स्टार तीरंदाज शीतल देवी ने एक बार फिर स्वर्णिम इतिहास रचते हुए महिला कम्पाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में लगातार दूसरा गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिए

नई दिल्ली: एशियन पैरा गेम्स में भारत की स्टार तीरंदाज शीतल देवी ने एक बार फिर स्वर्णिम इतिहास रचते हुए महिला कम्पाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में लगातार दूसरा गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिए हैं। पैरा गेम्स में अपनी बादशाहत कायम रखते हुए शीतल ने डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में मैदान में उतरकर अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। जैसे ही निशाना सटीक बैठा और जीत पक्की हुई यह युवा चैंपियन अपने आंसुओं को रोक नहीं सकी। मैदान पर मौजूद सपोर्ट स्टाफ ने भावुक हुई शीतल को संभाला और गले लगाकर इस ऐतिहासिक पल का जश्न मनाया।
शीतल देवी के जज्बे को सलाम
बिना हाथों के जन्मीं शीतल देवी की यह उपलब्धि सिर्फ एक खेल की जीत नहीं बल्कि अदम्य साहस और कभी न हार मानने वाले जज्बे की मिसाल है। पैरों और कंधे के सहारे धनुष-बाण साधने वाली शीतल जब निशाना लगाती हैं तो उनका अनुशासन और एकाग्रता देखने लायक होती है। एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का तिरंगा फहराने तक का उनका यह सफर भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के खेल प्रेमियों को अचंभित और प्रेरित करता है।
जमकर की हुई मेहनत से मिला फल
मैच खत्म होने के बाद पोडियम और एरीना में दिखे इन इमोशनल पलों ने हर किसी का दिल छू लिया। जीत की खुशी में बहते शीतल के आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि इस एक मेडल के पीछे सालों की हाड़-तोड़ मेहनत, त्याग और मानसिक दबाव छिपा था। सपोर्ट स्टाफ का उन्हें ढांढस बंधाना और बधाई देना यह दर्शाता है कि उच्चतम स्तर की प्रतिस्पर्धा में एथलीट किस हद तक अपनी भावनाएं और ऊर्जा झोंक देते हैं।
शीतल देवी की यह स्वर्णिम हैट्रिक-जैसी निरंतरता भारतीय खेल इतिहास के पन्नों में एक और यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। उनके इस खिताबी बचाव ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। शीतल की यह कहानी आने वाली पीढ़ियों और युवा खिलाड़ियों को यह सिखाती है कि शारीरिक सीमाएं कभी आपके सपनों के आड़े नहीं आ सकतीं, अगर इरादे बुलंद हों तो हर नामुमकिन मंजिल को हासिल किया जा सकता है।




