शिक्षकों के हित में ट्रांसफर नीति पर पुनर्विचार की मांग
मध्यप्रदेश में शिक्षकों की ट्रांसफर नीति को लेकर एक बार फिर असंतोष उभरता दिखाई दे रहा है। राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने शिक्षकों के हित में एक संतुलित, पारदर्शी और न्यायसंगत ट्रांसफर नीति बनाने की मांग का पत्र माननीय मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री जी को लिखकर उठाई है। उन्होंने कहा कि नीति ऐसी होनी चाहिए जो सभी शिक्षकों पर समान रूप से लागू हो, लेकिन विशेष परिस्थितियों में कार्य कर रहे शिक्षकों के साथ न्याय भी सुनिश्चित किया जाए। जगदीश यादव ने विशेष रूप से जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है, जिसे शिक्षक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाते हैं। ऐसे में इन शिक्षकों को कार्य अवधि के दौरान ट्रांसफर से मुक्त रखा जाना उचित है, लेकिन उन्हें ट्रांसफर नीति में अनिश्चितकाल शामिल ही नहीं करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को स्थानांतर नीति में शामिल कर कार्य समाप्ति के तत्काल बाद कार्यमुक्त किया जाए,इससे प्रशासनिक संतुलन बना रहेगा और अन्य उन्हें भी स्थानांतरण के समान अवसर प्राप्त होंगे।प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी मांग की कि रिक्त पदों को अनावश्यक रूप से खाली न रखा जाए। कई बार इच्छुक शिक्षकों के बावजूद पद रिक्त रह जाते हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है।उन्होंने सरकार से अपील की कि सभी रिक्त पदों को पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत भरा जाए। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान भीषण गर्मी की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब आमजन 43 डिग्री तापमान में घरों में कूलर और एसी की सुविधा में रह रहे हैं, तब शिक्षक विपरीत परिस्थितियों में अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारी को निभाते हुए सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें स्वैच्छिक स्थानांतरण से वंचित रखना न केवल अनुचित है, बल्कि उनके मनोबल को भी प्रभावित करता है। उन्होंने मांग की कि ऐसे शिक्षकों को सम्मान या प्रोत्साहन स्वरूप उनकी इच्छा के अनुरूप स्थानांतरण का अवसर दिया जाना चाहिए। अंत में जगदीश यादव ने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। एक स्पष्ट, न्यायपूर्ण और मानवीय ट्रांसफर नीति ही शिक्षकों में विश्वास बढ़ाएगी और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएगी।



