टीईटी शिक्षकों की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर
न्याय नहीं मिला तो सड़क से संसद तक होगा महासंग्राम” — जगदीश यादव
टीईटी शिक्षकों के अधिकार,सम्मान व भविष्य की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।सुप्रीम कोर्ट में विगत दिनों हुई लंबी व महत्वपूर्ण सुनवाई में शिक्षकों का पक्ष देश के वरिष्ठ एवं विद्वान अधिवक्ताओं द्वारा बेहद मजबूती,तथ्यों व संवैधानिक आधार के साथ रखा गया।राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने विश्वास जताते हुए कहा कि न्यायालय लाखों शिक्षकों के भविष्य,सेवा सुरक्षा और न्यायसंगत अधिकारों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय देगा।उन्होंने कहा कि वर्षों से शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बनकर कार्य कर रहे हैं।ऐसे में उनके साथ अन्याय केवल शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं,बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है।सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों का पक्ष संवैधानिक,तार्किक व मानवीय आधार पर पूरी तरह मजबूत है।जगदीश यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी कारणवश निर्णय शिक्षकों के पक्ष में नहीं आता है, तो यह संघर्ष किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं होगा। संगठन सुप्रीम कोर्ट में क्यूरोटिव पिटिशन दायर कर पुनः न्याय की लड़ाई लड़ेगा और साथ ही देशभर के शिक्षकों को संगठित कर लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से संसद तक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा।उन्होंने कहा कि शीघ्र ही दिल्ली में देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी,जिसमें संसद घेराव, राष्ट्रव्यापी आंदोलन और व्यापक जनजागरण अभियान की रणनीति तैयार की जाएगी।यह केवल नौकरी बचाने का आंदोलन नहीं, बल्कि लाखों शिक्षक परिवारों के सम्मान,भविष्य और अस्तित्व की लड़ाई है।उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़े तो सरकार तत्काल अध्यादेश लाकर कानून में संशोधन करे, ताकि लाखों शिक्षकों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे।जगदीश यादव ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि यदि शिक्षकों की आवाज को अनसुना किया गया,तो देशभर के शिक्षक एकजुट होकर ऐसा जनआंदोलन खड़ा करेंगे जिसकी गूंज सड़कों से लेकर संसद तक सुनाई देगी।शिक्षक अब आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं और अपने अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करेंगे…


