वट सावित्री पर्व पर बौद्धिक, भावनात्मक एवं शारीरिक विकास का मार्गदर्शन करती है भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा — कृष्ण शर्मा


भोपाल। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का शुभारंभ वर्ष 1994 में गायत्री शक्तिपीठ भोपाल से हुआ था, जो आज मत्स्यावतार की भाँति विकसित होकर देश-विदेश तक पहुँच चुकी है। यह परीक्षा केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के बीजारोपण का सशक्त माध्यम है। विशेष रूप से 11 से 20 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों के बौद्धिक, भावनात्मक एवं शारीरिक विकास में यह परीक्षा महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह विचार भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रांतीय समन्वयक श्री कृष्ण शर्मा ने गायत्री शक्तिपीठ, एम.पी. नगर भोपाल में आयोजित जिला स्तरीय गोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने परीक्षा की सुचिता एवं पारदर्शिता बनाए रखने हेतु कार्यकर्ताओं से विद्यालयों में पर्यवेक्षक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। गोष्ठी में कार्यकर्ताओं ने परीक्षा संचालन से जुड़ी विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं एवं अनुभवों को वरिष्ठजनों के समक्ष रखा। आगामी सितंबर माह में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के सफल संचालन हेतु मध्यप्रदेश झोन भोपाल के समन्वयक श्री राजेश पटेल, सह समन्वयक श्री रामचंद्र गायकवाड़ एवं श्री ओ.पी. तिवारी ने आवश्यक व्यावहारिक सूत्र एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। जिला समन्वयक श्री रमेश नागर ने बताया कि इस वर्ष भोपाल जिले में 250 से अधिक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लगभग 25 हजार विद्यार्थियों को परीक्षा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत “एक कार्यकर्ता – एक विद्यालय” संकल्प के साथ कार्य करने पर विशेष बल दिया जाएगा।
गोष्ठी में जिले की सभी तहसीलों एवं चेतना केंद्रों के परीक्षा प्रभारी एवं प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसके उपरांत भोपाल जिला संगठन की बैठक संपन्न हुई, जिसमें “वृक्ष गंगा अभियान” के अंतर्गत वट सावित्री पर्व पर वट वृक्ष पूजन कर 108 वट वृक्षों का वितरण किया गया तथा 2000 वृक्षारोपण का संकल्प लिया गया। साथ ही 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर व्यसन मुक्ति रैली एवं मानव श्रृंखला आयोजन करने का निर्णय भी लिया गया।


