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योग आधारित समग्र शिक्षा से बच्चों का उज्ज्वल भविष्य

बच्चों का विकास केवल शिक्षा से नहीं, बल्कि सही संस्कार, संतुलित मन और निर्मल चेतना से होता है - योग गुरु महेश अग्रवाल

भोपाल। गांधी भवन न्यास द्वारा संचालित ग्रीष्मकालीन कला शिविर के नौवें दिन बच्चों एवं युवाओं में उत्साह, आनंद और रचनात्मक ऊर्जा देखने को मिली। प्रतिदिन प्रातः 7 बजे सर्वधर्म प्रार्थना से प्रारंभ होने वाला यह शिविर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में संवेदनशीलता, रचनात्मकता, अनुशासन और सामाजिक चेतना विकसित करने का कार्य कर रहा है।

11 मई से गांधी भवन परिसर में आयोजित इस शिविर में योग, कला और संस्कार आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने, अभिव्यक्ति और आत्मविकास का अवसर प्रदान किया जा रहा है।

आज आयोजित योग प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार कैलाश आदमी, गांधी भवन न्यास के सचिव अंकित मिश्रा, भोपाल जिला सर्वोदय मंडल अध्यक्ष एवं योग प्रशिक्षण समन्वयक प्रिंस अभिशेख अज्ञानी, योग प्रशिक्षक नेहा वानखेड़े, समाजसेवी भगवती कडबे, सुदेश मारण, सुधा सिंह, अधिवक्ता मोहन दीक्षित एवं सूरज वानखेड़े सहित अनेक बच्चे एवं युवा उपस्थित रहे।

योग गुरु महेश अग्रवाल ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में बच्चों के सामने मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, भावनात्मक असंतुलन, डिजिटल आकर्षण और शिक्षा का बढ़ता बोझ जैसी अनेक चुनौतियाँ उपस्थित हैं। ऐसे समय में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास का वैज्ञानिक एवं प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। योग बच्चों के भीतर छिपी संभावनाओं को जागृत कर उन्हें संतुलित, आत्मविश्वासी और संस्कारित व्यक्तित्व प्रदान करता है।

योग आधारित शिक्षा की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में अधिकतर ध्यान परीक्षा, अंक और उपलब्धियों पर केंद्रित हो गया है, जबकि मानसिक शांति, चरित्र निर्माण, आत्मनियंत्रण और रचनात्मकता जैसे आंतरिक विकास पक्षों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाता। योग आधारित शिक्षा इस कमी को दूर कर बच्चों के मन, मस्तिष्क और चेतना के समग्र विकास में सहायक बनती है।

योग गुरु महेश अग्रवाल के अनुसार बच्चों का मन एक नन्हे पौधे की तरह होता है, जिसे सही वातावरण, प्रेरणा और सकारात्मक मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। योग बच्चों में ग्रहणशीलता, एकाग्रता और सीखने की सहज क्षमता विकसित करता है।

योग और बच्चों का मानसिक विकास

उन्होंने बताया कि प्राणायाम, ध्यान, योगनिद्रा और मंत्र-साधना जैसे अभ्यास बच्चों की स्मरणशक्ति, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता को बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी हैं। नियमित योगाभ्यास से बच्चों में सकारात्मक सोच विकसित होती है तथा चिड़चिड़ापन, तनाव और मानसिक अस्थिरता में कमी आती है।

योग विज्ञान के अनुसार बच्चों का मस्तिष्क अत्यंत संवेदनशील और ऊर्जावान होता है। योग अभ्यास बच्चों की मानसिक ऊर्जा को संतुलित कर उनकी एकाग्रता, स्मृति और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाता है।

प्राणायाम, योगनिद्रा एवं मंत्र-साधना के लाभ

योगनिद्रा को बच्चों के अवचेतन मन तक पहुँचने की प्रभावशाली प्रक्रिया बताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल विश्राम नहीं, बल्कि मानसिक जागरूकता और सीखने की क्षमता बढ़ाने वाली पद्धति है। इसके माध्यम से बच्चों में सकारात्मक संस्कार, आत्मविश्वास और अध्ययन के प्रति रुचि विकसित की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि प्राणायाम मस्तिष्क को ऊर्जा प्रदान कर मानसिक थकान, तनाव और अस्थिरता को कम करता है। योगाभ्यास करने वाले बच्चे सामान्यतः अधिक शांत, अनुशासित और सकारात्मक दिखाई देते हैं।

मंत्र-साधना के विषय में उन्होंने बताया कि मंत्रों का सकारात्मक कंपन बच्चों के अवचेतन मन तक पहुँचकर मानसिक ऊर्जा को जागृत करता है। ध्यान और योगनिद्रा के साथ मंत्र-साधना करने से बच्चों की अध्ययन क्षमता एवं मानसिक संतुलन में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।

योग और चरित्र निर्माण

योग गुरु महेश अग्रवाल ने कहा कि बच्चों पर अत्यधिक अपेक्षाएँ और विचार थोपने के बजाय उन्हें मानसिक स्वतंत्रता, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक वातावरण देना आवश्यक है। योग बच्चों को स्वयं को समझने, भावनाओं को संतुलित रखने और आत्मविश्वासी बनने की शक्ति प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नैतिकता, अनुशासन, सहनशीलता, करुणा, संयम और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का भी आधार है। यही गुण बच्चों को भविष्य में श्रेष्ठ नागरिक और जिम्मेदार इंसान बनने में सहायक बनाते हैं।

शिक्षा में योग का महत्व

योग गुरु महेश अग्रवाल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि विद्यालयों में योग को केवल एक वैकल्पिक गतिविधि न मानकर शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। यदि बचपन से ही बच्चों को योग, प्राणायाम, ध्यान और सकारात्मक जीवनशैली का अभ्यास कराया जाए, तो वे मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ, संतुलित और रचनात्मक बन सकते हैं।

विश्वभर में हुए अनेक वैज्ञानिक शोध यह प्रमाणित कर चुके हैं कि योग बच्चों की स्मरणशक्ति, व्यवहार, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए शिक्षकों, अभिभावकों और नीति-निर्माताओं को मिलकर योग आधारित समग्र शिक्षा की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्चों एवं युवाओं ने योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान सत्र में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शिविर के माध्यम से बच्चों में स्वास्थ्य, संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक चेतना विकसित करने का सतत प्रयास किया जा रहा है।

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