आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित होंगे 22 ‘अद्वैत जागरण शिविर’
अद्वैत जागरण शिविर के पंजीयन शुरू, देश-विदेश के युवा एवं जिज्ञासु नागरिक ले सकेंगे भाग मध्यप्रदेश सरकार युवाओं और जिज्ञासुओं को दे रही है वेदांत अध्ययन का सुनहरा अवसर





भोपाल | आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग वेदांत दर्शन और आध्यात्मिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अभिनव पहल कर रही है। देश-विदेश के 18 से 32 आयु वर्ष के युवाओं एवं 32 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए ‘अद्वैत वेदांत’ के गहन अध्ययन और अनुभव हेतु वर्ष 2026 में न्यास द्वारा देश के विभिन्न आश्रमों एवं संस्थानों में प्रतिष्ठित आचार्यों के मार्गदर्शन में 22 अद्वैत जागरण शिविर (Advaita Awakening Retreat) शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
इस शिविरों का मुख्य उद्देश्य अद्वैत वेदांत दर्शन का लोकव्यापीकरण एवं ‘एकात्मता के दर्शन’ (Oneness) को आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाना है, ताकि वे प्रबुद्ध नागरिक बनकर आदर्श समाज एवं उन्नत राष्ट्र का निर्माण कर सकें।
केरल से लेकर उत्तराखण्ड में होंगे में शिविर
वर्ष 2026 में यह शिविर अद्वैत आश्रम-मायावती (उत्तराखण्ड ), चिन्मय गार्डन कोयम्बटूर (तमिलनाडु), शारदा तपोवन-टिहरी (उत्तराखण्ड), चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन-वेलियानाड (केरल), आदिशंकर ब्रह्म विद्यापीठ, उत्तरकाशी (उत्तराखण्ड), आर्ष विद्या मंदिर-राजकोट (गुजरात), दयानन्द आश्रम-ऋषिकेश एवं चिन्मय तपोवन-सिद्धबारी (हिमाचल प्रदेश) में संपन्न होंगे।
आचार्य शंकर द्वारा रचित प्रकरण ग्रंथ तत्त्वबोध, आत्मबोध, भज गोविन्दम् का कराया जाएगा अध्ययन
10 दिवसीय शिविर में आचार्य शंकर के प्रकरण ग्रंथ जैसे तत्त्वबोध, आत्मबोध, भज गोविन्दम्, विवेक चूड़ामणि, मनीषा पंचकम् आदि के अध्ययन के साथ-साथ प्रतिदिन योगाभ्यास, ध्यान, स्तोत्र पारायण, प्रश्नोत्तर सत्र के साथ विभिन्न गतिविधियां कराई जाती है। 10 दिनों के दौरान एक दिन प्रतिभागियों को सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व के स्थल का भ्रमण भी कराया जाता है। आचार्य शंकर ने भगवद्गीता, उपनिषद् तथा ब्रह्मसूत्र पर भाष्य रचने के अलावा अनेक स्तोत्र और प्रकरण ग्रन्थ भी लिखे, जो अद्वैत वेदांत का परिचय देते हैं। 10 दिनों तक सात्त्विक दिनचर्या का पालन करते हुए देश-विदेश के विभिन्न प्रान्तों से प्रतिभागी परस्पर भी बहुत कुछ सीखते हैं, वे दशनामी संन्यास परम्पराओं के आश्रमों ‘गुरुकुल’ का साक्षात् अनुभव करते है।
अपर मुख्य सचिव (संस्कृति) शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि एकात्म भाव के जागरण हेतु अद्वैत जागरण शिविरों का आयोजन नियमित रूप से किया जा रहा है, हमारे लिए प्रसन्नता का विषय है कि देश-विदेश के युवा एवं नागरिक बड़ी संख्या में इन शिविरों में सम्मिलित हो रहे है। वर्ष 2020 से शुरू हुए इन शिविरों में अभी तक स्पेन, इंडोनेसिया, बांग्लादेश, तुर्की, नेपाल, यूएसए एवं भारत के 25 से अधिक राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों के आईआईटीइन / प्रोफेसर्स/ प्रोफेशनल्स/डॉक्टर्स / आर्टिस्ट / वैज्ञानिक /आर्मी ऑफिसर्स/ प्रशासनिक अधिकारी /शोधार्थी सहित 1600 से अधिक युवा सहभागिता कर चुके है।
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि चयनित प्रतिभागियों के आवास, भोजन और स्थानीय परिवहन का व्यय ‘आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास’ द्वारा वहन किया जाएगा। इच्छुक प्रतिभागी वेबसाइट www.oneness.mp.gov.in से अपना पंजीयन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन के पश्चात साक्षात्कार द्वारा प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा। शिविर उपरान्त प्रतिभागियों का दीक्षांत समारोह प्रतिवर्ष आचार्य शंकर प्रकटोत्सव के अवसर पर ओंकारेश्वर में आयोजित किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा आचार्य शंकर के जीवन-योगदान तथा अद्वैत वेदान्त दर्शन के लोकव्यापीकरण हेतु ओंकारेश्वर में एकात्म धाम के अंतर्गत आचार्य शंकर की 108 फीट की ‘एकात्मता की मूर्ति’ (Statue of Oneness), अद्वैत लोक (शंकर संग्रहालय) एवं आचार्य शंकर अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदान्त संस्थान की स्थापना करते हुए एकात्मता के वैश्विक केन्द्र (ए ग्लोबल सेंटर ऑफ़ वननेस) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
शिविर में जाकर स्वयं को जानने के साथ-साथ मन को एकाग्र करने का अवसर मिला, शिविर से मेरे जीवन में अभूतपूर्व बदलाव आया, जो मेरे अध्ययन में भी अत्यंत लाभकारी रहा।
-देवांशु शिवहरे, एमपीपीएससी टॉपर 2024
जीवन जीने की कला सिखाता है शिविर
इस शिविर से हमने ध्यान, योग के साथ विभिन्न सत्रों के माध्यम से आचार्य शंकर द्वारा विरचित प्रकरण ग्रंथ ‘तत्त्वबोध’ का अध्ययन श्रेष्ठ आचार्यों के मार्गदर्शन में किया। यह शिविर सही मायने में जीवन जीने की कला सिखाता है।
अमित शंकर झा
लेफ्टिनेंट कर्नल
विश्व में एकात्मता,शांति एवं परस्पर प्रेम के लिए अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रसार आज सम्पूर्ण विश्व में आवश्यक है। अद्वैत जागरण शिविर के माध्यम से वेदांत अध्ययन का यह अवसर मिलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।


