टीईटी मामले में कानूनी कमियां तत्काल दूर की जाएं
62 हजार पात्र शिक्षकों के भविष्य पर संकट

भोपाल। मध्यप्रदेश के 62 हजार पात्र शिक्षकों के भविष्य से जुड़े शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज करने की मांग उठने लगी है। रविवार को भोपाल के गांधी भवन में आयोजित प्रदेशस्तरीय सम्मेलन में प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण पर चर्चा करते हुए राज्य सरकार से याचिका में बताई गई तकनीकी कमियों को समय-सीमा के भीतर तत्काल दूर कराने की मांग की।
### याचिका की कमियां दूर करना पहली प्राथमिकता
सम्मेलन में शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकरण में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव याचिकाकर्ता हैं। ऐसे में याचिका में मौजूद कमियों को दूर कराने की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव अथवा उनके द्वारा नियुक्त अधिवक्ता की है। शिक्षकों ने चिंता जताई कि 29 अक्टूबर की समय-सीमा नजदीक आने के कारण कानूनी कमियों को तत्काल दूर करना आवश्यक है, ताकि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में बाधा न आए।
प्रमुख सचिव से मुलाकात की तैयारी
शिक्षकों ने निर्णय लिया कि अवकाश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से मुलाकात कर मामले की गंभीरता से अवगत कराया जाएगा। उनकी मांग है कि निर्धारित समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई में देरी न हो। शिक्षकों ने कहा कि फिलहाल पहली प्राथमिकता याचिका की कमियों को दूर कराना है। इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पात्र शिक्षक संगठन का गठन
सम्मेलन में पात्र शिक्षकों के हितों को संगठित रूप से उठाने के लिए पात्र शिक्षक संगठन का गठन किया गया। इसमें विदिशा के दीपक तिवारी को प्रदेश अध्यक्ष और नरसिंहपुर के राकेश दुबे को संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई। संगठन के माध्यम से शिक्षकों की मांगों को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने पर सहमति बनी।
दीपक तिवारी ने बताई प्राथमिकता
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक तिवारी ने मीडिया से चर्चा में कहा कि **वर्तमान में सबसे जरूरी कदम सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की तकनीकी कमियों को दूर कराना है।** चूंकि प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग याचिकाकर्ता हैं, इसलिए वे या उनके द्वारा नियुक्त अधिवक्ता ही इन कमियों को दूर करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समय-सीमा को देखते हुए तत्काल कार्रवाई जरूरी है। कमियां दूर होने के बाद संगठन अपने अगले कदम की जानकारी देगा।




