिश की कड़ी
डिजिटल जांच में सामने आया है कि आरोपी सिपाही अभिषेक यादव ने वारदात से ठीक पहले रात नौ बजे अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था। बुधवार सुबह छह बजे उसने फोन दोबारा ऑन किया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन विश्लेषण में मोबाइल की अंतिम सक्रिय लोकेशन जिला अस्पताल के आसपास मिली। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
डिजिटल जांच में सामने आया है कि आरोपी सिपाही अभिषेक यादव ने वारदात से ठीक पहले रात नौ बजे अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था। बुधवार सुबह छह बजे उसने फोन दोबारा ऑन किया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन विश्लेषण में मोबाइल की अंतिम सक्रिय लोकेशन जिला अस्पताल के आसपास मिली। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि वारदात से पहले मोबाइल बंद करना इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य छिपाने और पुलिस की निगरानी से बचने की सुनियोजित कोशिश की ओर इशारा करता है, जिसे विवेचना का अहम आधार बनाया गया है।
कंट्रोल रूम सक्रिय रहा स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में हुई देरी
मंगलवार रात 12:52 बजे बच्ची के पिता ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। महज 10 मिनट के भीतर पुलिस सक्रिय हो गई और रात 1:03 बजे कंट्रोल रूम की टीम जिला अस्पताल पहुंच गई। इसके बावजूद स्थानीय चौकी पुलिस बुधवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे मौके पर पहुंची जबकि लगभग आधे घंटे बाद कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की। एफआईआर बुधवार दोपहर 2:02 बजे दर्ज की गई। शुरुआती स्तर पर हुई इस देरी को भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।
मंगलवार रात 12:52 बजे बच्ची के पिता ने कंट्रोल रूम को सूचना दी। महज 10 मिनट के भीतर पुलिस सक्रिय हो गई और रात 1:03 बजे कंट्रोल रूम की टीम जिला अस्पताल पहुंच गई। इसके बावजूद स्थानीय चौकी पुलिस बुधवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे मौके पर पहुंची जबकि लगभग आधे घंटे बाद कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की। एफआईआर बुधवार दोपहर 2:02 बजे दर्ज की गई। शुरुआती स्तर पर हुई इस देरी को भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।
उधर, अपहरण के करीब 36 घंटे बाद बृहस्पतिवार सुबह 6:30 बजे चिउटहा श्मशान घाट के पास बच्ची का शव बरामद हुआ। सुबह 7:30 बजे शव को जिला अस्पताल लाया गया। दोपहर 2:30 बजे पोस्टमार्टम किया गया और शाम 5:45 बजे भारी गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
चार्जशीट की तैयारी में जुटी पुलिस
सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया कि अब अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए पुलिस केस डायरी तैयार कर रही हैं। चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की डिजिटल ट्रेल, घटनास्थल से मिले फोरेंसिक साक्ष्य, बरामदगी मेमो और गवाहों के बयान को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। डीएनए और अन्य वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद विवेचना को अंतिम रूप दिया जाएगा। अदालत में साक्ष्यों की कड़ी मजबूत बनाने के लिए केवल महत्वपूर्ण गवाहों को ही शामिल किया जाएगा।
सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया कि अब अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए पुलिस केस डायरी तैयार कर रही हैं। चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की डिजिटल ट्रेल, घटनास्थल से मिले फोरेंसिक साक्ष्य, बरामदगी मेमो और गवाहों के बयान को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। डीएनए और अन्य वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद विवेचना को अंतिम रूप दिया जाएगा। अदालत में साक्ष्यों की कड़ी मजबूत बनाने के लिए केवल महत्वपूर्ण गवाहों को ही शामिल किया जाएगा।
लापरवाही पर गिरी गाज, कोतवाली इंस्पेक्टर लाइनहाजिर, चौकी प्रभारी निलंबित
गोरखपुर जिला अस्पताल से अपहृत मासूम से दरिदंगी के बाद हत्या के मामले में पुलिस महकमे ने लापरवाही पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने शुक्रवार को कोतवाली प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइनहाजिर कर दिया। वहीं नगर निगम चौकी प्रभारी महिला दरोगा दीपशिखा को कर्तव्यों के प्रति घोर उदासीनता, लापरवाही और स्वेच्छाचारिता पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है।
गोरखपुर जिला अस्पताल से अपहृत मासूम से दरिदंगी के बाद हत्या के मामले में पुलिस महकमे ने लापरवाही पर कार्रवाई शुरू कर दी है। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने शुक्रवार को कोतवाली प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से लाइनहाजिर कर दिया। वहीं नगर निगम चौकी प्रभारी महिला दरोगा दीपशिखा को कर्तव्यों के प्रति घोर उदासीनता, लापरवाही और स्वेच्छाचारिता पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया कि दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच में घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस की सक्रियता, कार्रवाई की प्रक्रिया और जिम्मेदारी निभाने में हुई चूक की समीक्षा की जाएगी। मासूम के लापता होने के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर परिजनों ने सवाल उठाए थे। घटनाक्रम की समीक्षा के बाद एसएसपी ने जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की।
अधिकारियों के अनुसार, विवेचना के साथ ही पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। उधर, पुलिस की जांच वारदात से जुड़े साक्ष्यों पर केंद्रित है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
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