

नई दिल्ली, 10 मार्च, 2026: डाबर वाटिका ने ‘वाटिका आई एम मोर’ (#VatikaIAmMore)नाम से एक नई और प्रभावशाली मुहिम शुरू की है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की उपलब्धियों को कम आंकने वाली भाषा को चुनौती देना है। अक्सर महिलाओं की पहचान उनकी योग्यता के बजाय उनके जेंडर के आधार पर की जाती है, जैसे: महिला क्रिकेटर, महिला सीईओ या महिला अभिनेत्री। इसके अलावा, उनकी सफलता को अक्सर “सिर्फ” शब्द से जोड़ा जाता है—जैसे कि वह ‘सिर्फ’ भाग्यशाली थीं या ‘सिर्फ’ भावुक थीं। ‘वाटिका आई एम मोर’ इन शब्दों को हटाकर एक ऐसी नई सोच बनाना चाहता है, जहाँ महिलाओं के साहस और उनकी बहुमुखी पहचान का सम्मान हो।
डाबर इंडिया लिमिटेड के मार्केटिंग हेड (हेयर केयर), श्री अंकुर कुमार ने कहा: “वाटिका में हमारा हमेशा से मानना रहा है कि एक महिला की पहचान बहुत गहरी और बहुआयामी होती है। यह अभियान उन बंदिशों के खिलाफ खड़ा होने का हमारा तरीका है, जिनमें समाज महिलाओं को बांधने की कोशिश करता है। हम एक ऐसी वैश्विक चर्चा शुरू करना चाहते हैं जो ‘सिर्फ’ शब्द से आगे बढ़े—क्योंकि एक महिला ‘सिर्फ’ कुछ नहीं होती; वह प्रकृति की एक शक्ति, एक लीडर और एक निर्माता है।”
यह अभियान एक मर्मस्पर्शी फिल्म के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जो दिखाती है कि भाषा कैसे हमारी सोच को बदलती है। फिल्म यह दर्शाती है कि कैसे एक छोटा सा शब्द सालों की कड़ी मेहनत को कम कर सकता है। इसके जरिए महिलाओं को अपनी पहचान वापस पाने और यह घोषित करने के लिए प्रेरित किया गया है कि वे समाज द्वारा थोपे गए लेबल से कहीं बढ़कर हैं।
हावास क्रिएटिव इंडिया की चीफ क्रिएटिव ऑफिसर और मैनेजिंग डायरेक्टर, अनुपमा रामास्वामी ने कहा: “भाषा समाज के भेदभाव का आईना है। सालों से मैं देख रही हूँ कि कैसे ‘महिला’ जैसे शब्द उपलब्धियों के आगे लग जाते हैं, जिससे ध्यान योग्यता से हटकर जेंडर पर चला जाता है। लंबे समय से ‘सिर्फ’ शब्द का इस्तेमाल महिलाओं के बड़े प्रभाव को छोटा दिखाने के लिए किया गया है। इस अभियान के साथ हम यह याद दिला रहे हैं कि योग्यता का कोई जेंडर नहीं होता।”
डाबर वाटिका दुनिया भर की महिलाओं को सोशल मीडिया पर अपनी कहानियाँ साझा करने के लिए आमंत्रित कर रहा है। ‘वाटिका आई एम मोर’ हैशटैग का उपयोग करके।



