विदिशा: भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा को लेकर गायत्री शक्तिपीठ में योजना गोष्ठी संपन्न, 25 हजार छात्रों को शामिल करने का लक्ष्य



विदिशा। राजीव नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा प्रतिवर्षानुसार आयोजित होने वाली ‘भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा’ की जिला स्तरीय योजना गोष्ठी गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। इस वर्ष गोष्ठी में जिले भर के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों के लगभग 25,000 छात्रों को परीक्षा में सम्मिलित कराने का एक बड़ा और संकल्पित लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रचार-प्रसार के लिए मिले रचनात्मक सुझाव
गोष्ठी के दौरान परीक्षा के सफल संचालन और लक्ष्य प्राप्ति के लिए उपस्थित प्रबुद्धजनों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
अरुण कुमार सोनी (पूर्व लायन अध्यक्ष एवं सदस्य, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा) ने जोर देते हुए कहा कि परीक्षा की महत्ता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए मीडिया का समुचित उपयोग किया जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि शहर और तहसीलों के प्रमुख चौराहों पर आकर्षक बैनर लगाए जाएं।
साथ ही, स्कूल और कॉलेजों में स्टिकर के माध्यम से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रति जागरूक किया जाए।
वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया मार्गदर्शन
कार्यक्रम में गायत्री परिवार के प्रांतीय एवं जोन स्तरीय पदाधिकारियों ने उपस्थित कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और जमीनी स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया। मार्गदर्शन देने वाले मुख्य अतिथियों में शामिल रहे:
श्री श्रीकृष्ण जी शर्मा (प्रांतीय समन्वयक, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा)
श्री रघुनाथ प्रसाद जी हजारी (उपजोन समन्वयक)
श्री रमेश जी अभिलाषी (प्रांतीय समन्वयक, प्रशिक्षण)
श्री ओ.पी. तिवारी जी (उपजोन प्रभारी, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा)
श्री मुकेश तिवारी (जिला समन्वयक)
श्रीमती रश्मि जी पोरवाल (जिला संयोजक, संस्कृति ज्ञान परीक्षा)
गायत्री परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले की सभी तहसीलों से बड़ी संख्या में गायत्री परिजन और पदाधिकारी हिस्सा लेने पहुँचे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
शक्तिपीठ ट्रस्टी सुमन भदोरिया, प्रज्ञा पीठ ट्रस्टी मुकेश श्रीवास्तव, दयाचंद लडिया, सौरभ गुप्ता, सुमन श्रीवास्तव, रश्मि द्विवेदी, अंबिका कुमार, थान सिंह कुशवाह और रघुवीर सिंह किरार सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभी उपस्थित परिजनों ने भारतीय संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के इस पुनीत कार्य में पूरी ऊर्जा के साथ जुटने का संकल्प लिया।





