शिक्षकों की गुणवत्ता पर प्रश्न नहीं,व्यवस्था पर पुनर्विचार आवश्यक
पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी थोपना न्यायसंगत नहीं — जगदीश यादव
भोपाल। राज्य शिक्षक संघ मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा है कि शिक्षा की गुणवत्ता का प्रश्न केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं किया जा सकता।यदि “क्वालिटी एजुकेशन” का एकमात्र आधार टेट परीक्षा को माना जाए,तो यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि वर्ष 2011 से पहले देश की शिक्षा व्यवस्था से निकलकर आज विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत आईएएस, आईपीएस, न्यायाधीश,डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक क्या अयोग्य शिक्षा प्रणाली की देन हैं?उन्होंने कहा कि देश की अनेक पीढ़ियाँ उन शिक्षकों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ीं,जिनकी नियुक्तियाँ टेट लागू होने से पहले हुई थीं। उन्हीं शिक्षकों ने राष्ट्र को प्रशासनिक, वैज्ञानिक और सामाजिक नेतृत्व प्रदान किया।ऐसे में पूर्व से नियुक्त शिक्षकों की योग्यता पर बार-बार प्रश्नचिन्ह लगाना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके वर्षों के समर्पण और अनुभव का भी अपमान है।
जगदीश यादव ने यह भी कहा कि देश के अधिकांश निजी विद्यालयों में आज भी शिक्षकों की नियुक्ति टीईटी जैसी अनिवार्य परीक्षा के आधार पर नहीं होती,फिर भी उन्हीं विद्यालयों से पढ़े विद्यार्थी आईआईटी, नीट, यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।इससे स्पष्ट है कि शिक्षा की गुणवत्ता केवल एक परीक्षा से निर्धारित नहीं होती, बल्कि शिक्षक की निष्ठा,अनुभव,शिक्षण कौशल व विद्यार्थियों के प्रति समर्पण से निर्मित होती है।उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि परीक्षा ही गुणवत्ता का अंतिम पैमाना है,तो फिर नियम सभी संस्थानों और सभी शिक्षकों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। केवल उन शासकीय शिक्षकों को,जिनकी नियुक्ति आरटीई एवं टीईटी लागू होने से पूर्व विधिसम्मत प्रक्रिया से हुई थी,बार-बार परीक्षा के दायरे में लाना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता।प्रदेश अध्यक्ष ने भारत सरकार से मांग की कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों के अनुभव, सेवा और योगदान का सम्मान करते हुए उनके हित में संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए, ताकि शिक्षक सम्मानपूर्वक और पूर्ण मनोयोग से राष्ट्र निर्माण के अपने दायित्व का निर्वहन कर सकें।


