बीवीजी इंडिया को इंदौर के मल्टीमॉडल बस टर्मिनल के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी मिली
इंदौर जिले के कुमेड़ी स्थित इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) में बस, मेट्रो और रेलवे कनेक्टिविटी एक साथ मिलेगी। बीवीजी इंडिया (BVG India) की दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव रियायत के तहत यह टर्मिनल हर दिन 50,000 से ज़्यादा यात्रियों को सेवा देगा।

इंदौर, 5 अगस्त 2026: देश में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में हो रहे बदलाव को आगे बढ़ाते हुए बीवीजी इंडिया लिमिटेड को मध्य प्रदेश के एकीकृत (Integrated) बस टर्मिनलों में शामिल इंदौर के कुमेड़ी स्थित इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) के लीज के साथ संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
करीब 5.85 हेक्टेयर (14.46 एकड़) में फैले आईएसबीटी कुमेड़ी में 1,500 से अधिक बसों के संचालन और प्रतिदिन लगभग 50,000 से 55,000 यात्रियों एवं आगंतुकों को संभालने की क्षमता है। यह टर्मिनल मध्य प्रदेश को गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और पड़ोसी राज्यों से जोड़ने वाला एक अहम प्रवेश द्वार (Gateway) होगा।
एयरपोर्ट स्तर के मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में तैयार किए गए आईएसबीटी कुमेड़ी में बस, मेट्रो और रेलवे कनेक्टिविटी का सहज (Seamless) एकीकरण किया गया है। समर्पित फुट ओवर ब्रिज (FOB) के जरिए इसका सीधा संपर्क मेट्रो स्टेशन से होगा, जिससे मेट्रो से बस तक सफर करना आसान होगा, यात्रियों को ज्यादा सहूलियत मिलेगी और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस दीर्घकालिक रियायत के तहत बीवीजी इंडिया पूरे टर्मिनल इकोसिस्टम का एंड-टू-एंड संचालन, रखरखाव और एकीकृत प्रबंधन करेगी। पारंपरिक सुविधा प्रबंधन से आगे बढ़ते हुए कंपनी इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, यात्री सेवाओं, व्यावसायिक सुविधाओं यूटिलिटीज, पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन, सुरक्षा (Safety), सिक्योरिटी और डिजिटल संचालन की जिम्मेदारी भी व्यापक एकीकृत सुविधा प्रबंधन मॉडल के तहत निभाएगी।
यात्रियों का अनुभव संचालन की पूरी कार्यप्रणाली का सबसे अहम हिस्सा रहेगा। टर्मिनल में मशीनीकृत सफाई व्यवस्था के जरिए साफ-सफाई के उच्च मानक बनाए रखे जाएंगे। वहीं, प्रिवेंटिव और प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस के जरिए बिजली व्यवस्था, एचवीएसी, जलापूर्ति, लिफ्ट, सीवेज ट्रीटमेंट और अन्य यूटिलिटी सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का भरोसेमंद संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।
टेक्नोलॉजी की मदद से इस टर्मिनल को स्मार्ट मोबिलिटी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। एसेट मैनेजमेंट, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, ऑटोमेटेड पार्किंग, डिजिटल पेमेंट, सीसीटीवी निगरानी, सार्वजनिक सूचना प्रणाली, शिकायत प्रबंधन और रियल-टाइम ऑपरेशनल डैशबोर्ड जैसे एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बेहतर, पारदर्शी और डेटा आधारित प्रबंधन को बढ़ावा देंगे और साथ ही साथ यात्रियों की सुविधा भी बढ़ाएंगे।
टर्मिनल के संचालन में स्थिरता को भी खास तवज्जो दी जाएगी। सौर ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा-कुशल प्रणालियां, सीवेज जल का पुनर्चक्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जैविक कचरा प्रसंस्करण, जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल लैंडस्केपिंग जैसी पहलें इसे अधिक स्वच्छ, हरित (Greener) और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल वाला परिवहन केंद्र (Transport Hub) बनाने में मदद करेंगी। ये पहलें भारत के व्यापक स्थिरता एजेंडा के अनुरूप हैं और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर बढ़ते ज़ोर को भी मजबूत करती हैं।
परिवहन सुविधा से आगे बढ़कर आईएसबीटी कुमेड़ी को एक सार्वजनिक गंतव्य के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। लगभग 30,000 वर्ग फुट के रिटेल और व्यावसायिक क्षेत्र में दुकानें, रेस्तरां, फूड कोर्ट, दफ्तर और यात्रियों के लिए कई सुविधाएं होंगी। इससे यह टर्मिनल केवल यात्रा का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि एक व्यावसायिक इकोसिस्टम के रूप में भी उभरेगा, जिससे कारोबार के नए मौके बनेंगे और यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
बड़े पैमाने पर सार्वजनिक आवाजाही (Public Mobility) की बढ़ती अहमियत को देखते हुए बीवीजी की संचालन रणनीति इस तरह तैयार की गई है कि वह भविष्य में सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भी सुचारू रूप से काम कर सके। उस समय इंदौर और आसपास के इलाकों में यात्रियों की संख्या में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। हमारा मानना है कि ज़रूरत के मुताबिक कर्मचारियों की तैनाती, एकीकृत भीड़ प्रबंधन, बेहतर सफाई व्यवस्था और मेट्रो व रेलवे अधिकारियों के साथ करीबी तालमेल के जरिए टर्मिनल ऐसे मौकों पर कहीं ज़्यादा यात्रियों को आसानी से संभाल सकेगा।
इस मौके पर बीवीजी इंडिया लिमिटेड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रूपल सिन्हा ने कहा, “भारत में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में बुनियादी बदलाव हो रहा है। बस टर्मिनल अब सिर्फ़ यात्रियों के आने-जाने की जगह नहीं रहे, बल्कि वे एकीकृत मोबिलिटी इकोसिस्टम बनते जा रहे हैं, जो यह तय करते हैं कि लोग अपने शहर का अनुभव किस तरह करते हैं। बीवीजी में हमारा विज़न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन करना नहीं है। हमारा मकसद बुद्धिमान (Intelligent), टिकाऊ और यात्री-केंद्रित सार्वजनिक स्थान तैयार करना है, जो शहरी परिवहन को बेहतर बनाए और भारत को अधिक स्मार्ट तथा बेहतर तरीके से जुड़े शहरों की दिशा में आगे ले जाए। आईएसबीटी कुमेड़ी इसी सोच का प्रतीक है और हमें मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का एक आदर्श मॉडल विकसित करने में साझेदार बनने पर फ़ख्र है।”
एयरपोर्ट, स्वास्थ्य संस्थानों, औद्योगिक परिसरों, परिवहन नेटवर्क और शहरी परिसंपत्तियों जैसे बड़े और जटिल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के संचालन का व्यापक अनुभव रखने वाली बीवीजी इंडिया अपनी बहु-विषयक विशेषज्ञता का इस्तेमाल करते हुए आईएसबीटी कुमेड़ी को परिचालन उत्कृष्टता, स्थिरता और बेहतरीन यात्री अनुभव का एक आदर्श मॉडल बनाएगी।
यह परियोजना केवल एक बस टर्मिनल के प्रबंधन तक सीमित नहीं है। यह भारत के एकीकृत, टेक्नोलॉजी आधारित और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन सिस्टम की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक है, जहां किसी इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता सिर्फ़ उसके निर्माण से नहीं, बल्कि इस बात से आंकी जाती है कि वह हर दिन नागरिकों की कितनी कुशलता से सेवा करता है। इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, डिजिटल इनोवेशन और ग्राहक-केंद्रित संचालन को साथ लाकर बीवीजी इंडिया एक ऐसा मल्टीमॉडल मोबिलिटी हब विकसित करना चाहती है, जो भविष्य के सार्वजनिक परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे।
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“बीवीजी इंडिया लिमिटेड आवश्यक मंजूरियां मिलने, बाज़ार की परिस्थितियों और अन्य जरूरी पहलुओं के अधीन अपने इक्विटी शेयरों का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने का प्रस्ताव रखती है। इसके लिए कंपनी ने 30 सितंबर 2025 की तारीख वाला ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( SEBI) के पास दाखिल किया है। डीआरएचपी कंपनी की वेबसाइट [www.bvgindia.com](http://www.bvgindia.com), सेबी की वेबसाइट [www.sebi.gov.in](http://www.sebi.gov.in), बुक रनिंग लीड मैनेजर्स आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड, जेएम फाइनेंशियल लिमिटेड और मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स लिमिटेड की वेबसाइटों तथा स्टॉक एक्सचेंज एनएसई (NSE) और बीएसई (BSE) की वेबसाइटों पर उपलब्ध है। संभावित निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि इक्विटी शेयरों में निवेश करना काफ़ी जोखिम भरा हो सकता है। इससे जुड़े जोखिमों की विस्तृत जानकारी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस उपलब्ध होने पर उसके ‘रिस्क फैक्टर्स’ सेक्शन में देखी जा सकती है। संभावित निवेशकों को निवेश का कोई भी फ़ैसला केवल डीआरएचपी के आधार पर नहीं लेना चाहिए।”



