रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर में अहम रहे डीआरडीओ के हथियार, ‘सुदर्शन चक्र’ पर दिया बड़ा अपडेट

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के 68वें स्थापना दिवस पर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में डीआरडीओ के हथियारों ने निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने ‘सुदर्शन चक्र’ वायु रक्षा पहल पर विश्वास जताया।
रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि डीआरडीओ जल्द ही सुदर्शन चक्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2025 के अपने संबोधन में घोषित की थी। इसके तहत अगले एक दशक में देश की महत्वपूर्ण संस्थाओं और ठिकानों को मजबूत वायु रक्षा प्रणाली से लैस किया जाना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा की अहमियत ऑपरेशन सिंदूर में साफ दिखी है।
तकनीक निर्माता से भरोसे का प्रतीक
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ को केवल तकनीक निर्माता नहीं, बल्कि भरोसा पैदा करने वाला संगठन बताया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र, उद्योग, स्टार्ट-अप और शिक्षण संस्थानों के साथ बढ़ते सहयोग से एक मजबूत और समन्वित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है। से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, डीआरडीओ की कार्यप्रणाली पहले से अधिक तेज, सरल और भरोसेमंद बनी है।
नवाचार और डीप टेक पर जोर
रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से बदलते तकनीकी माहौल के अनुरूप आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठन को नवाचार पर निरंतर ध्यान देना चाहिए और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के नए क्षेत्र तलाशने चाहिए। डीप टेक और अगली पीढ़ी की तकनीकों में प्रगति से न केवल राष्ट्रीय क्षमताएं बढ़ेंगी, बल्कि रक्षा तंत्र भी मजबूत होगा।
लगातार सीखने की जरूरत
उन्होंने कहा कि आज का युग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि निरंतर विकास और सीखने का है। तकनीक तेजी से बदल रही है और कल का ज्ञान आज पुराना हो सकता है। ऐसे में तकनीक स्कैनिंग, क्षमता आकलन और भविष्य की तैयारी अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं को चुनौती स्वीकार करने और सीखते रहने का संदेश दिया।
बैठक के दौरान रक्षा मंत्री को रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने 2025 की उपलब्धियों, 2026 के रोडमैप और संगठनात्मक सुधारों की जानकारी दी। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ सहित डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।




