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अनुत्तरा – क्राफ्ट बाज़ार 2026 भारत की जीवित शिल्प परंपराओं का उत्सव

National Institute of Fashion Technology, भोपाल द्वारा “अनुत्तरा – क्राफ्ट बाज़ार 2026” का आयोजन किया गया, जो 24 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक पाँच दिवसीय पारंपरिक भारतीय शिल्प एवं कारीगर समुदायों का उत्सव रहा। कार्यक्रम के प्रथम तीन दिन (24–26 फरवरी) निफ्ट भोपाल परिसर में ‘आर्टिजन अवेयरनेस वीक’ के रूप में आयोजित किए गए, जबकि 27–28 फरवरी को सार्वजनिक प्रदर्शनी-cum-विक्रय का आयोजन Gauhar Mahal में किया गया।

संस्कृत शब्द अनुत्तरा का अर्थ है “अतुलनीय”, जो पीढ़ियों से हस्तांतरित हस्तनिर्मित परंपराओं की विशिष्टता और प्रामाणिकता का प्रतीक है।

कार्यक्रम का उद्घाटन 24 फरवरी को परिसर में निफ्ट भोपाल के निदेशक श्री अखिल सहाय द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि श्री अजय के. भट्टाचार्य, आईएफएस (सेवानिवृत्त) ने अपने संबोधन में कारीगरों और युवा डिज़ाइनरों के बीच सार्थक सहयोग स्थापित करने के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना की। उद्घाटन समारोह में जयपुर–सांगानेर, चंदेरी, भोपाल, जबलपुर, नीमच, जोबट, इंदौर, उज्जैन, बनारस, महेश्वर और खजुराहो सहित विभिन्न शिल्प समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले 66 कारीगरों का औपचारिक परिचय कराया गया।

आर्टिजन अवेयरनेस वीक (24–26 फरवरी | निफ्ट परिसर)

तीन दिवसीय ‘आर्टिजन अवेयरनेस वीक’ को कारीगरों को शैक्षणिक अनुभव एवं व्यावसायिक उन्नयन प्रदान करने हेतु संरचित किया गया।

पहला दिन: बाज़ार उन्मुखीकरण एवं नीतिगत जागरूकता

सत्रों में बदलते बाज़ार परिदृश्य और सरकारी सहायता प्रणालियों पर चर्चा की गई। फैशन एवं लाइफस्टाइल एक्सेसरीज़ विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुप्रिया यादव द्वारा ‘विजन एनएक्सटी’ (VisioNXT/Vision Next) सत्र में कारीगरों को उभरती वैश्विक डिज़ाइन प्रवृत्तियों से परिचित कराया गया। इसके पश्चात विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय की एडीसीएचएल सुश्री रूपाली सक्सेना ने सरकारी योजनाओं एवं कारीगर विकास पहलों की जानकारी दी। सुश्री अनुपमा भार्गव द्वारा आयोजित ‘कलर एंड ट्रेंड फोरकास्टिंग’ सत्र ने प्रतिभागियों को समकालीन रंग योजनाओं और उपभोक्ता प्रवृत्तियों की समझ प्रदान की। दिन का समापन कारीगरों और छात्रों के बीच संवादात्मक चर्चा से हुआ।

दूसरा दिन: तकनीकी कौशल संवर्धन एवं प्रदर्शन

फैशन टेक्नोलॉजी विभाग एवं डॉ. सुविनय सक्सेना द्वारा आयोजित एर्गोनॉमिक्स सत्र में कार्यस्थल दक्षता एवं स्वास्थ्य जागरूकता पर प्रकाश डाला गया। साथ ही, टेक्सटाइल एवं एक्सेसरी डिज़ाइन विभाग के छात्रों हेतु डाबू प्रिंटिंग, बाटिक, टेराकोटा और पॉटरी के लाइव प्रदर्शन आयोजित किए गए। श्री झुमक माणिकपुरी के विशेषज्ञ सत्र में शिल्प नवाचार और स्थिरता पर विचार साझा किए गए। छात्रों ने पारंपरिक तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से सीखते हुए सक्रिय सहभागिता की।

तीसरा दिन: प्रलेखन एवं अनुभवात्मक परिचय

फैशन कम्युनिकेशन विभाग द्वारा आयोजित फोटोग्राफी प्रदर्शन में कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म हेतु अपने उत्पादों का पेशेवर प्रलेखन करने का प्रशिक्षण दिया गया। फैशन डिज़ाइन विभाग के लिए सांगानेर ब्लॉक प्रिंटिंग का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें पारंपरिक प्रक्रियाओं की बारीकियाँ प्रदर्शित की गईं। कार्यक्रम का समापन कारीगरों के लिए परिसर भ्रमण के साथ हुआ, जहाँ उन्होंने निफ्ट भोपाल के शैक्षणिक स्टूडियो एवं प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया।

क्राफ्ट बाज़ार (27–28 फरवरी | गौहर महल)

27 फरवरी को गौहर महल में सार्वजनिकp क्राफ्ट बाज़ार का शुभारंभ हुआ, जिसमें कुल 44 स्टॉल लगाए गए। कार्यक्रम की शुरुआत एक्सेसरी डिज़ाइन विभाग के छात्रों द्वारा पारंपरिक गणेश वंदना से हुई। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगंकर, आईएएस, प्रधान सचिव, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने कहा, “छात्र जब आधुनिकता की ओर बढ़ें, तो उन्हें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को साथ लेकर चलना चाहिए।” अतिथि-विशेष श्री माधन बिभीषण नागारगोजे, आईएएस, आयुक्त, हस्तशिल्प एवं हथकरघा भी उपस्थित रहे।

कैंपस एकेडमिक कोऑर्डिनेटर (CAC) डॉ. देबज्योति गांगुली ने भारतीय शिल्प की प्राचीन विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा, “भारत की हस्तशिल्प परंपरा 3,000 वर्ष से भी अधिक पुरानी है। हस्तकरघा और हस्तशिल्प प्रागैतिहासिक काल से ही पूर्णतः प्राकृतिक प्रक्रियाओं और सामग्रियों पर आधारित एवं सतत रहे हैं।”

डॉ. अनुपम सक्सेना (CIC) ने कहा कि शिल्प भारत की जीवित सांस्कृतिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा निफ्ट ऐसे मंच बिना किसी सहभागिता शुल्क के आयोजित करता है, जिससे कारीगरों को अपने व्यावसायिक विस्तार का अवसर मिलता है।

सांयकाल एक विशेष तीन-चरणीय फैशन वॉक आयोजित की गई, जिसमें 25 निफ्ट छात्रों ने भाग लिया। उन्होंने चंदेरी साड़ियाँ, बनारसी साड़ियाँ, टाई-डाई परिधान और हस्तनिर्मित आभूषण प्रस्तुत किए। इस प्रस्तुति ने पारंपरिक वस्त्रों की आधुनिक संदर्भों में सुंदरता और अनुकूलन क्षमता को उजागर किया।

कारीगर एवं छात्र अनुभव

राज्य पुरस्कार से सम्मानित बांस शिल्पकार धर्मेंद्र रोहार ने कार्यक्रम के दौरान 3 दिवसीय कार्यशाला संचालित की। उन्होंने लगभग 20–30 छात्रों को बांस शिल्प की बारीकियाँ सिखाईं। उनके मार्गदर्शन में एक छात्र जयेश ने मोबाइल स्टैंड तैयार किया, और रूपम ने आभूषण—विशेषकर झुमके, अंगूठियाँ और कंगन—निर्मित किए।

जयपुर–सांगानेर के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त ब्लॉक-प्रिंटिंग शिल्पकार राजकुमार पांडेय ने निफ्ट भोपाल की अपनी पहली यात्रा को समृद्ध अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि डिज़ाइन छात्रों के साथ संवाद से उन्हें मूल्यवान अनुभव मिला और पीढ़ियों से चली आ रही ज्ञान परंपरा साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ।

छात्रा पलक सिंह बैस ने कहा कि अपने प्रथम क्राफ्ट बाज़ार में भाग लेने से पारंपरिक शिल्प के प्रति उनकी समझ और गहरी हुई तथा आधुनिक डिज़ाइन शिक्षा में उनकी प्रासंगिकता के प्रति सम्मान बढ़ा।

आगंतुकों ने वस्त्र, बुनाई, प्रिंट, मिट्टी शिल्प और क्षेत्रीय कलाओं से सजे स्टॉलों का अवलोकन किया, कारीगरों से प्रत्यक्ष संवाद किया और उनके कार्य का समर्थन किया। बाज़ार 28 फरवरी को संपन्न होगा, जिसमें भोपाल के नागरिकों को भारत की जीवंत शिल्प परंपराओं का उत्सव मनाने हेतु आमंत्रित किया गया।

इस कार्यक्रम की सफलता निदेशक श्री अखिल सहाय के मार्गदर्शन तथा डॉ. अनुपम सक्सेना (CIC), डॉ. देबज्योति गांगुली (CAC), स्टूडेंट डेवलपमेंट एंड एक्टिविटी काउंसिल (SDAC), विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों, टेक्सटाइल डिज़ाइन विभाग, स्वयंसेवकों, छात्रों और कारीगरों के उत्साहपूर्ण सहयोग से संभव हुई।

“अनुत्तरा – क्राफ्ट बाज़ार 2026” के माध्यम से निफ्ट भोपाल ने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और समकालीन डिज़ाइन अभ्यास के बीच एक सेतु के रूप में अपनी भूमिका को सुदृढ़ किया है, जिससे भारत की शिल्प धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक समृद्ध और जीवंत बनी रहे। यह पहल विरासत, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का संगम है, जो संस्थान की भारतीय शिल्प परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।

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