खबरसंपादकीय

भक्ति और श्रृंगार रस की कविताओं ने बांधा समां

अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा काव्य चौपाल की मासिक गोष्टी दिनांक 12 सितंबर 2026 को प्रीत एक्या फाउंडेशन महाकाली सोसाइटी में आयोजित की गई।
गोष्ठी में शहर की कवयित्रियों ने भक्ति और श्रृंगार रस की कविताओं से माहौल को रसमय बनाया ।
वरिष्ठ कवयित्री जया आर्य ने जहां एक ओर अपनी कविता
नहीं हूं अब मैं साथ तुम्हारे शायद सदा तुम्हारी बनकर,
पर रहूं मैं आगे पीछे
मत करना आजाद मुझे।
सुना कर तालियां बटोरी वहीं
नीता श्रीवास्तव ने
रामायण का ज्ञान है
मर्यादा सियाराम हैं
जनक सुता और दशरथ नंदन
परम पूज्य भगवान हैं ।
डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ने
अंतर्मन की वेदना को
सहलाते हैं आंसू,
तड़पती आत्मा को
धीरज बंधाते हैं आंसू,
हौसलों को जन्म देते हैं आंसू,
पथ भी प्रशस्त करते हैं आंसू
वीर रस की कवयित्री, गीतकार डॉ.क्षमा पांडेय ने
अक्षर-अक्षर शब्द रचा है,
ज्यों भाषा संग भाव रमा ।
स रे ग म सुरताल सजा है,
उर चाबुक से थाम समा ।।
शब्द -शब्द से वाक्य बना है,
वाक्यों से है गीत बना l
गीतों की सुमधुर तानों से,
जीवन का संगीत बना ll
विनीता राहुरीकर ने
रखी है हथेली पर
यादों की वो कतरन
जब तपती धूप में हम
खड़े हो गए थे
गुलमोहर की छाँव में
गिरा था एक सुर्ख फूल
जमीन पर तभी
तुमने उठाकर
लगा दिया था बालों में
एक सुर्ख दहकता लम्हा
आज भी कानों के पास
धड़क रहा है…
संतोष श्रीवास्तव ने
मैं बांस के जंगलों का
वह बांस होना चाहती हूं
जिससे बनी थी
कृष्ण की बांसुरी।
मैं उस बांस की
कलम बनना चाहती हूं
और लिखना चाहती हूं
प्रेम की किताब
सरोज लता सोनी ने
कहते हैं -भगवान कृष्ण,
तुम सुन लो व्यथा हमारी ।
अपने को सच्चा भक्त कहाते,
पर बिगड़ी दशा हमारी।।
कनीज ने भजो रे मन गोविंदा नटवर नागर नंदा।
तथा जया केतकी ने स्त्री विमर्श की कविता सुना कर माहौल को विमर्श, श्रृंगार और भक्ति के रस से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन विनीता राहुरीकर ने किया।
प्रस्तुति
संतोष श्रीवास्तव

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