जितना मजबूती से अध्यापक अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रख सकता है उतनी मजबूती से सरकार नहीं रख सकती TET से पीड़ित अध्यापकों से पुनर्विचार याचिका दायर करने की अपील अध्यापकों को अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में खुद लड़ना चाहिए


TET के मुद्दे पर प्रदेश के अध्यापक वर्तमान में गंभीर रूप से पीड़ित हैं। इस संदर्भ में प्रदेश मीडिया प्रभारी हीरानंद नरवरिया ने कहा कि “पीड़ित की पीड़ा को पीड़ित ही सही तरीके से समझ सकता है, और अपनी बात भी वही सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी ढंग से रख सकता है। उन्होंने कहा कि TET से प्रभावित अध्यापक ही अपने पक्ष को सुप्रीम कोर्ट में तथ्यों और मजबूती के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं, इसलिए सभी शिक्षकों को स्वयं आगे आना चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पुनर्विचार याचिका दायर करने में हुई देरी शिक्षकों के लिए घातक साबित हो सकती है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो नौकरी जाने का खतरा बढ़ सकता है और बाद में याचिका दायर करने का अवसर भी समाप्त हो सकता है।अतः प्रदेश के समस्त अध्यापकों से अपील की गई है कि वे समय सीमा के भीतर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करें और अपने अधिकारों व भविष्य की रक्षा के लिए संगठित होकर आगे आएं। सरकार मजबूती से अध्यापकों का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में नहीं रख पाएगी जितना मजबूती से अध्यापक अपना पक्ष रख सकते हैं उत्तर प्रदेश की तरह वहां शिक्षक संगठनों ने अपनी पुनर्विचार याचिकाएं दायर की है


