प्राचीन विज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक: भारत की ज्ञान परंपरा का आधुनिक विस्तार
ज्ञान की यात्रा: प्राचीन विज्ञान से AI और नवाचार तक का भारतीय दृष्टिकोण एनआईटीटीटीआर भोपाल में भारत की वैज्ञानिक धरोहर से जोड़कर मनाया गया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस


एनआईटीटीटीआर भोपाल में इस वर्ष का राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में सप्ताह भर विभिन्न कार्यशालों और प्रतियोगिताएं का आयोजन किया गया, जिसमें 3डी प्रिंटिंग लैब और रोबोटिक्स लैब में हैंड्स ऑन प्रैक्टिस, प्रतियोगिताएँ जैसे क्विज़, भाषण प्रतियोगिता, पोस्टर/मॉडल प्रस्तुतियाँ सम्मिलित थीं। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा से आधुनिक विज्ञान और तकनीक की आधारशिला से जोड़ा गया। विद्यार्थियों ने प्राचीन वैज्ञानिकों से आधुनिक वैज्ञानिकों के योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किये। इस वर्ष का राष्ट्रीय विज्ञान दिवस “महिला वैज्ञानिक: विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक” (Women in Science: Catalysing Viksit Bharat) थीम के तहत मनाया गया।
एनआईटीटीटीआर भोपाल के निदेशक, डॉ. सी. सी. त्रिपाठी ने अपने संबोधन में विज्ञान और नवाचार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारे युवा अपनी वैज्ञानिक धरोहर के वाहक बनें और विकसित भारत के निर्माण में योद्धा की भूमिका निभाएं। प्राचीन विज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक की यह यात्रा केवल तकनीकी उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि ज्ञान की निरंतरता, परंपरा की प्रासंगिकता और नवाचार की संभावनाओं का सशक्त उदाहरण है। इस अवसर पर संस्थान के डीन साइंसेज, प्रो. पी. के. पुरोहित ने आज भारत डिजिटल इंडिया, सेमीकंडक्टर निर्माण और AI नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि हम अपनी प्राचीन वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक अनुसंधान और तकनीक के साथ जोड़ें, तो भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की नई कहानी लिख सकता है।
समारोह का समापन निदेशक डॉ. सी. सी. त्रिपाठी द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेताओं को पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्थान की राजभाषा पत्रिका “संपर्क सरिता” व “संवाद सरिता” के नवीनतम अंक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. अजय शंकर, डॉ. बशीरुल्लाह शेख, डॉ. हुसैन जीवाखन, डॉ. तबस्सुम ज़फर, डॉ. अमित दुबे, डॉ. आकाश गायकवाड़, उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौमी चटर्जी द्वारा किया गया।


