27% ओबीसी आरक्षण की बहाली को लेकर मुख्यमंत्री की ओबीसी प्रतिनिधियों के साथ बैठक
प्रभावी पैरवी और नए संवैधानिक समाधान की मांग

भोपाल, 16 अक्टूबर 2026। मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण से संबंधित माननीय उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधियों, आरक्षण प्रकरण के याचिकाकर्ताओं तथा ओबीसी अधिकारों के लिए संघर्षरत सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में आरक्षण की बहाली, प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य और आगे की कानूनी एवं नीतिगत कार्यवाही को लेकर चर्चा हुई। ओबीसी प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष मांग रखी कि प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण की बहाली के लिए केवल अपील दायर करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उच्च न्यायालय के निर्णय में उठाए गए विधिक एवं तथ्यात्मक प्रश्नों का समाधान करते हुए व्यापक और ठोस कार्यवाही की जाए।
बैठक में प्रमुख मांगें
1. सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी: उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती देने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं संविधान विशेषज्ञों का पैनल गठित कर मजबूत, तथ्य-आधारित अपील प्रस्तुत की जाए।
2. नया सर्वेक्षण एवं क्वांटिफाएबल डेटा: ओबीसी वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति तथा सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व का अद्यतन, वैज्ञानिक और तुलनात्मक सर्वेक्षण कराया जाए। इसके लिए विशेषज्ञ समिति अथवा सक्षम आयोग गठित किया जाए।
3. नया अध्यादेश एवं विधायी समाधान: सर्वेक्षण, विशेषज्ञों की अनुशंसाओं और आवश्यक संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर 27% ओबीसी आरक्षण के लिए नया अध्यादेश अथवा विधायी प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि न्यायालय द्वारा उठाई गई कमियों का समाधान किया जा सके।
4. 13% होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा: प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर तत्काल कार्यवाही की जाए तथा भर्ती प्रक्रियाओं में उनके हितों की रक्षा हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।
5. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से आवश्यक परामर्श: आरक्षण संबंधी प्रस्ताव तैयार करते समय संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श सुनिश्चित किया जाए।
6. ओबीसी महासभा ने यह सुझाव भी दिया कि 13% होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए, पूर्व में जारी भर्ती प्रक्रियाओं एवं उपलब्ध रिक्तियों की विधिक समीक्षा की जाए। यदि वर्तमान रिक्त पदों में उनका समायोजन संभव न हो, तो नियमों, रोस्टर एवं न्यायालय के आदेशों के अनुरूप अतिरिक्त अथवा सुपरन्यूमरेरी पद सृजित करने की संभावना पर विचार किया जाए, ताकि प्रभावित अभ्यर्थियों को समायोजित करने का विकल्प उपलब्ध हो सके।
ओबीसी महासभा का पक्ष
ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य लोकेंद्र गुर्जर ने कहा कि ओबीसी वर्ग 27% आरक्षण की बहाली के लिए न्यायिक एवं लोकतांत्रिक दोनों स्तरों पर संघर्ष कर रहा है। संगठन की मांग है कि सरकार इस विषय पर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करे और प्रभावित युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध निर्णय ले। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा ठोस संवैधानिक समाधान चाहिए जो न्यायिक परीक्षण में टिक सके और आरक्षण की बहाली का मार्ग प्रशस्त करे। ओबीसी महासभा ने कहा कि इस विषय पर सरकार की आगामी कार्यवाही और निर्णयों पर संगठन की नजर रहेगी। 27% ओबीसी आरक्षण की बहाली तथा प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी संघर्ष एवं चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा। “27% ओबीसी आरक्षण की बहाली के लिए प्रभावी पैरवी, अद्यतन आंकड़े और मजबूत संवैधानिक समाधान आवश्यक हैं।”



