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वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच एमआईटी-डब्‍ल्‍यूपीयू के शोधकर्ताओं ने तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए विकसित किए एआई मॉडल

पुणे: वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति में बाधाओं के चलते अस्थिरता का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्‍ल्‍यूपीयू), पुणे के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित उन्नत मॉडल विकसित किए हैं, जो पुराने तेल भंडारों (मैच्योर फील्ड्स) से अधिक तेल निकालने और भविष्य के उत्पादन का सटीक अनुमान लगाने में मदद कर सकते हैं। यह शोध भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। देश की कुल ऊर्जा खपत में तेल और गैस की हिस्सेदारी लगभग 32–37% है, और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल के आयात पर करीब 161 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए गए। ऐसे में मौजूदा तेल क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाना एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है।

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग—जो महाराष्ट्र में अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस का समर्पित अकादमिक विभाग है—के शोधकर्ता पेट्रोलियम भंडार प्रबंधन की जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं।

एमआइटी डब्‍ल्‍यूपीयू में पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीब कुमार सिन्हाराय के नेतृत्व में, और उनके पीएचडी छात्र डॉ. ऋषिकेश के. चव्हाण के साथ, एक शोध टीम ने मशीन लर्निंग मॉडल विकसित किया है, जो जटिल तेल भंडारों के लिए सबसे उपयुक्त एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) तकनीकों की पहचान कर सकता है। यह मॉडल दुनियाभर के कई तेल क्षेत्रों के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है और इसने 91% सटीकता के साथ सर्वोत्तम रिकवरी विधि का अनुमान लगाया।

इस शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय जर्नल पेट्रोलियम साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं। यह एआई मॉडल पारंपरिक तरीकों में लगने वाले कई महीनों के समय को घटाकर कुछ घंटों में ही तेल रिकवरी रणनीति का मूल्यांकन कर सकता है।

डॉ. राजीब कुमार सिन्हाराय ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेल और गैस उद्योग में भंडार प्रबंधन को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। हमारा उद्देश्य ऐसे डेटा-आधारित टूल्स विकसित करना है, जो ऑपरेटरों को बेहतर निर्णय लेने और उत्पादन का अधिक सटीक अनुमान लगाने में मदद करें, खासकर पुराने तेल क्षेत्रों में।”

एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि में, प्रोफेसर समर्थ पटवर्धन और उनके पीएचडी छात्र डॉ. सौमित्र नांदे ने एक डीप लर्निंग मॉडल विकसित किया है, जो कार्बोनेट रिज़र्वायर चट्टानों की पहचान 97% सटीकता के साथ कर सकता है। ये चट्टानें भारत के सबसे बड़े ऑफशोर तेल क्षेत्र बॉम्बे हाई जैसी संरचनाओं से मिलती-जुलती हैं। यह शोध 2025 में अरेबियन जर्नल फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रकाशित हुआ।

शोध टीम ने एक और मशीन लर्निंग मॉडल विकसित किया है, जो पुराने तेल क्षेत्रों में उत्पादन का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है। इस मॉडल ने वास्तविक भारतीय ऑनशोर फील्ड डेटा पर 92% सटीकता (R² स्कोर) हासिल की है। उत्पादन का सही अनुमान लगाना निवेश निर्णयों, भंडार प्रबंधन और दीर्घकालिक आपूर्ति योजना के लिए बेहद अहम होता है। यह शोध फिजिक्स ऑफ फ्लूइड्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इसके अलावा, टीम ने तेल उत्पादन ट्यूबिंग डिजाइन को बेहतर बनाने के लिए एआई आधारित मॉडल भी तैयार किया है, जो तेल निकालने के लिए उपयुक्त पाइप आकार निर्धारित करने में मदद करता है। यह शोध इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन कम्प्यूटेशनल साइंस एंड एप्लिकेशंस में प्रस्तुत किया गया और बाद में स्प्रिंगर नेचर की ‘एल्गोरिद्म्स फॉर इंटेलिजेंट सिस्टम्स’ श्रृंखला में प्रकाशित हुआ। इस तकनीक के लिए शोधकर्ताओं को पेटेंट भी प्राप्त हुआ है। वर्तमान में, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की टीम असामान्य हाइड्रोकार्बन भंडारों में ‘स्वीट स्पॉट्स’ की पहचान और उच्च तापमान एवं दबाव वाले वातावरण के लिए टिकाऊ ड्रिलिंग फ्लूइड विकसित करने पर काम कर रही है। ये सभी नवाचार इस बात को दर्शाते हैं कि एआई आधारित शोध किस तरह तेल उत्पादन को बेहतर बनाने, पुराने तेल क्षेत्रों की क्षमता बढ़ाने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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