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दिपके के आवास पर पहुंची दिल्ली पुलिस

पुलिस ने दिया नोटिस, कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू

नई दिल्लीः दिल्ली के सेंट्रल पार्क में शुक्रवार को तिरंगा फहराने से कुछ घंटे पहले ही पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके के घर पहुंच गई। दिल्ली पुलिस के जवान NCP-SCP के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास पर पहुंचे हैं, जहां दिपके रुके हुए हैं। अभिजीत दिपके ने आज कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘ लहरा दो तिरंगा ‘ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।असल में, दिल्ली पुलिस की एक टीम अभिजीत दिपके को नोटिस देने के लिए वहां पहुंची है। नोटिस में कहा गया है कि कनॉट प्लेस में धारा 163 लागू है और तिरंगा यात्रा के लिए NDMC से कोई अनुमति नहीं ली गई है; अगर वे फिर भी कनॉट प्लेस जाते हैं, तो यह धारा 163 का उल्लंघन होगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हिरासत में लिए जाने की जताई थी आशंका

दिपके ने पहले ही आशंका जताई थी कि मध्य दिल्ली में उनके संगठन के ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। CJP ने SIR अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। दिपके ने सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह के साथ मिलकर शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शित करने पर पुलिस द्वारा लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि चुनावी जवाबदेही की मांग करने वाले नागरिकों को सरकारी निगरानी और हिरासत का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

झंडेवालान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दिपके ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस मुझे कभी भी उठा सकती है। अगर इस देश में तिरंगा फहराने के लिए जेल जाना पड़े, तो हम इसके लिए तैयार हैं।’ उन्होंने बताया कि सीजेपी द्वारा 10 अक्टूबर को दिए गए विरोध प्रदर्शन के आह्वान के जवाब में सरकार ने पूरी दिल्ली को ठप कर दिया। बसें, मेट्रो, रेलवे और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और जगह-जगह बैरिकेड्स लगा दिए।

सेंट्रल पार्क को ही बंद करने का फैसला

अब 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने के लिए लहरा दो तिरंगा मार्च की घोषणा के बाद सरकार ने सेंट्रल पार्क को ही बंद करने का फैसला कर लिया है। यह अभियान महात्मा गांधी और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के आदर्शों पर आधारित है और सीजेपी शांतिपूर्ण तरीके से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हम शांति और अहिंसा में विश्वास करते हैं। हम गांधी और अहिंसा के अनुयायी हैं। हम तो बस जवाबदेही मांग रहे हैं।’

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