

पटना: इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक ‘ कॉकरोच जनता पार्टी ‘ (C J P) की खूब चर्चा हो रही है। इस रहस्यमयी पेज का आधिकारिक एक्स (X) हैंडल भारत में बैन हो चुका है, लेकिन इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स का आंकड़ा 17 मिलियन (1.7 करोड़) के पार पहुंच गया है, जो बीजेपी के आधिकारिक फॉलोअर्स से भी अधिक है। अब इस डिजिटल ट्रेंड पर बिहार के राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आरजेडी और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ताओं ने इस मुद्दे को लपकते हुए एक-दूसरे पर जमकर राजनीतिक तीर चलाए हैं।
देश का युवा कीड़ा-मकोड़ा नहीं- आरजेडी
आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का सम्मान करने की बात कहते हुए सीधे सरकार को घेरा। शक्ति यादव ने भावुक अंदाज में सवाल उठाया कि इस देश के युवा और बेरोजगार आखिर कॉकरोच कैसे हो सकते हैं? उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ हो रहा अन्याय ही इस तरह के डिजिटल विरोध के रूप में सामने आ रहा है।
अखिलेश यादव के पोस्ट का समर्थन
आरजेडी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा किए गए ‘बीजेपी वर्सेस कॉकरोच जनता पार्टी’ वाले पोस्ट का पूरी तरह समर्थन किया है।
- शक्ति यादव ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी राजनीतिक दल युवाओं से बैर करेगा, तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।
- देश के युवाओं को कीड़ा-मकोड़ा समझने की भूल किसी को भी नहीं करनी चाहिए- शक्ति सिंह यादव
- यूपी के आगामी चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां निश्चित तौर पर बीजेपी और कॉकरोच जनता पार्टी (युवाओं के आक्रोश) के बीच बड़ी लड़ाई होगी।
कॉकरोच पर जेडीयू का तीखा पलटवार
इस पूरे विवाद पर सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने आरजेडी और समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीतिक भूमिका पूरी तरह खत्म कर ली है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे अखिलेश यादव की राजनीतिक आत्मा का विलय ही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ में हो गया है। नीरज कुमार ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ इंस्टाग्राम पर एक पेज का रजिस्ट्रेशन हो जाने से विपक्षी नेता इसे मुद्दा बनाने के लिए व्याकुल हो गए हैं। नौकरी के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए जेडीयू प्रवक्ता ने कहा, ‘देश और राज्य में नौकरी देने के दो तरीके हैं, एक नीतीश कुमार का विकास मॉडल और दूसरा लालू यादव का मॉडल। अब अखिलेश यादव खुद तय कर लें कि उनके लिए नौकरी का कौन सा पैमाना सही है।’



