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USA में गूंजा खाटू श्याम का जयकारा

पेंसिल्वेनिया में तीसरे भव्य फागुन महोत्सव ने बढ़ाई सनातन की चमक

पेंसिल्वेनिया। अमेरिका की धरती पर भी अब खाटू श्याम भक्तों का उत्साह देखने को मिल रहा है। पेंसिल्वेनिया में आयोजित तीसरे फागुन महोत्सव ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को नई पहचान दी, जहां सैकड़ों श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।

पेंसिल्वेनिया में सजा भव्य फागुन महोत्सव
हर साल की तरह इस बार भी पेंसिल्वेनिया में रहने वाले अभिषेक शर्मा और उनके परिवार ने खाटू श्याम बाबा के फागुन मेले का आयोजन किया। कार्यक्रम में भजन, कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए भक्तों ने श्याम नाम का गुणगान किया। स्थानीय भारतीय समुदाय के अलावा कई अमेरिकी नागरिक भी इस सांस्कृतिक आयोजन में शामिल हुए, जिससे कार्यक्रम का दायरा पहले से कहीं ज्यादा बड़ा नजर आया।

छोटी संगत से बना हजारों भक्तों का परिवार
बताया जा रहा है कि शुरुआत में केवल दस लोगों के साथ शुरू हुई संगत आज करीब एक हजार श्रद्धालुओं तक पहुंच चुकी है। श्री श्याम भक्त भोला जी महाराज के मार्गदर्शन में यह समूह लगातार धार्मिक गतिविधियों और सेवा कार्यों के जरिए लोगों को जोड़ रहा है। आयोजकों का कहना है कि आने वाले समय में अमेरिका के कई शहरों में ऐसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है, ताकि नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

अमेरिका में बढ़ रही सनातन संस्कृति की पहचान
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में भारतीय त्योहारों और धार्मिक आयोजनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। फागुन महोत्सव जैसे आयोजन केवल भक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का भी प्रयास माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में बसे भारतीय परिवार ऐसे आयोजनों के जरिए बच्चों को भारतीय परंपराओं और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

क्या है फागुन मेले का धार्मिक महत्व
फागुन महीना खाटू श्याम भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। राजस्थान के खाटू धाम में इस दौरान विशाल मेला लगता है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। अब यही परंपरा विदेशों में भी धीरे-धीरे लोकप्रिय होती दिख रही है।

अमेरिका में सनातन संस्कृति की नई पहचान
पेंसिल्वेनिया में आयोजित तीसरे फागुन महोत्सव ने यह साबित कर दिया है कि भक्ति और संस्कृति की कोई सीमाएं नहीं होतीं। छोटे स्तर से शुरू हुई यह पहल अब एक बड़े धार्मिक आयोजन का रूप लेती नजर आ रही है, जो आने वाले समय में अमेरिका में सनातन संस्कृति की नई पहचान बना सकती है।

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