पहले डिजिटल भुगतान की आदत डाली, अब शुल्क से बढ़ेगी व्यापारियों की परेशानी
भोपाल। ₹2 हजार से अधिक के UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि सरकार और बैंकों ने पिछले कई वर्षों में व्यापारियों के साथ-साथ आम ग्राहकों को भी डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया है। आज छोटे से छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक UPI को अपनी रोजमर्रा की व्यापारिक व्यवस्था का हिस्सा बना चुके हैं। ऐसे में अब बड़े UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के सामने नई व्यवहारिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।
विवेक साहू ने कहा कि व्यापारी को यह शुल्क अपनी जेब से देना होगा, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इसका असर व्यापार की लागत पर पड़ेगा। खासकर किराना और अन्य कम मार्जिन वाले कारोबार में इसका प्रभाव अधिक महसूस होगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी ग्राहक द्वारा ₹5,000 का UPI भुगतान किया जाता है तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से व्यापारी पर ₹20, ₹10,000 के भुगतान पर ₹40 और ₹50,000 के भुगतान पर ₹200 का शुल्क आएगा। दिनभर में ऐसे कई डिजिटल लेनदेन होने पर महीने के अंत तक व्यापारी पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इसका दूसरा पहलू ग्राहक से भी जुड़ा है। यदि व्यापारी पर लगातार अतिरिक्त लागत आएगी तो कुछ व्यापारी बड़े डिजिटल भुगतान के बजाय ग्राहक से नकद भुगतान या भुगतान को अलग-अलग हिस्सों में करने का आग्रह कर सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान की सहजता, पारदर्शिता और लेनदेन की गति प्रभावित होने की आशंका है।
साहू ने कहा कि आज ग्राहक के पास जेब में नकदी न होने पर भी वह मोबाइल से तुरंत भुगतान कर सकता है। व्यापारी भी बिना छुट्टे पैसे की समस्या के भुगतान स्वीकार कर लेता है। UPI ने व्यापार को काफी सरल बनाया है। ऐसे में इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने से पहले छोटे व्यापारियों, ग्राहकों और व्यापारिक संगठनों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल भुगतान को और आसान एवं किफायती बनाना जरूरी है, न कि ऐसी व्यवस्था बनाना जिससे व्यापारी या ग्राहक डिजिटल भुगतान करने से पहले शुल्क के बारे में सोचने लगे। सरकार ने जब डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया था, तब व्यापारियों ने भी पूरी सकारात्मकता के साथ इसे अपनाया। अब आवश्यकता है कि उसी भावना को बनाए रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों को सुविधा मिलती रहे।
विवेक साहू ने सुझाव दिया कि यदि डिजिटल लेनदेन पर किसी प्रकार का शुल्क लागू करना आवश्यक समझा जाता है तो छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को इससे बाहर रखा जाए, कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए विशेष छूट दी जाए और ग्राहकों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े। साथ ही, किसी भी नए शुल्क को लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों से संवाद किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था के साथ हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो व्यापार को सरल बनाए, लागत न बढ़ाए और ग्राहक को भी परेशानी में न डाले।

