पशुपालन विभाग की 128 नियुक्तियों पर उठे सवाल: बिना प्रतीक्षा सूची डिग्रीधारियों को दिया नियुक्ति आदेश, नियमों पर विवाद तेज
भोपाल 29 अप्रैल 2026.मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी पदों पर जारी नियुक्ति एवं पदस्थापना आदेश को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विभाग द्वारा 27 अप्रैल 2026 को संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी विभाग कामधेनू भवन, वैशाली नगर, भोपाल से आदेश क्रमांक 5319/स्था-ब/से.प.चि.क्षे.अ.भर्ती/2026 जारी किया गया, जिसमें 128 डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई।
क्या है पूरा मामला
विभागीय आदेश के अनुसार, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित संयुक्त भर्ती परीक्षा 2024 के माध्यम से चयनित एवं प्रतीक्षा सूची के डिप्लोमा धारक अभ्यर्थियों की नियुक्ति के बाद मंडल ने पत्र क्रमांक 02-79/2024/08/प-2/10086/2025 दिनांक 29.12.2025 में स्पष्ट किया कि अब डिप्लोमा अभ्यर्थियों की कोई प्रतीक्षा सूची शेष नहीं है।
👉हकिकत् सेकड़ो की संख्या मै डिप्लोमा होल्डर उपलब्ध है विभाग और कर्मचारी चयन मंडल की मिली भगत से प्रतिछा सूची जारी नही की जा रही
इसके बाद विभाग ने कहा कि विज्ञापित पदों में से 137 पद रिक्त रह गए थे, जबकि श्रेणीवार 128 पद उपलब्ध थे।
इन शेष पदों पर विभाग ने डिग्रीधारी उम्मीदवारों को नियुक्ति देने का निर्णय लिया।किसके आदेश से हुई नियुक्ति?
विभागीय आदेश में उल्लेख किया गया है कि यह नियुक्तियाँ निम्न आधारों पर की गईं—
मनोज नागले एवं अन्य विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन प्रकरण में पारित निर्णय दिनांक 10 मार्च 2025
कार्यालय महाधिवक्ता, जबलपुर के अर्धशासकीय पत्र क्रमांक 2779 दिनांक 31.03.2026 से प्राप्त अभिमत
“Over and Above” सिद्धांत के तहत शेष रिक्त पदों पर डिग्रीधारियों को समायोजित करने का निर्णय।
नियुक्ति पर क्यों उठ रहे सवाल?
कई अभ्यर्थियों और विभागीय सूत्रों ने इस आदेश पर सवाल उठाए हैं। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं— अवमानना याचिका क्रमांक 5237/2025 इंदौर बैंच
2990/2026 याचिका 15% को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट
मै अभी लंबित है
या
1. क्या विज्ञापन नियमों के विपरीत भर्ती हुई?
यदि मूल विज्ञापन डिप्लोमा पदों के लिए था, तो डिग्रीधारियों को बाद में नियुक्त करना विवाद का विषय बन सकता है। जो की अबमनना याचिका मै वरेंट और 5000 की राशि का जुर्माना विभागीय अधिकारियों को लग चुका है
फिर भी ये केसा भाई चारा है पशुपालन विभाग में
2. Over and Above सिद्धांत का उपयोग क्यों?
क्या यह सिद्धांत विभागीय भर्ती नियमों में मान्य है या केवल न्यायालयीय आदेश के पालन में अपनाया गया? नही
3. क्या आरक्षण रोस्टर का पालन हुआ?
*128 पदों पर नियुक्ति में वर्गवार रोस्टर, आरक्षण, मेरिट और वरिष्ठता का पालन नहीं हुआ
यह बड़ा प्रश्न है।
4. मामला कोर्ट मै लंबित है जबलपुर हाई कोर्ट मै याचिका क्रमांक 2990/20265. कॉन्टेप्ट याचिका क्रमांक 5237/2025 बेंच इंदौर जिस मै विभाग के आधिकारी डायरेक्टेड और सचिव महोदय को बरेंट और 5000 की फाइन माननीय हाई कोर्ट ने निर्देश किया है उस का अभी रिप्लाई जान शेष है फिर भी avfo के पद पर dr. लिख कर डिग्री होल्डर को बिना पत्र -अपात्र सूची जारी किये बिना सीधा पोस्टिंग ऑडर दे दिए गये
6- विभागीय आदेश मै 137 पद खाली है और पोस्टिंग 128 पर यहां पर रिजर्वेशन मै छेड़ छाड की गई किस लिए उन डिग्री होल्डर की पोस्टिंग देने के लिए जिने कोर्ट ने गलत ठराया है ,या विभाग के सभी पदाधिकारी उसी डिग्री से उच्च पदो पर बैठे है यहां सब अपना भाई चारा निभाया जा रहा है
9-
आदेश में शामिल कुछ प्रमुख नियुक्त नाम
विभागीय आदेश में अनेक अभ्यर्थियों के नाम शामिल हैं,
(पूर्ण सूची विभागीय आदेश में संलग्न है)
विपक्ष और अभ्यर्थियों की मांग
अब अभ्यर्थियों और कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि सरकार स्पष्ट करे—
नियुक्ति का वास्तविक आदेश किस स्तर से जारी हुआ?
क्या मंत्री स्तर से स्वीकृति ली गई?
क्या वित्त विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति प्राप्त थी?
क्या चयन मंडल की अनुशंसा के बिना नई सूची से नियुक्ति वैध है?
पशुपालन विभाग की 128 नियुक्तियाँ अब प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक बहस का विषय बन गई हैं। यदि प्रक्रिया पूरी तरह नियमसम्मत है तो सरकार को पारदर्शी जवाब देना होगा, अन्यथा यह मामला न्यायालय तक जा सकता है।
👉यहां, 15% प्रतीक्षा सूची तैयार करने का उल्लेख है परंतु यह प्रतिबंध नहीं है नियम बुक मै है
👉भर्ती नियम पुस्तिका 2024 अध्याय एक के , नियम 6.1 के अनुसार
“राज्य के सभी विभाग उपक्रम उनकी रिक्तियों को बोर्ड द्वारा अंतिम रूप प्रदान की गई सफल अभ्यर्थियों की सूची में से भरेंगे जिसमें यथा उल्लिखित भविष्य में सृजित किए जाने वाले पद भी सम्मिलित हैं।”
एवं नियम 6.2 के अनुसार
“बोर्ड, पात्र अभ्यर्थियों के नाम, यदि उनके द्वारा ऐसी मांग की जाए तो सभी विभागों/संस्थाओ/निगमों/मण्डलों/आयोग/स्वायत्तशासी निकायों/सोसाइटियों/सहकारी बैंकों को भी अग्रेषित करेगा।”

