पहचान से हक तक, महिला किसानों ने साझा किये अपने विचार
महिला उद्यमियों में भूरी अहिरवार को प्रथम पुरस्कार, द्वितीय पुरस्कार सोनकच्छ की हीरामणि देवी को दिया गया

भोपाल। खेती में महिलाओं के योगदान को किसान के रूप में पहचान दिलाने, भूमि एवं संपत्ति पर उनके हक सुनिश्चित करने और कृषि से जुड़े निर्णयों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भोपाल में दो दिवसीय महिला किसान दिवस समोराह आयोजित हुआ। इस दो दिवसीय कार्यक्रम के साथ अलग-अलग स्तर पर जिलों और संस्थाओ ने कार्यक्रम किये है, आगे भी इस कड़ी से जुड़े और कार्यक्रम प्रस्तावित है।
महिला किसान दिवस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती गठबंधन (NCNF), मध्य प्रदेश सस्टेनेबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव एसोसिएशन (MPSDIA), महिला किसान अधिकार मंच (MAKAAM), मध्य प्रदेश एग्रोइकोलॉजी कोएलिशन और प्रदान द्वारा किया गया।
14 और 15 अक्टूबर को स्वर्ण जयंती ऑडिटोरियम, प्रशासन अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के 31 जिलों से लगभग 400 महिला किसानों ने भाग लिया। ‘हमारी पहचान, हम हैं किसान’ को केंद्र में रखते हुए आयोजन में महिलाओं ने खेती, उद्यमिता, सामूहिक संगठन, पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आजीविका के अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में महिला किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच, कृषि में तकनीक और प्रसंस्करण की भूमिका तथा महिलाओं के नेतृत्व को मजबूत करने पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने महिला किसानों की प्राथमिकताओं के आधार पर कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति व्यक्त की।
14 अक्टूबर को कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रदान की अर्चना सिंह द्वारा रखी गयी। इस अवसर पर अलग अलग जिलों से आयी महिला किसानों नेत्रियों ने अपनी सफलता की कहानियों को भी सबके सामने कहा। कार्यक्रम में माधुरी खड़से, महिला किसान अधिकार मंच (MAKAAM) ने महिला किसानों को संगठित करने के अनुभव साझा किए। पद्मश्री जनक पलटा मैकगिलिगन ने आदिवासी महिलाओं के कौशल विकास और टिकाऊ आजीविका के उदाहरण साझा किए।
कार्यक्रम में महिला किसानों के मुद्दों को राज्य स्तर पर उठाने के लिए साझा मंच की आवश्यकता पर चर्चा हुई। इसमें महिलाओं की आय, उद्यमिता, महिला किसान संगठनों को सहयोग और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। भूमि एवं संपत्ति पर महिलाओं के हक़ और सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच प्रमुख प्राथमिकताएं रहीं। साथ ही, डिजिटल साक्षरता, तकनीकी जानकारी और संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत बताई गई। राज्यस्तरीय मंच के माध्यम से महिला किसानों की मांगों को संबंधित विभागों और नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने पर विचार किया गया।
15 अक्टूबर को ‘महिला किसान भागीदारी से पहचान, पहचान से आर्थिक सशक्तीकरण तक’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दीपिका अग्रहार मुरुगकर,डॉ. मनोज जैन – प्रिंसिपल एडवाईजर एण्ड हेड AIGGPA Bhopal , श्वेता लांबा – सीनियर प्रोग्राम मैनेजर, WRI, नेहा चतुर्वेदी – सीओओ समर्थन, चिंतन मेघवंशी, डायरेक्टर चेंज मेंकर चैरिटेबल फाउंडेशन, कमल जायसवाल – स्टेट प्रोग्राम मेनेजर रिलायंस फाउंडेशन, ने भाग लिया। चर्चा का संचालन प्रतिभा श्रीवास्तव ने किया। इसमें महिला किसानों की आर्थिक स्वतंत्रता, खेती की आय पर निर्णय लेने के अधिकार तथा ग्रेडिंग, आधुनिक मशीनों और प्रशिक्षण के जरिए आय व पोषण बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं नरेश बहल उप निदेशक राज्य सांख्यिकी आयोग ने महिला किसानों के आत्मविश्वास और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग की सराहना करते हुए उनके लिए बुनियादी सुविधाओं, सरकारी सहयोग और अपनी समस्याएं रखने के अवसर सुनिश्चित करने की बात कही।
मनोज सिंह, उप आयुक्त, विकसित भारत जी राम जी (VB-G RAM G) योजना, मध्य प्रदेश, सौरभ कुमार सुमन, आयुक्त, उद्यानिकी विभाग, मध्य प्रदेश शासन डॉ. सुमन प्रसाद कृषि कल्याण विभाग भोपाल जितेंद्र परिहार, मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मनीष सिंह पवार ने महिला किसान दिवस पर चर्चा करते हुए अलग अलग योजनाओ की जानकारी महिला किसान को दी।
कार्यक्रम के दौरान ‘हम हैं किसान, हमारी कहानी हमारी जुबानी’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। पुस्तक महिला किसानों के संघर्ष, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों पर केंद्रित है। इसके साथ ही महिला किसानो की कहानी साँझा करने के लिए ‘’हम है किसान”सोशल मीडिया प्लेटफोर्म शुरू किया गया।
कार्यक्रम में ग्रीन चक्र फाउंडेशन और मध्य प्रदेश एग्रोइकोलॉजी प्लेटफॉर्म की ओर से मध्य प्रदेश महिला बीआरसी उद्यमी पुरस्कार 2026 के तहत महिला उद्यमियों में भूरी अहिरवार को प्रथम पुरस्कार, द्वितीय पुरस्कार सोनकच्छ की हीरामणि देवी को दिया गया।
‘हमारी पहचान, हम हैं किसान’ पहल का उद्देश्य महिलाओं को किसान के रूप में पहचान दिलाना तथा कृषि, उद्यमिता और सार्वजनिक निर्णय प्रक्रियाओं में उनकी आवाज को व्यापक मंच देना है।






