
अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अलग-अलग जगहों पर तैनात अपने सैन्य कर्मचारियों को दूसरी जगहों पर भेजना शुरू कर दिया है। यह बदलाव ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव के बढ़ते खतरे को देखते हुए किया जा रहा है। ‘द येरूसलम पोस्ट’ ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के हवाले से बताया है कि पेंटागन के अधिकारियों के मुताबिक, कतर के अल उदीद बेस से सैकड़ों सैनिकों को दूसरी जगह भेजा गया है। इसी तरह के बदलाव बहरीन (जहां नेवी के 5वें बेड़े का मुख्यालय है), इराक, सीरिया, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी देखे गए हैं।
रिपोर्ट में क्या?
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को डर है कि इस इलाके में अभी तैनात 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक युद्ध की स्थिति में ईरान का मुख्य निशाना बन सकते हैं। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अब टकराव होता है, तो वह जून 2025 में अल उदीद पर हुए हमले से काफी अलग होगा। उस समय ईरान ने अमेरिका को पहले से जानकारी दे दी थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। जेरूसलम पोस्ट ने संयुक्त राष्ट्र में ईरानी मिशन की एक सख्त चेतावनी का भी जिक्र किया है। इसमें कहा गया था कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो इस इलाके में दुश्मन सेना के सभी बेस और संपत्तियां उनका सही निशाना होंगी।
अमेरिका तैनात कर रहा डिफेंस सिस्टम
इन खतरों को देखते हुए, अमेरिका अपनी सेना और हितों की सुरक्षा के लिए पश्चिम एशिया में एयर डिफेंस सिस्टम को शिफ्ट कर रहा है। इसके साथ ही, दो एयरक्राफ्ट कैरियर को ईरानी इलाके से काफी दूरी पर रखने का फैसला किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वे जवाबी कार्रवाई के लिए आसान निशाना न बनें।
क्या बोले विशेषज्ञ?
जेरूसलम पोस्ट ने बताया कि ये तैयारियां लंबे समय तक चलने वाले टकराव की ओर इशारा करती हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन आधिकारिक तौर पर कूटनीतिक समाधान खोजने की बात कर रहा है, लेकिन कई जानकारों का मानना है कि तेहरान के मौजूदा प्रस्ताव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य हमला करने से रोकने के लिए काफी नहीं हैं। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि राष्ट्रपति ने हाल ही में ईरान में सत्ता बदलने का विचार दिया था, जिसके बाद से अंदरूनी योजनाएं और भी बारीक और बड़ी हो गई हैं।