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दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर हमला, मुकेश अंबानी से खास कनेक्शन, कौन है Aramco का मालिक

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की खबर से वैश्विक बाजार में हलचल मच गई है. कंपनी में सऊदी सरकार की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि मुकेश अंबानी की रिलायंस से इसका पुराना कारोबारी संबंध रहा है.

मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनातनी सोमवार को और तेज हो गई. ईरान की ओर से इजरायल और कुछ खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी. इसी बीच सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी (Ras Tanura Oil Refinery) में ड्रोन हमले के बाद सीमित हिस्से में आग लगने की सूचना सामने आई.

दुनिया की सबसे मुनाफे वाली कंपनी: 

जब दुनिया की सबसे अधिक कमाई करने वाली कंपनियों की चर्चा होती है तो आमतौर पर टेक दिग्गजों का नाम सामने आता है, लेकिन मुनाफे के मामले में सऊदी अरामको का दबदबा अलग ही है. स्टैटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में कंपनी ने लगभग 247.43 बिलियन अमेरिकी डॉलर का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया. यह आंकड़ा कई बड़ी टेक कंपनियों के संयुक्त मुनाफे के बराबर माना जा रहा है.

अरामको सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में उसकी भूमिका बेहद अहम है. कंपनी 2019 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी, लेकिन आज भी इसकी अधिकांश हिस्सेदारी सऊदी सरकार के पास है. सरकार के पास 81 प्रतिशत से अधिक शेयर हैं, जबकि पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) के पास भी बड़ी हिस्सेदारी मौजूद है.

हर दिन कितना तेल निकालती है Aramco ?

सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनियों में से एक है. कंपनी प्रतिदिन लगभग 9 से 12 मिलियन बैरल (90 लाख से 1.2 करोड़ बैरल) कच्चे तेल का उत्पादन करती है. उत्पादन का स्तर ओपेक+ के फैसलों और वैश्विक मांग के अनुसार बदलता रहता है.

कंपनी के पास 250 अरब बैरल से अधिक सिद्ध (Proven) तेल भंडार है, जो दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में शामिल है. अरामको की अधिकतम उत्पादन क्षमता 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है. यही वजह है कि वैश्विक तेल बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है.

भारत में बढ़ती भागीदारी और निवेश

भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है. लंबे समय से भारत सऊदी अरामको से कच्चा तेल आयात करता रहा है, लेकिन अब कंपनी ने भारत में सीधे निवेश की दिशा में कदम बढ़ाया है. प्रधानमंत्री Narendra Modi के सऊदी दौरे के दौरान हुई सहमति के बाद अरामको ने भारत में दो बड़ी रिफाइनरियों के विकास में सहयोग का फैसला किया.

इन परियोजनाओं में करीब 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है. अरामको इन रिफाइनरियों में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने की योजना पर काम कर रही है. साथ ही सरकारी कंपनियों ONGC और Bharat Petroleum Corporation Limited को तकनीकी और वित्तीय सहयोग देने की भी चर्चा है. प्रत्येक रिफाइनरी की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 1.2 करोड़ टन प्रस्तावित है.

मुकेश अंबानी और अरामको का ऊर्जा रिश्ता

भारत के निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी Reliance Industries Limited और सऊदी अरामको के बीच दो दशक से अधिक पुराना कारोबारी संबंध है. उद्योगपति Mukesh Ambani की जामनगर रिफाइनरी के लिए अरामको बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आपूर्ति करती रही है. जामनगर कॉम्प्लेक्स में औसतन 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल प्रोसेस होता है, जिसमें अरामको की आपूर्ति का महत्वपूर्ण योगदान रहता है.इस सहयोग ने दोनों कंपनियों के बीच रणनीतिक रिश्ते को मजबूत किया है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाई है.

वैश्विक बाजार के लिए क्यों अहम है अरामको ?

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरामको जैसी कंपनी पर किसी भी तरह का हमला केवल एक देश का मुद्दा नहीं होता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है. तेल आपूर्ति में व्यवधान से कच्चे तेल की कीमतें उछल सकती हैं, जिसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर महंगाई तक दिखाई देता है. ऐसे में अरामको की स्थिरता और उत्पादन क्षमता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. स्पष्ट है कि सऊदी अरामको केवल एक तेल कंपनी नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संतुलन की धुरी है, और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में इसकी भूमिका और भी निर्णायक हो गई है

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